पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४६८

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बद्रदेश ४७३ पाहर हुई है। उसप्त रयिगुम, जयमहारान नरगुप्त, प्रस्ट लेकर गया पयन्त उस समय भा वौद्धाधिभार चलता था, दित्य, क्रमादित्य,विष्णुगुम आदि नाम मिलता? | इन मर) राजदोलक राढदेश पर पाक्रमणकार म दक्षिणापथक गुप्त राजा में विमन तथा क्व राजत्व पिया इमके , बहुमामन्त राजाओंन उनका यल बढाया था। राजेद्र जानाश उपकरण मान तक भी घाहर नहा हुआ है। चोक लौटने पर सभी सामत उनके अनुगामी हुए थे, उनमें नर गुप्त या शशा नरद्र गुप्त नाम ' निस | ऐमा वोध नही होता। में प्रसिद्ध है। ये एक घोरतर बौद्धनिद्वपा थे। __अघि मम्मन महागन हरिचको मृत्यु हात पर शूर्पणका अभ्युदय। ममूने राढवगम जगजाता 27 ग. 1 ऐमा सुयोग पा देवनागके समय ही उत्तर राढम या पर्णसुवर्ण | राम तमेन पुन मसन राढदेश पर कसा कर आदिवा भ्युदय दुआ। आदिशरका परनाम था वैद । इनके बाद उन पुत्र जियन। विजय जयन्त। ये परिरके पौत्र और माधशरके पुत्र थे। पुत्र बल गारमेन और र गलक पुत्र मणसन आदि उन्हो न थोडे ही मायने पोण्डप नय से वा। प्रसिद्ध राजाभान राज्य किया । इनका विस्तृत शिरण सनधानो कायम का भार ६५४ में या ७३२ इ०में इही सर शोमें दवा । यथाराति अगिपित हुए। बनातम मुमानमान प्रभाव । महाराज शादिशूर भ्युदय कारमें 37 अधिकार इम्बामा १२०३ मे या व गाम मुमलमान में सामानिध निरग्नि तथा सैन अश्या वादनानापन शासन आरम्भ दुस। तभीम उन माइम देशम वाहाणका नाम था। उनमये गढदायरामा सप्तशती अपनी यस्ता कायम कर रखी है। उम मरयम लेकर ब्राह्मण लोग हो प्रघात थे। अरेज कनक व गालका नागी फ ममय जाय नय तक यादिधर जावित रहे, तब ता नोजागत ५ वा राक मुसलमान रोग प्रम देश में रानस्त पर पैदिक ब्राह्मणों 1 गीदमण्डल में वैदिकधर्म नचारम सुयोग गये हैं। और सुविधा पाइ थी। उन मरनो समय पश्चिमो मद्दमाद नथार पिता धार पर बनार थे। सर गौडर्म और मगधर्म बौद्ध लोगामिर कर सुलतान गयासुद्दी। महमाद शाहक समय ये गजनी चयर पुत्र गोपालको अमिपिन किया एवं उनम् | बाये। यहा पुदिन रह रवे गारतरप पधुरे पय द्वारा फिरस बौद्धपाधान्य स्थापनका आयोजन होना मालिक मुयाजिम हिमाम उद्दान या नीवरी करने रगा। कितु नव तर मादिर गायन रहे तब तक | लगे। ये सुलतान साहय उद्दोन एक प्रमिद मदस्य थे। ये एउमा 740 मरे। पानरास दया । तदान्तर ११६६ ६०में उदान व गाल पर हम कर पूर्व व पारश। १२ ३ ६०में राढ आर पारेद्र 111 प्रदय नारा लिया। नपति रानेट चोल थाममणस पूरा यह हीनरल महम्मद इस्तियार खिरनामे आरम्भ करके कादर हा गया। इस ममय विक्रमपुरमें रम घश का अभ्युदय बाँक शासन समय ता व गा- दिल्ला मानायभुतगा। था। पम घीय क्मि भूपतिन सवप्रथम पूर्व वन अधि। उस समय दाम, बिरनो घऔर तुगमनाप दिलोभ्यर कार क्यिा, मी तर मालूम नहीं। इस घशमं हरियम गण पिन शान पातनिधिष द्वारा व गार गासन दर नामक पक प्रबाट पराम वैष्णा नतिश इतिहास परत थे। मितु सुरसान फ्वर उद्दान ममप व गार मिला है। शिलालिपि, तानासन और पैदिक कुर ! दिलोया अमानता तोह स्याचार हो गया । यह प्रधमें इस नरपारका कीत्ति और परिचय विस्त है। । १३४० इ०को यात ६। उहन बगार राज्यको समग्र सा-राजा। नासनाकि अपन हाथवर बपनेश धादशाह कह पर मदारान परिवर्मयका प्रमाय गगा उत्तरी किनारेम घोषणा की। जय त भावर पादशाह दायुदको परा नहीं फै। उत्तरराट और गाय पराम्य पर इस जिन न कर १५७६ इ० व गाठ याधीता हरण को, Vol x 119