पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४९७

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५०४ बनना माहित्य लिन्ननेको तैयार हुप सही, पर ठीक भाक्षरिक अनुबाट कविता आदर्श श्रीवांका नेश्वचरित। दुर्गा- द कर सके। कई जगह उन्होंने कालिदानादि महा मंगल के कुछ अजोंगे नेफ्धका अनुवाद दें, नो कोई कवियों के कवितारत्न और भावराजको आहरण कर रान्युक्ति न होगी। मंगल ग्रन्यको छोड कर शाक अनि निपुणताके साथ सुललिन मायाम उसे अपने अन्य के उद्देश्य प्रनारी बनमापाने जो.सव अन्ध लिख गये है मध्य निवद्ध किया है। महाकवि कालिदामने रघुवंश उनमें मुन्नागान नागना दुनापुरगणा बार फाटिकापुराण ६. प्रारम्नमे जैना विनयका परिचय दिया है, कायस्य तथा द्विज रामनारायणमा शनिलालामृत नादि अन्य कवि रूपनारायणने ठीक उमीका अनुवाद किया है । वन उल्लेपनीय है। लालका चण्डीमङ्गल मी मानण्देश चण्डीका अनुवाद घटनात है। उनकी मापामे बहुत कुछ प्राचीनत्व दियाई ___पष्टीदेवी बगलामा प्रति दिन्ट-गृहायक घर पूजित देता है। होती है। यह पष्ठीदेवी गान? किमी प्राचीन स्मृति किस समय प्रजलाल चएडीका अनुवाद प्रकाशित वा पुराणमें इन पठीदेवीका पार नहीं । आधुनिक हुना, मालूम नहीं । उनी भाषा देग्ननेसे मालूम होता ब्रह्मवत्तमें तथा जान्तपुगण देवामागवतमे पष्टदेवीका है कि उनका अन्य भवानीप्रसाद और रूपनारायण के प्रथम उलेय मिटता है। पछी उपासकों के निकट दुर्गामडलसे प्राचीन है। इविनपनारायणके बाद करि कृष्णरामके पष्टीमगलका दी विशेष आदरना। कृया कमललोचन चण्डिका-विजय वा कालीयुद्ध प्रन्य लिन राम अलावा विचन्द्र गुणराज साटि रचित अनेक वर रगपुर अञ्चलमे बहुन प्रसिद्ध हो गये है। यह प्रन्य , छोटे छोटे ष्टोमंगल पाये गये हैं। बहुत बड़ा है, १४६ अध्यात्रम विभक्त है। फमलामन यानीचरित। ___ उपरोक्त माक्त कवियोंको छोड कर महाभागवन बनने रवि मलाका माहात्म्म प्रचार करने के पुगणात श्रीरामचन्द्रका दुर्गोत्सव अवलम्बन करके भी : लिये कमलामहल या लन्मोचग्वि लिख गये है। इन अनेक कवि दुर्गामाहाल्यका प्रचार कर गये है। उनमे सब भवियोंमें गुणगजवान, शिवानन्दकर, माधवाचार्य, कवि दीनदयालके दुर्गामतिचिन्तामणि और रामप्रसाद भरतपण्डित, परशुराम, द्विज अमिराम, जगमोहन मित्र, के दुर्गापञ्चरान्नको उत्कष्ट ग्रन्थ कह सकते हैं। दीन- रणजित्, गमदास माटिके प्रन्य पाये गये है। दयालके वहुन पीछे जगत्राम रायके पुत्र रामप्रसादने परशुरामने श्रीवत्सचिन्ताका उपारपान ले पर २६ शकवे निक्टवत्तों लमयमें दुर्गापञ्चरातकी रचना लक्ष्मीका माहात्म्य प्रचार किया है। उनका प्रन्ध कहो की। कोई कोई कहते हैं, कि रामप्रसादके पिता जगत् शनिचरित्र, कही लक्ष्मोकी पांचाली नामले प्रसिद्ध है। गम राठ ही दुर्गापञ्चरात्र के रचयिता थे। जगन्राम राय लक्ष्मीमगल के रचयिताओं, पया कवित्वमे, फ्या रागयणके रचयिता थे मही, पर उनके रामायणका लालित्यमे, क्या शब्दसम्पदमै जगमोहन मित्रकी रचाना अंतिम अंश उनके पुत्र रामप्रसादने ही लिखा है। सर्वश्रेष्ठ है। उनके कमलामङ्गल वर्णनीय विषय दुसरे रामप्रसादके बाद राजा पृथ्वीचन्द्रने गौरीमहल तथा लक्ष्मीचरित्रसे दिलकुल पृधक है। उसके बाद द्विज रामचन्द्रने दुर्गा मंगलकी रचना की। ___ जगमोहनने वहुन सक्षेपमें लक्ष्मीभ्रष्ट स्वर्गचित्रको राजा पृथ्वीचन्द्र के बाद एक व्यक्ति दुर्गामङ्गल और गौरी- अच्छी तरह चित्रित किया है। जगमोहन के बाद रञ्जिन- विलास लिख कर प्रसि हो गये हैं। उनका नाम राम राय दासने १७२८ शकमें कमलाजारित्र प्रकाशित किया। चान्द्र मुखोपाध्यार था। अपने कामे वे द्विज रामचंद्र यह कमला चरित्न मानो गुणराजके साचेमे ढाला नामसे ही परिचित है इनके बनाये दुर्गागगल ग्रन्थका गया है। एक समय बङ्गाल मरमें आदर था। चनाममें यह प्रन्य सारदा मगन। 'नल-दमयन्ती' नामसे प्रसिद्ध है। लक्ष्मीकी तरह देवी सरस्वती मी दहत दिनोंसे जैन,