पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३७०

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३७५ लोचशिर-जोगी लोचशिर (स को०) अजमोदा। लोटा (हि. स्त्री०) १ छोटा गेटा। यह वर्शन सिमे रोगारक ( स० पु०) पुराणानुसार एक नरकका नाम। | तमोली पान सोंचत हैं। सोनिका (स. स्त्री०) खाद्यभ्यविशेष । लोटुल (स.पु.) लोटनोति ल'द वालात उर । लोचून (हि.पु.) १ लोहेका चुरा। २ रोको कीट अभिल टक। पा चूर्ण । लोटारोन गर (हि.पु.) एक प्रकारका ल गर। पद नोज ग (दि० प्रा० ) एक प्रकारको पाव । इसके दोनों जदाजी या बडे र गरसे छोटा और फेज ल गरसे बढ़ा मोरके सिपके लये होते हैं। होता है। रोट (दि. स्त्री०) लोटोका भायगचक रूप, लोटनेकी)' लोहन (सा० ) इन स्तन चारन, लुढाना। रोढना (हि.मि.) १ घुनना, तोदना। क्रिया या भाव, लुढाना। (पु०) २ उतार घाट । लोटा (स.पो०) इतस्तत: चालन, लुढा । लोढा (दि. पु०) १ पत्रका गोर पोतरा हाडा। इसम सिल पर फिसा चीजको रप कर पोसते ।। रोटन (हिं पु०) १ एक प्रकारका हल । इसकी जोताई २७ देलबएडके वरावर नामा दलका ए म। यह बहुत गहरी नहीं होती। २एक प्रकारका क्यूतर । यद | मोटी लकडोका होता है। इसम दतुभा यार की। नौन पकड कर भूमिर्म लुढ़का देनसे लोटने लगता है। कीले लगा होती है। और नब तक उठापा न जाय, लोरता रहता है। ३ राह लोढिया (हि.सो.) छोटा लोढा, पट्टा । को नही हुइ छोटी पादिगा जो वायु चल्नसे घर लोण (स. पु० ) लोनी माग । उभर दुपती रहती हैं। लोणक (म.की.) लग्ण, नमः । लोटनसजो (वि० स्रो०) एक प्रकारकी सजो । यद सफेद लोणतण (स.ली.) लोग रणरसगुक्त तृण पण और गुलाश रगतो होती है। मुरवे आदिफे गलानेमें तृण, लोगो साग। यह काम माती है। | लोणा (सी०) लपणमस्ताम्या ही। भाटाप, रोटना (हि.नि०) १भूमि पर या क्सिी ऐसे ही भाधार-1 । पोदरादित्वात् साधु । १ भद्राटिका, छोटा नी । कपर उसे छोएप, ऊपर नीचे होते हुए पिसीतापक |२चारी, अमरोनी पिसका साग होता है। अगदस दूसरी जगह आ जाना या गमन करता, सायरोणारग (म० स्त्री०) शुदास्तिका छोरी लगेनो। और उल्टे रेटते हुप पिसी भोरका जाना । २ लुढरना होणार (स.हो.) लपणे ऋउनीनि रपण प्राण, ३काम करवट बदलना, तm ४ विश्राम करना, पृोदरादित्वात् माधु । क्षारविशेष। पर्यावरण लेटना। ५ चरित होना, मुघ होना। एपणा राणमद, 471, यणक्षार, पण। रोटाटा (हि.पु.) विहालम पीटा या स्थान गुण-अति उग्पा तीक्ष्ण पित्तद्धिवार पतयण और पदरनेको रोति । इसमें परफे स्थान पर धू धौर वधू । घातगुल्मादिलनार । में स्थान पर पर बैठाया जाता है। २ वाजीका उल्टा रोणिका (स. स्त्री०) लोणो शार माग। फेर, दारका घरसे उधर हो जाना । उलटफेर । २माहेरो, अमलोगी। रोग(दि.३) धातुका एक गोल पात्र। पह पानी लोणित-पक प्रधान कषि। दूसरा नाम रोटि रमने शाम भाता है। कमो भी इसमें रोटो भो ता है। हार जाती है। ऐसे रोटेसरोंटोदार लोटा पहले शेणी ( स० मी०) प विशेष, लोना। यद दो शेरिफा (स. खा०) पर प्रसारका साग । } प्रकारकी होती है छोगे और यहो । होरा गुण- लेरिया ( पी) दोरा गोल पाता या रथ गुर, पातरमहर, मॉल, दीपन 7 भौर मार लोटे सा होता है। गन्दानिागर, योको गुण-मन, उ यासयद