पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४१९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


  • २४

निगमले मायका नाश होता भी अधिक समरमाल पहानोको ला कर इस कारण नोवेमराजाचय। बागादिया बनाया था। जामीले पण्डित रामशरण जाना नागीश सा-परिक हुए थे। उन्होंने इस प्रामम बहाया मान्य के पूर्व पुस्प देवदत्त पनदेशक राजा ४१ टोलाएन बार नवा काशी और मिबिलासे अध्या- आदिगाले समसामरिक। मुशिनावाद जिले के दत्त कलाकर छात्रों को स्कृति, श्रुति, वेदान्त, न्याय, साहित्य पाचो नाममाम उन लोगोंका आदिनिबारू है। इत्त और अलङ्कारशान्त्र सिम्लाने का उपाय कर दिया था। वनजमादारके राजमहल रहनेले उस ग्रामका बजटाटा टोलका कुल वर्गही देते थे। नाम पडा है। देवदत्तले चील ोही नोचे द्वारकानाथ दत्त दत्तवारीका परित्याग कर अमहापहने लगे। वनियोले अत्याचारके मयसे राज्ञा गमेश्वरने बांश पाहे उनके पोल उदयत्तने मागोन्शी तारर पालो। घाडिशा राजप्रासाद परित्राद्वारा सुरक्षित कर लिया। नामक स्थानमे नगर साया। रामेश्वरले गढसेच्दराजमवन 'गढवाली' नामसे प्रसिद्ध द्वारकानाथके पौत्र सहवामदत्तने ६८० वगला । । उस परिवाको परिधिप्रायः एक मील थी। धनु- चाण, दाल, तलवार और मकलेसा पैदल सिपाहो गल (१५७३30) में मुगल शाह अवारने एक फामान प्राप्त किया। उसने उन्हें ज्ञानार' की उपाधि गढ़ पहरा देने थे। पारश्यकतानुसार बहा कुछ मिली था। महसाक्षो जागोरखा जनमहपुर पर- जमान सी रग्बो जाती थी। बों लोग जब निवेणीको गना मिला। सहन्त्रालय पुन उदय इनको वाराह टूटने गये, तब यहाके कुल लोगोंने गढ़में घस पर अकावरने वशानुक्रम 'ममानिराय' की उपाधि दी अपनी पनी जान बचाई थी। यह संवाट पा कर वर्गियो- श्री। १६२८ १८ में उदयके ज्येष्ठ पुत्र जयानन्दने सम्राट ने गढवाटी पर घेरा डाला। राजा रामेश्वर के पुत्र राजा शाहजहानसे मजुमदार' की अपाधि और कोटएकतिर- रघुदेवने दलबलसे सक्षित हो राविकालमें युद्ध र मर- पुर परगना हा प्राप्त किया। जयानन्द राय मडम- हटाको पहन किया और वहासे मार भगाग । रधुढेवने बार उडे लडके राज्यसो वादशाहने १२ रवि १०६६ पूर्व पाईका संस्कार कर उसके चारो ओर एक दूसरी रिजरी शक (१६४६ ई० ) है 'मजुमदार' और 'चौधरी खाई खनबाई थी। की उपाधि दी। उस समय देश में चार मजुमदार थे राजा रामेश्वर रायते १०वों सफर १०६० हिजरोमें उनमेंसे राघव एक थे। टस उपाधिले साथ राघवने औरङ्गजेर बादशाहसे एक सनद पाई थी। उससे उनको निम्नलिखित २१ परगनाको जमींदारी और तहुत सी ज्येष्ठ पुन क्रमले 'गजा महाशय' की उपाधि दी गई थी। निर भूमि उपहारमे दी थी-यार्शा, हलदा, मापदानि ___ इस सनदके साथ वादशाहने उन्हें पञ्जपट्टा (पांच पुर, पाजनोर, बोडो, जहानाबाद, शाईस्तानगर, शाहा पोशाक) खिलयत तधा राजपदवीको सम्मानके साथ नगर, रायपुर, लोतवाली, पाउनान, खोसालपुर, बस रक्षा करनेके लिये वांगडिया प्रामसें 80१ वीघा जमीन कदर पकान, अमीराबाद, जङ्गलीपुर, माइहाटी, हारली जागीर एवं छलकत्ता बालिन्दा, होतियागढ़, अलोयार- नहर मुज.म्फरपुर, हातिकान्दी, मेलिपुर आदि । उक्त 'पतिनानासन करने के लिये रायवने बांगवाडीमे एक पुर, मेडनमल, मागुरा, घाशी. ख्लोड, मानपुर, सुलतान माल बनवणानदीगर्भम पाटलीपासादलीन हो जानेकी पुर, कुजपुर और कौनिया नामक वारह परगनोंकी जमी- दारी दी थी। भाशाले राघदे बडे लडके रानेश्वर बाँशवेडियामे राजपाट उटा लाये। उस समय यह एक ग्राम्साल वाशवाडियाका वासुदेवमन्दिर मी गजा रामेश्वरका गा। रामेरने लाना स्यानो ३६० घर ब्राह्मण बनाया इमा है। यह ईसा बना है और उसके ऊपर पण्डित.यस्थ, वंद्यौर सिविध शावरणीय हिन्दयों तरह तरह कारीगरी दिसलाई गई है।