पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३७७

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लोमन लोग ३८२ नाश हुया करता है। सतण्य लोम ही पापका एकमात्र: कुछ बटे कंग दियाई पठने । धानको कपना के कारण है । समारमे मनुष्य लोममें पढ़ कर स्वामी, रो, अनुमार इन संशोक रंग मी भिन्न भिन्न होते हैं । विशेष पुत्र और अपने सहोदर आदिको विनाश कर डालते हैं। पर पर्यवेक्षण करनेसे मनुष्य के शरीरके मातह, यक्ष. जैनदर्शनके अनुसार बद्द मोहनीय मैं जिसके | पृष्ट तथा पाय आदि भागोंमें घोग्तर झाले तथा लोधिनाम ___ कारण मनुग्य किसी पदार्थको त्याग नहीं सकता अर्थात् गेमराशिका ममावेश दृष्टिगोचर होता है। ये गये त्यागका बाधक होता है। कृपणता, कसी। साधारणतः पंग अथवा कुन्तल यादि नामनि सम्बो लामन ( सं० क्ली० ) लुभ ल्युट् । १ लाभ, लालच । धित रिये जाते हैं। दूसरी दुसरी भापायाम भी मरना २मास। के वंश नथा शरीरकरार थिमि नामले पुकारे जाने लोमना (हिं० कि० ) मुग्ध करना, लुभाना। है। मनुष्य के शरीर के बाल छोटे हनिय शरण उनसे लोभनीय ( स० वि०) लुभ-अनीयर । लामाई, लोमके कोई विशेष कार्य नही होते. दिन्तु खियो मान्न योमा लम्बे लम्बे बालोंसे घई देगोगे स्तिना ही चांज तय्यार लाभयान (F० नि०) लोभाककारी, लालच बढाने । की जाती है। उत्तर भारत प्राचीन तीर्थ प्रयाग स्त्री वाला। तथा पुरपोंके मस्तर मुण्डन की प्रथा है। उनमय वालीको एकदित करके लोग येचते है ! उन लम्ये लेोमविजयी (सं० पु० ) वह राजा जो असलमे लडाई न करना चाहता हो कुछ धन मादि चाहना हो । कौटिल्यने । वालोंका रस्सी इत्यादि नाना प्रकारको ध्यवहागपयोगी लिग्वा है, कि ऐसका कुछ धन टे कर मिन बना लेना चार्ज तैयार की जाती है। इतिहास पढ़नेस जाना दाहिए। जाता है, कि रोमकं कार्थेज नगरके अबरा होने पर कार्थेन वीराद्गणाओंने राजधानीका रक्षाके लिये अपने लोभाना (हिं० कि० ) मुग्ध होना, मोहित होना । अपने गिरक लन्चे लम्ये वालोंको काट कर रम्मी तैय्यार लोभित (सं० त्रि०) लब्ध, मुग्ध, लु माया हुआ। का घो। रोमसाम्राज्य देखो। लोमिन (सं० त्रि०) लोभोऽस्म्यास्तीति लोभ इनि। लोम युक्त, जिसे किसी वातका लोम हो । २ वहुन अधिक चौपाये जानवरों शरोग्के राया। लक्ष्य करके लोभ करनेवाला, लालची । ३लुब्ध, ल भाया एया। लेोग उन्हें दो श्रेणियों में विभक्त करते हैं, एक स्वमालामा पर्याय-गृथ्नु, गईन, लुब्ध, अमिलापुक, तृष्णक, लोम. तथा दसर्ग प्रनिलीमा। तिव्वतके देशीय भेड़, बकरे, लिप्सु। काबुली दुम्बा तथा साम्चेका तसद्धि नामक हरिणके लोमी (दि० वि०) लोभिन देवो । गए पशम कहलाते है। झिम्न सिौ देशके कुत्ते, लोभ्य (सं० वि० ) लुम्पने इति लुम-यन् । १ लोभनीय, विडाल प्रभृति पालतू जानवरोंके शरीरमे लम्बे लम्बे वाल लालच करने के योग्य। (पु० ) २ मुद्रा। ३ हरिताल, पैदा होते है। उपप्रधान देशके जड़ली उल्लु तथा हरनाल । तुमेरु प्रदेश मग दुसरे दूसरे शीतप्रधान प्रदेशोंके नेत लोम (सं० क्ली०) १ गरीग्के केश, रोया । मनुष्य तथा दूसरे उल्ल कोंक शरीरमे घने रोए पैदा होते है। महिय, दुसरे प्राणियोंके शरीरमे छोटे छोटे छिद्र होने हैं। उन शाकर आदि म्वल्पलोमा पशुओंके रोओंसे कोई विशेष छिद्रोमें जो छोटे तथा वडे केश दियाई पडने है, उन्हें कार्य नहीं होता। शुकगेकी पोट पर एक प्रकारके कडे ही लोग रोम, लोम, रों या आदि कहत है। जिन छिद्रों। कडे टीर्घाकार वाल होते हैं, जो 'शकरकी कृची'के से ये रोये निकलते है वे लोमकर कहलाते हैं। नामसे प्रसिद्ध हैं। उन कृचियोंसे 'बस' इत्यादि बनाये प्राणियोंके शरीरमे ये लोम दूसरो तरह उपजने हैं 1; जाते है। सिंहके मस्तकके दाल, घोड़े के मम्ता तथा शरीरमेंके स्थानों में छोटे छोटे कितने तथा कितने स्थानों में प्रीवादेशके लम्बे लम्बे वाल एवं प्रायः सभी दूसरे दुसरे...