पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४९६

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वाला साहित्य उपायात गोगमारम पणिन दमा जाता है। इस ममय मधुसूदन पयोद नाम एक गढवामी कामिकामगन। सुचित कालिकामङ्गल प्रमाणित किया। पीन्द्र के पौराणि अभ्युन्यका ममय पिरादेरान | पाद गमामाद पपिरवानालिकामदल । गम म चाहाका स्थान धारण दिया। इस समय मार्क । प्रसाद पर सुरयि सुठेगा यौर पर परम माध पढेपपुराण - पुराण तापविमिन त मो से सदा । थे। १७९८ इमं महारान कृष्णच द्रक रामममादका यताले पर यहास देवा म गया रचना होन रगा। १०० बीघा नमान देने पर भी पवित्रर नदियाने राज अनमोनियास मानद दाम, मधुसूदन पवाद | सनामें रह गये । घे जगी उम्मभूपि धुम रह ग्रामों थानाय यनदुम, दिन दुगाराम, अादि भगाना | ही रहते थे आर वही महाराचर मारा नको प्रसाद रूपारायण चाप, राम दास, रामप्रसाद मुगात हुइ था। सेन राय गुणाकर भारतच द्र, निधिराम कविग्न पव मनदा महल के वचनसे नाना जाता है कि १६७४ द्विज रामनारायण प्रथाका परिचाय दिया जाता है। Tम (१७ २४० ) भारतपद्रका प्रथ रचा गया । विद्यासुन्दर क्या । भारतच है और पिपिराम के बाद प्राणराम करतीने उक्त पालिकामगागाय दासके मध हा विद्यासुन्दाका रचना की । उनका रचनाम वैसा रित्य, साप्रामान गिन नाते द। गापिन्ददासो १५७१ शर माधुग्य वाश दाहम्बा मी है। भारतवर्षक विद्या (१५६५ ६० ) में अपन कालिका म गलको रवाना की यु दरको तुलनामें प्राणरामाय नही रहर माना। थी। चाडाम गर जागरणक पर दूसरे प्रधान कति शागमातुमार नो सब मगरमथ रचे गरे, उनमें दक्षिण भयानोशकरका तरह मा भानो मादृप्रामान्त राढाय कायग्य पर रामराङ्करदेवका प्रायामहट यहा गत देवमामासी तथा आत्रेय गोत्र नरदास घशधर । वडा प्रह। यताण है। पारिता या समयामङ्गरको तरह वहुन ने कति माय 14 शिक्षित सम्पदापरे भारताप्रपरे पाठ ण्डेयपुराणको चाण्डाका अपरम्बन कर 'काटिकाविलास' परनसे जो अश्लो ता देर पडना , गोरिददासर| दुगामसार 'दुगाायनर' आदि नामसे कुछ काय रचे प्रथोम उमा भार है। गोपि ददामक सुवर पा गरे । उन मा प्र धोंमें कालिदामा कारिशानाम, मत निपुलामक ये, मान्न नथासपदा की उन दिन वमोचन। चण्डिकाविजय रुपनारायण चेहरेसे बागमति टपक रही था। उनी भमरमान्य घोप और अधावि भवानीप्रसादका दुर्गाधिनय या शक्ति तथा इवाभकिके प्रभार भृषएड मानो विदार्ण रडामार उत्रेग्ननीय है। हो कर सुरगम परिणत हो गया था। गोविन्ददामी भवानीप्रमाद जम्माध और निरक्षर थे सही पर उ होने विधा भी मानो अत्यन्त लजागीरा पति मारना | देव उसे ज्ञा कयित्वशक्ति पर जाम प्रण किया था देवाक भत्तिरममाछूना है। माग्नका का विद्या यह सामान्य नदी। उनकार नार्म अछ प्रमादगुण समान अनि रसिका, अति अपारा तथा अति पाजार है। कही हा उ दोन सप्तगतानण्डा अनुनादर्म नहा है। अच्छे कृतित्व परिमय दिया है। गोपि ददास के बाद राम कालियाम गरका ___भगाप्रमादले समय में हो पर मोपि माक रता दु रामक बाद रामप्रसाद एघ रामप्रसाद ण्डेय चाण्डाके अनुवादम सुतारण प्रतिभा और रस नाके के बाद भारती विद्यासुदरता रचना का। कृतित्या परिचय देकर 4 चयिको यहुन दुरहटा ___णराम फुछ समय बाद ही क्षेपात ने ए दिया है। इन कविका IIम रूपनारायण योर है। कालिकामदलकी ग्चना का। भगो या भय नहीं रूपनारायण मटवित् माद्याचि उसक freat! धे। कमाण्डेय जाएदाका अवलम्बन कर अपना प्रत्य