पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३८२

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लोग-मोह ३२७ का पक पक्षी। यह बटेरसे छोटा होता है और काश्मीर, । लोष्ट (म • पु० ) लेट, ढेग। मध्यप्रदेश तथा सयुक्तप्रातमें पाया जाना है। नर | रोष्द्र (स.पु.) रोट रन् । राष्ट देला। प्राय मादासे कुछ अधिक बढो होता है। शिकारी रोसर-पायप्रदेश के काइडा जिले स्पिति राम्या त इस शिकार करते हैं। इसे गुरगा भी कहते हैं। र्गत परतपृष्ठस्थ एक गएडग्राम। यह अभा० ३२ २८ गया-अयोध्या प्रदेशके उपाय जिला तर्गत एक ३० तथा देशा० ७७४६ पू० तक पिस्तृा है तथा समुद्र नगर । यह अक्षा०२६ २० तथा देगा ८११ को तहस १३४०० फुट ऊचा है। इसके अलाना और पू० मध्य स. पदी तट पर भरस्थित है। पूना पर | काइ मा गाय इतने ऊचे पर नहीं है। उ*नार गरके साथ यदाका व्यापार चलता है। लोहड़ा (हिं० पु०) लोहेका एक प्रगरका पात जिसम लोवागढ-पखावप्रदेश द मिलान्तर्गत पर पत। पाना पकाया जाता है। क्भा कभी इसमें दस्ता भी मैदानी दम्ो। | लगा रहता है। २ तसला। टोगन (10 पु०) अधिक पान म घुली हुइ ओपधि । लोह (स० पु० क्लो०) लूपनेडोनेति लू वाहुरकात् ह । यह रोरम उारसे रगाने, तिमी पोडिन अप धोन | स्पेनामररात धातुविशेष हा । सस्हन पयाय-ह, या तर रखने सादिरे काममें गाती है। जोङ्गक, सर्वतजस, रधिर । तीक्ष्ण, मुण्ड और कान रोशरापणि (स.पु.) एक प्राचीन प्रयास मेदसलेोद तीन वारसा होना है। मुण्डलोदक पर्याय- रोण ( स० पु०मी०) रोएत इति लोप घम् यदा यत । मुण्ड, मुण्डायस, दूपत्मार, जिलात्मज, अश्मन । कान्त दशी टू (ल एपनिती। उण १२) इति प्रपन निपात , रोहके पाय-आर, पृष्णायस । तीक्ष्णहके पयाय- पात् साधु । १ मृत्तिावएड, देला। पयायोष्ट तीक्ष्ण शनायम, शस्त्र, पिएड, पिएटापस, शट, भायम, दलि। लौदमर । ३लेष्टु। निशित, तीत । इग, मुण्डज, थपस, चित्रायम घीना । रोटा ( स० पु०) १ मृत्पिण्ड। २ चन्दन ॥ दि रम्रन वैज्ञानिक विवरया नौह शब्दमें दग्ना। पी रस्तु। वैद्या मतस इसका गुण-पक्ष जण निर, वात लोधन (स.पु.)ोट ताति इन टर। तो पित्त, कफ, प्रमेह, पाएड और शूलनाशक । पर औजार जिसमे खेत के देले फोडत हैं, पटेला। ____ मनुमं लिया है, कि अश्म (पत्थर ) सहदेवी गोष्टदेव-चीनामदनस्तोत्रके रचयिता तथा रम्यदेव । उहात्ति होती है। पुत्र । 4 U'कएठनस्तिक प्रणेता महरे मममाम ___पैया में रोहको उतात्ति, गुण और मारणादिक्षा विष पे। विषय इस प्रकार रिखा है। रोपन ( स० को०) मृत्पिण्ड । पुगार देर रानव युद्ध में देवताओं द्वारा ठोमिल रोएमेदा (म० पु०) मिनतोति भिटायु, नष्टस्य भेदन | TIम दानर मारा गया था। उमीक शरीरसे भाग लाष्टमगसाधन मुद्गर, यह मुगदर निसमे देला पोहा प्रारके रेहेकी उत्पत्ति हुइ । लोद विशेष उपकारको। जाता है, पटेला। पर्याप-टभेदन, रे।एन, अनुन्न । सैरन या बीपघमें इस शोधन पर ध्यरहार किया जाता पाटि पोटो है। गोधित रोक्ष विशेष उपकारी है। अशोधित लोटमदिन ( स ० ० ) परेशा। दका रूपन रिनेमे पण्डता, छ, होग, श्रष्ट, रोमय (स.नि०) रोटस्वरूपे मघट लारन्यरूप | अमरी, सुहास आदि रोग उत्पन होत हैं। इमसे मृत्यु देने समान। 11 भी हो सकता है। इसा व्यवहार पदापि नहीं गेष्टपत् (स. त्रि०) मृत्तिकानिर्मित, मिझोरा यना मा।। कसा चाहिये। लोटस-एर मातीन कथि। । नोधनप्रणाली-लोहका बारीक पत्तर या बर माग्न रोटाक्ष (स० पु०) एक ऋपिका नाम । (Healरकौतुदी) । म सलाय । पाछे गरम रहते उस पर यथाक्रम तेल, मट्ठा,