पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४३९

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४४४ -ब-बहिमाचन्द्र चट्टोपाध्याय ' का पथ रोकनेकी चेष्टा की। इसी उद्देशले उसी साल बचपनसे ही यदिमचन्द्रको मेधा और प्रतिभाका ववेलखण्ड भूभाग ले र स्वतन्त्र एजना प्रतिष्ठित हुई। परिचय पाया जाता है। पांच वर्ष की उम्र में इन्हें एक बुन्डेन्नावण्ड यौर उन्टेना देखो। हो दिनमें वर्णतान सम्ररूपसे हो गया था। कांटा इस स्थानका भूपरिमाण ११३२३ वर्गमील है। इसमें ' पाढाकी गालामें इनकी प्रथम परोक्षा। जब सनकी फुल ४ महर और १८३२ ग्राम लगते हैं। रेना, ननोट, उपर बाट वर्गमी यो उजनमय उनके पिता मेदिनीपुरते तेहार, नोहाबन्द, कोठी, मिद्धपुग और जानार राज्य ले डिपटी गलटर थे। वो अपने साथ पर यह एजेन्सी बनी है। गते थे। उन्होंने एन मेटिनोपुरले गरेको मल्लमें ___दन सम सामन्तराज्यो मध्य नेवल रेवा राजाले भनी पर दिया । न ममय किन्ने अपनी बुनिमना जीराजने सन्धिपन दिया है। यहाको सात साजो परिचय दिया धावा असाधारण प्रतिवर्ष पण्यद्रव्य वाणिजा लिये किसी प्रकारका शुरू नहीं पार कर उन्रें तो ली। दिपुर जिले में मयि ने मार्गन नगा नदी बड (म०) तोनि बहु-शन । यस नदी हरवादी छलाल सिनातन मोड़।(लि०)२वसभामा विमाना । - बड्डुलाल (४०) गंगोरा एमोशन रम- कर ( पु.) पर थान जब से नही ली है। रोजगारला जा नदीश मोड़। २८.२" यत्रो २४ ले पदी पट्टनेज ( ) अगस्तिक्ष, मला किचलने ल लागली. वसा ( लो० ) रा रा । वल्गानभाग, चारजाती या कि गालेज जी अजनी नवेगा और शिक्षामा परिचय पा अगली मेंड़ी। षड्डा (सं० पु. एक पर्वतका नाम । कर अध्यापमाण पिरिगत होते थे। पहिम नेवल पाठ्यपुस्तक पढ़ कर तुम नहीं होने थे, कालेज वकालकाचार्य-प्राचीन ज्योतिर्विदभेद । पुस्तकालयमें जा करके वच्छी अच्छी किताब पढा परते वड्डाला (सं० स्त्री०) बङ्गालको प्राचीन गजधानोका : थे। हुगलोकालेजसे इन्होंने सिनियर स्कालरसिप- नाम जिसके कारण उस देशका बगाल नाम पडा। परीक्षा प्रशंसाके साथ पास की थी। इस समय इन्दोंने (राजतर० ३१४८०) किसी अध्यापकके निकट चार वर्ष तक संस्कृत प्रन्थ वङ्किणी (स० स्त्री० ) कोल. नासिका नामक क्षपभेद । पढ़े। कालेजमैं पढ़ते समय इनकी प्रशंसा सभी वकिम ( स० क्ली०) बङ्क-इमनिच् । ईपत् वन, कुछ अध्यापकोंके मुखसे सुनी जाती थी। केवल साहित्यमें टेढ़ा या झुका हुआ। ही नही, अङ्कशास्त्र में भी इनकी असाधारण व्युत्पत्ति हो वकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय-बङ्गके प्रतिभाशाली अद्वितीय | गई थी। औपन्यासिक, चिन्ताशील कवि और एक प्रधान दार्श ____ हुगली फालेजमें अध्ययन शेप कर ये कलकत्ते आये निक। १८६८ ई०की २७वीं जूनको नहाटी स्टेशनके और प्रेसिडेन्सी कालेजमें आईन पढ़ने लगे। इसी समय पाश्वस्थ कांटालपाड़ा ग्राममें साहित्यरथी वडिमचन्द्रने अर्थात् १८५८ ई०में विश्वविद्यालयमें पहले पहल वी, ए, जन्म ग्रहण किया। परीक्षा प्रचलित हुई। उस समय वनिमचन्द्रकी उमर वद्धिमचन्द्र के पिता यादवचन्द्र लार्ड हार्डिक्षकं समय २० वर्षकी थी। आईन पढ़ते पढ़ने हो इन्होंने वी, ए, डिपटी कलक्टर थे। उनके चार पुत्र थे, श्यामाचरण, परीक्षा दी तथा विशेष प्रशंलाके साथ उत्तीर्ण हुए। वे सनीयचन्द्र, वकिमचन्द्र और पूर्णचन्द्र । कलकत्ता विश्वविद्यालयके प्रथम वर्षके वो, ए, थे।