पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४७६

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पुआ पर १८५ १०में हिन्दूवारेज प्रेसोडे मो धाले नमें । "फौजदारीकारिधि" पर 'खजाना सम्य धो १० माइन"" परिणत हो गया। इसके अलावा अन्यान्य का गयाम ट! प्रचारित हुए पच 'परेसा नोट” पहर पहर प्रालित आदाविद्यालय तथा धगायाजातिका विद्याशिक्षा | हुमा। करिय फलपमें घेथुन कालेन प्रतिष्ठित हुमा। इम __ कैनिङ्गक वाद लाई एलगिन पनर जेनरल हुप । ममय सर चालीस उप्रणात २८५४ ६०म शिक्षाविप उनक शासनकाल में पूर यगाल तथा मातला रेलवे यिणा अनुमतिलिपि आइ एन तदनुसार करपत्ता मिध्य गुला एव सदर अदालन तथा नुप्रोमकोट मिला कर विद्यालयका सूत्रपात हुआ। इस साथ साथ विद्या हाइकोर' बनाया गया । हाइकोरक विचाराधानके पद ल्यमयधर्मे गामेएटा प्राट इन एड" प्रथा मा । पर इस देशवासीक नियुक्त हानेका नियम है। प्रार्शित हुइ था। इम उपरक्ष सियाविषमा कमिटि दो यप (१८६२६३१०) के अन्दर दी राह पल उठ गइ, ५५ विद्याध्यापन "डाइरेक्टर" ' मपेक्टर" । बामा रामपेक्टर" गिन्न मानलला सपरण को। उनको मृत्यु के बाद प्रभृति पदोशी सृष्टि । । सर विलियम डेनिसन कुछ दिनों तक गर जेनरल मुरदौसा यत्नर इस देश, इष्ट इण्डिया । रहे । इसक वाद मर जान लारे म ( १८५४६६ 'इ०) रेटो ग्यवर भेजनेके तार (टेलाप्राफ ) स्थापित | तक पर लाड मेमो ( १८६६७ १० ता ) यशामसे हुए (१८१२६०)। पोस्टर डिपाटमेंट स्थापित होनेम गरि जेनरठ रहे । एक निनामित मुसलमानके भारमसू यम गया । १८५३ ६० पण्डया | अस्त्राघातसे अन्दामन द्वापर्म ड मेमोका मृत्यु हुr नान पारगमेंट मदाममा एक माद प्राप्त का जिस (ों फरवरी १८७२ ३०)। र द्वारा घगामें रेफाने ट गय रि' के नाम प इसके बाद हों फरवराम 80 फरवरी सर सतन पासाता नियुक्त करा माझा मिला एवं जान स्ट्रेचा तथा २४वों परसराम ३रो मह तक ला- इन दावासियोंदले एड 71 र मिविल महाम' की। नेपियर गर जनरलका काय करत रहे । १८७२ इ०का पराक्षा देनकी अनुमति पाइ। मर फेडरिक हरि २८ | रो माको राई नाराका म दशा शामन मार अपोल र १८.४ इ०में य गालका प्रथम रेपटार प्रहण कर पर प्रपीडित प्रज मेंका पर भारहरका गरार होकर आये। १८५६१०० विद्यासागर महा किया परचो प्रजो शिक्षा प्राप्त करने का उत्साह यकी चेष्टाने विधवा पिाहा व्यवस्था विधिवद्ध दिया। ___ लाई मायापक समय १८७५ १०फ शपभागमें १८५५ ३०१ लाड दौमाने म्पदे यात्रा को पच युपरान प्रिम काय चेल्स (भारत सम्राट मतम एस)ने र पनिङ्ग भारतमा गरार जेनरल वन कर यहा व गालमें शुमगमन किया। युपरान गलेण्डसे साये। राइ पनिट्ये ममयम १८५७ इमें मिपाझt प्रत्यागमन होन पर महाराणो चिोरियान एम्पस मात्र बिदाह हुमा । म राष्ट्र विल्यम उ दोंने अत्यन्त द्वाएडया" का उपाधि प्रहण की ( १८७५४०)। १८७७ घिर प्रणतार मापा किय था, इमगि उ रोग १० जनवरा महोन में इस उपाधि प्रदाण उपलक्षम महा मे RA कि त मिनिटोहकवाद | समारोदके माथ दिल्ली में पदपार हुमा । इसा सार महाराणा विपटोरियाने म्पनाव हायस मना दक्षिण भारत दुर्भिक्ष पहा तया पुरक अमोरप शासन मार पने क्षधर लिया। उम ममय माथ गरेजीका युद हुभा। उस युदमे गरजॉकी भगकार दिया था कि इस दार प्रनामों धर्म हा विजय हु। १८७५ १०में उन्होंन परेशयानाकी पथ तथा सत्यका रमा परे । उनक योग्य हा पर मारा लाई लिटन उनक पद पर अभिषित हुए। गन्याग दे दे देगी (नरपर १८५८०)। लाइ राई लिटनो दोय रयादपनाको स्वाधानता फीरोगय ममया "भारतपय दण्डयिघि ' "दावाना-हरण कर लो एक टोने टास्त्र माइन विधियदया। _Vol x 10