पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४१५

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परक ( "००) रसादिक in Eा जाणारलड़ श श-६(20 पु० ) नीति -7। -: (-106) मिड, वह लो अपने दिए, किला : एक मिनी। मन्त्र (२०१०), 'गच्छामा बढ़। ३ राज- (R० न्या० ) पुरानुन, नदा जो मन्त्रि वाग नापति जिनसे बगमा गौरव पर्वतम किलनी । ( मा पु० ) और पात्र लापको गगहा! इसरानामगधारा मी। वन (सं० पु० ) मानायचे दर्शन अन ड.। १ वेगुयब, -चट्टग्राम दक्षिण-पूर्वाने चयन प्राचीन असावन । २ बरगनय पुत। (नि०) नं बाद कार। यह नगर रामाया राम नानो चिन ।। महमासाने नि जन उः । अज्ञात जिसका जन्म वन्देमोरे, नाना Parch.or ra गढ़में मस्या समाजाती। पाय-योजन, नत्र । ( रसी० ) वाणिज्य मा उल्लिवित है। ५वमोचना, पालोचन। गरीर ( १० पु.): मसला राजा ( T० स्त्री० ) चमो जायते इति जन : ततधाप ! वंग ।। १ चमगचना, जलानर ! भावप्रकाशके अनुसार यह चंगाना (ले० पु०) बाहर, पर जानने वृहष्ण, वृत्य. बल्य, स्यादु और शीतल गुणगुक तथा . नः यष्टीनत्पुरुष। रोचना, वा. नाणास, र, पित्त, अन्न, कामला, इष्ट, बण, वान लोचना नोच्न देवी। और मत्रकृच्छ क मानी गई है। चार (PIOfr. ) जो चांगला, आदि अन्या । पालन ज्योतिक भूमिमेद । नाता है। वसनाटल (गं० दुव्राजातन्तपइन्टः। वेणुयव. वर्मन ( 0) यांना काम। वारसा चावला नगर(10)गा। ___चजतिलक (२०१०) एक छन्दका नाम्। नंग (10 जी0) चंगरय कीनिः। कुल गरिमा, तिल (i० ला० ) पिका रोगन नेटभेट । जमा नाग्य। बदला (स्त्री०) जीरिका नाम तृणविशेष, शरजा (100) बालागीं । पांसा। चना दी। मन (10 hिo) वनकार्ग या वननतिष्टा। २नमा कामराला। ' बत्रा (सं० खा० ) पुलका पर पत्नीमा नाम । शनमागन (दि०) चन-५ मा इतिजकामः, (नृसिंह मास ) ने भागनः। गुरपान, चनागत ।२ कन्द- " व शमां (म० रग० ) १ कटकी। २ शतपर्वा नामकी पि। (गन्दकनीनि. ३ एमारकी दृ।। किंशुक, बैन्न । ( राजनि० ) ) सत्र (FT० पु.) यात्रामा नाग, नाक, ..... धर ( नि०) शं शतानि धृ-शच् । १चत्र | प्रारिमाल । २ वामदारक्षाकारी, शही मर्यादा ri (100) 1-7 झागमवास्या शनीति बनेगळा । (g० ) ३ अदमे उत्पन, संतान । ४ विभिन्न रच नित्यानपावरांचना, बंगलादन। मतानग सम्पदाम्भेट । मृत्या० ३६५) वसमजापतितका नामयहा : गवामित्र-पदाहिनाणिक । इन्होंने न्यायतत्त्व- रतन पुष्प होना। ( मारत पन) it. गोगडिविचार आदि के अन्ध लिखे हैं। यी । क्रीविषयक शवाय (सं०ली०) गम्-धान्यम् । वेयर वांमका दिव्या 115) । आटा