पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४३४

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नोक्ति-वक्षः ४३६ एक स्पार्थ और मरा शिपाया है। निम्नोन्त उदा : मनोहर वसन्तकाला टोपा कान्तको स्याग पर हरणसे इसका स्पर पता चलेगा- कामिनाका चिंत्त व्यथित नहीं होता, सचमुच व्यथित के यू" स्थान एव मम्प्रति वय मनो विशेषाय होता है । यहा पर निषेधाधार्म नम् शद प्रयुतामा है किंतरिक्ष्ग सवा फपिणपतियनास्ति मुमा हरि । मितु अपर पक्ष कामा अधात् गिविशेष द्वारा विधि वामा यूयमा विनम्वरसि रस्मरा पत्तन मामा होता है। यनास्मासु विका-यमनम पुस्यय योपिट भम ॥" चकोला (म. पु० ) १ एक गएडग्राम। (स्थायरित्मा

  • यूय तुम लोग कौन हो? इस प्रश्न उत्तरम। ७६१८) २ उसा नामका एक गर ।

उत्तरदाता रहा, हम लोग जरमें नहा।। यहा पर । (स्थासरि मा ६३) को किम् श का प्रथमा विभक्तिका वचन न मान पर बमोष्ठिका ( स. खा) कोष्ठोऽल्पस्या पति, ठन् । जर पाचक क' शब्दका सप्समा निमविषा एक्यचन पद्धसना दिबोष्ठस्य मनता मागत अतोऽन्यास्तथा 'क'मार उत्तर दिया गया, इस कारण यह वनोति । त्यम् । यद्वा ना मोठो यस्या । तत स्वायें 4 राशि हर है। प्रत्युत्तरम-प्रताशिवाय पदम जिशाम्य । अत इत्यम् । अदृप्टरददार', ऐमा मद६ सा जिमग ज्ञापन दिया गया है। यहा पर 12 पक्षा कार 'गाय । दात न गुले ओंठ कुछ टे हो जाय, मुमतान। मनात (नाग) यह विशए अापण करप ही उत्तर । पर्याय-स्मित । दिया गया था, निशप शदवा साधारण अथ नहो रिया वर (म वि०) १ निर्यगामी, तिरल या टेढा चम्ने गया। तब तुम लोग क्या यह कहना चाहत, 'दम रोगबाठा। २ नस्तन परिसमणशील, इतर पर घूमने पक्षी है जया सप है, हा विगु मगार सो रहे हैं?' वाला। पदा पर विशष शब्दमा साधारण अधा नहा लिए गया 'न् ( मलि०) गुणका, स्तोता। है, विशम्दस पक्षी और शेष इस सपका सय रिया परी ( म. सा.) गुणपको। (ऋर १११४४६) गया है, इस कारण यह बमोति हुई है। याम (70 पु०) सुद्धत गनुमार एक प्रकारका मद्य । द्वितोयाम -नदा तद तुम लोग क्या नामा हा! (परस्म देखे। अथात् प्रतिफल कथा प्रण करत हो (चामा १ का प क्ष (सी .) उच्यतऽनेनति । यन् (पचिनिभ्या का है प्रतियादी)। पर्यापि हम एक अधम प्रश्न मुर च । उ ४।२१६) इति असुन् सुट । रसुन् इति परन ह आर तुम उसका अधस्त दा । उत्तरमा रमानाथ धातुप्रदोषश्च । १ जनविशेष, पेट और गले यामा का प्रतिकृयादान रे र साधारणत कदाच पडनेशला मग निमम सिमोंरे तन और खा मा लिया और क्या-वाह जो मधे! तुम ऐसे पुरुषांक म्तनके से चित्र होते हैं, छातो। पाय-यो। कामास हो गये, कि तुम्ह पुरुषा नारीका भ्रम भुजा तर, उर, नत्स, गहू उत्सङ्ग, क्षण, गणपाटर हा गया। यहा यामा शकदा अर्थ हुए मला यार औरयत स्था। २५ प्रतिकृयादा । प्रस्तान प्रतिकूल यादो अथ गरुरपुराणर्म वपके शुभाशुभ रक्षण लिये हैं। भगाया है। किन्तु उत्तरदाता सो अथ मान र उत्तर मपक्षोरिशिष्ट मना, पानप्रशोयतिर और शक्ति दते हैं, यही वोनि है। इन शेना का सवाग होन| नाला तथा विषमयक्ष व्यक्ति गिधा गौर नव द्वारा कारण इमको समगरेप पहत है। गन्य पक्षम यह निमाप्राप्त दोने हैं। "अजरान समवक्षाः स्यात् पानभोगभिरूजित । "काल पाक्तिपावाले सहकारमनाइरे। बक्षाभिविषमनिय शस्त्रेण निसनस्तथा ॥" नागस परित्यागात् म्याश्चवा 1 दूया ॥" (गरुडपुराण ६६ १०) । कोकिलावस परिपूर्ण यात्रमुक किमिा (पु० ) यहतानि यह { वादार सम्यग्छन्दसि ।