पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४८४

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वहलामापा पेट्ट फगा। भल मेडा देशी पाहत चक्षित वनक्षा | ग्रामों के पुनरभ्युदय काल में सस्नको अलावा कर घनो धनि | धोरेधारे उन्नतिके पथ पर अग्रसर होने लगा। उस पप्पिस पापिया समयके सत्कृत पण्डित सस्थत श द सम्पत्तिको प्रमश पुप.फा फुपा पुफु बङ्गला भाषामें योग करने लगे तथा जहा तक खम्भर हो फेला सका प्रारत भाव लोप होन लगा। जो हो, लिखित पेट भाषाके बहुत कुछ प्रारुतका शक छोड देने पर भी माज पलोहा पोल्ट, पाल्टान | क्ल भाषा किसी अशमें प्राकृतका ऋण परिशोधन फाग कर सकी। गौडीय भाषामें अनेक जगह सारनाश पका साश्य प्रारूतसे अधिक . सहा पर ऐसा होने पर भी पडव बडपड, घिडविड़। उन सब भाषाओं में क्रियागत और नित्य व्यवहार्य शब्दगत नि सादृश्य इतना अधिक है, कि उसासे प्रमाणित होता है, योडा, हावा कि बट्लभाषा मानसे ही उत्पन्न हुई है। योकह योका (पाटा) ___ सस्तृत शब्द जिस भाव पहले भारतमे और पीछे मालुक ५ गलामें परिवत्तित हुआ है, उसके कुछ नियमानो क्रिया मेरो देखा जातो है, नीचे उनका उल्लेख किया गया है। पहि आय वर्णके याद सयुक्त वर्ण रहनसे सयुत वर्णका आदि अक्षर लोप और पूखिर दाध होता है। से याट ६स्त-हाथ, हस्ती-दाता, पक्ष-पाख, मल-माल परडी इत्यादि। पोरता कमी कभी पूर्व स्वर भयात् आकार शेष वा युत घलार होता है। जैसे, चन-नाका, चढ़-चान्दा । विहाण कमो शेष वा माकार र होता है। जैसे, हण हन्छन् । एजा-एाज, ढका-दाक त्यादि । हाड़ ___माध स्वरक परस्थित तथा सयुक्त पर्णके मादिस्थित इल्लासो घरास '.' तथा 'न' कारकी जगह चद्राय दु होता द। से- घश-वांस, कास्य-वांसा, हम-दाम चढ़-चाँद, हरियो हेरम्ब रन्त-दान इत्यादि । अनक नगह स्वरवर्ण रूपातरम यहा तक कि प्रचलित वाला मापा भी जा एक समय | भी ध्याहत हाता है भाजगड ६' मा नगद ' प्राकृत भाषा नामस प्रनलित थो, उसफे मा मनक असे महान-पियाना 'म' 1 जगह '3' जैस माहा-- प्रमाण मिलते हैं। वामुन 1 सर मिया मीर मा सून्न हो सका है। श्रीक बौद्ध और न प्राधाय का में भारत मापाशी जगह की जगह 'ड' होता है। जैसे-घोर--घोडा भरम उन्नति हुयी। अनन्तर प्रारत भाषाका हित घर-घडा, माएड माइत्यादि। पदों पहा पूर्ण विट से निरपेक्ष मायमं प्रतिष्ठित परनश को होन पर भी कुछ नही रहता, जैसे~वर्गकार-मार-कामारो, निम प्रकार सागं न हो सका, भरदय भावमें भी। दुम्मकार-कुम्मार-कुमार, मुनम् हदय-दिमन सहनका मामा मा पर उमम पड गया है, उमी प्रकार | हिया इत्यादि। धित मापा घार घारे इस प्रकार अगमापा भीमारतसे उत्पन्न हो पर भी चौदायनति तथा सहज नाकारमें परिव तत हुई है। बट्टा विहान