पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४७२

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परदेश नाम यारी गोगोंने किस तरह अपनी कोठीकी रक्षाफे लिये ] विठाया गया । १७६५ ६० मीरजाफरको मृत्यु हो गई। मैन्य इकट्ठा किया था इतिहास पाठक यह मच्छी तरह पीछे उनके लडके ननम उद्दौलाको घ गाली ममनद पर पानने होंगे । १६४० xot हुगली नगरमें १६४२६० अभिपिच किया गया था। उत साल के जा मानेसे यालेश्वरमें कोटा पोली गइ। १६४५४६ ४०में मम्राट । नजम अगरेज कम्पनाफे गृत्तिभोगी हुए। इस सालकी गाहा मानुफुल्य टोर दा० मार्नन प्रेरियट याउटन ! १खों अगस्तको मुगठ मनाट्ने पाइसको नागीरस्वरूप को प्राधनामे हुगली में अगरेज पणि मम्प्रदायको बङ्गार, बिहार और उडीसाशी दाराती दा । यह दीवाना गोटी जम गई। तीसे उन पम्पना अपनी अधिकारमा मनद ही व गारपे य गरेन रानन्यका प्रयास और प्राम में विशेष गावान् । क्योंकि इस समय प्रतिदद्वा दोर हुइ । तभीसे अगरेज लोग ही व गाठक प्रात ओग्नान निमार परामो उमन आदि विभि शामनकर्ता हो गपे एय मुर्शिदायादके पास अणिम्मापदायके माघ पनिश्यता पर अगरेजोंगे अगरेजोस वृत्ति पाने गे । पूनोंक तालिकामें पानी म्याशस्था पानी पी थी। इस समय अ गरेनों बहुत मक्षेपसे इस प्रतिमानाला नयावशा परिचय दापनी याणिन्य कोठी मरठी तरह चाने के लिये एक दिया गया है। एक पर नियुक्त किया। ईष्ट इडिया कम्पन के अधीनस्थ यगाक एनेट । अगरेन दम्पतीले इस प्रभाववृद्धिके माथ माय कार्यग्रहयाकाजा दिरेकरके आदेतसे पतंग्के वाले एक पक्ष गगना रना | मिराल्फ कारराइट १६३३ पड़ा था। १६६०६० जार चानक कलत्तम रहे। 1 जइस १८६२ इ० नका मृत्यु हो गई। इस मोर गोमे कर , थोड पत्ते में परेन पम्पनीको एने मी 331 फर लाह गह थी। कैपदेन नान काभेन १५५० १८६६०में श्रीदनेवा र गाजिम रसमान यगर मि. जेम्मानमा नामाकर्ता हुप । १६६८ १०म उनी अगरेजसम्पनी ! पार पाडे प्रभ १५४३ को परमत्ता और तत्मा नहित दो गाय से कर | , जार्ज गयरन यहाकी प्रनाओंके रोष गुण न्यायविचार करने का , जोनापान प्रेरिता १६५८ समता दी । उनी भादेशमे उन यधर्म काम मिरियम लर १६६३ "रचिलिम' बिलेको नोच डाली गइ। अगरेज शेम त्रिनेम गरनर अप रिमदृश आचरणसे विरक्त होकर नवाध वाटर पोयेल मिरानुद्दीगने १७५६६०में कलकत्ते पर हमय दर , माथियस भिसट १६७० दिया और विजय पाह। दुमरे वर मद्राससे मार वगाजर गवनर। पर्नर काने बरकता फिर मुसलमानोंके गधमे छान मि.पिलियम हेनेम १६८२ जुनाई लिया। १७१७ इ०के नन महीने में सिरानो गहामे " , गिफोट १६८४ अगस्त उतार निया मीर 3 हे नित कर कापो मीरजापर सर पडमार्ड लिटन १६६६ जुगइ अत्री वा बगारके सिंहासन पर बिठाया। यमे , चारस शायर १६ मा १७०० अगरेज सम्पनीके राजदयका सूत्रपात हुआ । 'मीरमापा मिल जान पाया भी जनवरी १७०१ भ गरेजोये अभिमतम घगारका शासन करने परा माण्टनो पोयरडे २०ी जुलाइ १७१० इमुख हुप, तय मारकामिम अलोगो पगाला शामा , जान रामेल धामा १७११ भार दिया गया। पासिम अठीक गरजपो होनमे , रायर्ट होम री दिस० १७१३ उहे पदच्युत कर पुन मीरजापरको वदसिहासन पर । सामुएल पित १२वी न० १७१८ Vot x 120