पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४७७

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४८ वन्देश इनके समयमे दुर्भिक्ष निवारणार्थ व्यवसाय प्ररनेवालों, न चलते देख कर भारत गवर्नमेंट उम विषयमें हरनक्षेष पर 'लाइसेन्स-टेक्स' नामक फर संस्थापित हुआ । १८८० वरनेकी वाच्य हुई। उसके उपलक्षमें प्ररित अंगरेज- ई०के अप्रिल महीनेमे लार्ड लिटनके मारत परित्याग मचारिगणचे निदान होने पर एक दल अगरेजी सेनान करने पर मार्किस् आव रिपन भारतवर्गदे गवर्नर जेनरल मणिपुर पर अधिकार कर लिया पब अपराधिगण हो पर आये। उनके समय अंगरेज लोग पुनः काबुल गिरकार पर लिये गये । न्यायाधीश द्वारा अपराधियों को युद्धमे विजयी हुए। समुचित दण्ड दिया गया ( १८६१ ई०)। युवराज रिपनने देशीय सवादपत्रों की स्वाधीनता पुनः प्रदान टान्द्रजिनको अ गरेजो राज्यको विचारानुसार प्राण- करके एव "स्वायत्तशासनप्रणाली" प्रवतिन करके दंगाल | दएड मिला। का विशेष मगल साधन किया। इसके अलावे इनके ____लाई एल्गिन २४यो जनवरी १८६४ ई में भारतवर्गक समयमें विद्याशिक्षा सम्बन्धमें "एडुकेशन कमाणन" राजप्रतिनिधि तथा गवर्नर जनरल नियुक्त हुए। उनके नियुक्त हुया । इनके ही अमलमे रमेशचन्द्र मित्रने कुछ शासनकालमे "डायमण्ड जुधिलि" उत्सब महासमा. काल तक 'जज'-का कार्य किया था। रोहके साथ निम्पन्न हुआ था । १८६६ ई०में पलगिनके १८८४ ई०के शेष भागमे लाई डफरिनके हाथमें चले जाने पर लार्ड फर्जन आव केडलरटोन भारत- भारतका शासन मार अर्पण करके लाई रिपनने म्वदेश प्रतिनिधि हुए । उनके शासनकालमै म्यूनिसपलिटि तथा की यात्रा की। उनके आगमनके कुछ दिन बाद १८८५ ई०। शिक्षाविषयक कितने हा राजनैतिक कार्यमा संस्कार मे व गालके प्रजावत्यविषयक ८ आईन विधियद हुए। हुआ था । उनक शासनकाल में १८६६ ई०की १८८५ ई०के शेष भागमे ब्रह्मराज थियको सिहासन, २२वी जनराको मारनेश्वरा विकोरियामा मृत्यु हुई। च्युत नथा वन्दो करके उस राज्य पर अधिकार कर उनके ज्येष्ट पुन सप्तम एडवर्ड राज्याभिषेक उप लिया गया। १८८६ ई०को पहली जनवरोसे विस्तार्ण, लक्षम दिल्लामे एक वृहत् दरबार हुआ। इस समय ब्रह्मगज्य भारत साम्राज्य भुक्त हो गया है । उक्त वर्णक बंगाल मे भा बहुत उत्सव मनाया गया। उनके अव- अप्रिल महीनसे 'इन्कम टैक्स' कर पुनः स्थापित हुआ। फाशक समय मन्द्राजके गवर्नर लाड पम्पथिल कार्या भारत राजराजेश्वरी विकृारियाय राजत्वकालका पांच करने थे। उन्होन पूर्व-बगाल के स्तिने ही जिलोंको सौ वर्ष पूर्ण होनके उपलक्षमे १८८७ ई० को २६वी फर बासाम प्रदेशमे मिला कर बंगाल के दो टुक्डे पर वरीको भारतवर्णके प्रत्येक स्थानों महासमागेटके दिये। इससे बगालकी राजनैतिक नाव बहुत मजबूत हो साथ "जुविलि" महोत्सव समाहित हुआ था। गई, इसमे श नहीं । भारतको उत्तरी तथा पूर्वी सीमा लार्ड डफरिनने देशी लोगों को अधिक परिमाणमें | ओंका रक्षा करना एक पंग तथा ब्रह्म के मध्यवत्तो वना- ऊंचे पद पर नियुक्त करनेके अभिप्रायसे-"पलिक कीर्ण पार्वत्य प्रदेशमे अगरेजा-शासनको प्रतिष्ठा करना सर्विस कमीशन" नियुक्त किया, किन्तु उनके मल्लय्या हा इस जटिल तत्त्वका गूढ उद्देश्य था। नुसार अभा मो कोई विशप कार्यका अनुष्ठान नही इस समग सामरिक विभागके सुधार के लिए जगो होता । लार्ड डफरिन के शासनकाल में सिक्कम, तिव्वत लाट लाई किचनर वहादुरके साथ उनका विरोध उप- तथा पजाव सोमान्तस्थित कृष्णपर्वातमें युद्ध हुआ। स्थित हुआ । उसले उन्होंने भारत सचिव के पास इन्होने १८८८ ई०ी २०वी दिसम्बरको लार्ड लैन्सडा. कर्मत्यागपत्र मेजा । उनका त्यागपत्र गृहीत तथा उनके हाथमें शासन भार अर्पण करके विलायतको यात्रा अनुमोदित होने पर भी वे मारतवर्षका त्याग नहीं कर फो। लाई लैन्सडाउनके समयमें १८६० ई०के दिसम्बर | मके। इङ्गलैण्डाधीश्वर सप्तम एडवर्डको आज्ञानुसार वे महीनेमें रूस-सम्राटके ज्येष्ठ पुत्र देश भ्रमणकी इच्छा युवराज प्रिन्स आव वेल्सको अभिनन्दन देनेके लिए भारतमें आये थे । मणिपुर राज्यके राजकर्म उत्तम रीतिसे भारतवर्षमे रहनेको वाध्य हुए । १६०५ ई०के दिसम्बरको