पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५०२

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बगला साहित्य ५०६ बहुसंख्यक कति श्रीमद्भागवतका अनुवाद कर आया। कवियोंने कद एक छोटे छोटेघोंकी रचना का है उनमें भागरतफे अनुपत्ती हो कर अनेक प्राय लिन बड़साहित्य- नरसिंहदास माघवगुणाकर तथा कृष्णच हो हसदूत द्विज में प्रसिद्ध हो गये हैं। भागवतये अनुवादकोंके मध्य गुण । पसारि तथा सीताराम दत्तने प्रहादचरित माधव रानमा उपाधिधारी मालाधर चसुका काम प्रथम पाया रामारण तथा रामतनुने उद्धव मवाद, द्विज जाता है। मालाधर वसुने सात वर्ष पठिन परिश्रम कर परशुराम तथा द्विज नयानन्दने ध्र पचरित जीवन के १३६७ शाम भागवतके १० और ११यै स्वएडका चस्पत्ती गोविन्ददास तशा द्विज परशुरामी सुदामा बनानुपाद प्रकाशित किया । उनक इस अनुनादका नाम चरित एव जोवन मैल पाताभर मेन तथा नीनाथ श्रीकृष्णविनय वा श्रीगोविन्दविजय है। देयने अपहरण , द्विज दुर्गाप्रसादने वामनभिक्षा ___ गुणरान बाके वाद विनर रघनाथ भागवताचायने । भवानादासने गनेइमायण , पारद द्विज कमलाकान्तने ममस्त श्रीमद्भागवतका अगुवाद स्थिा । उनक अनुवाद मणिहरण, रामतनु कविरत्नने वस्त्रहरण एव का नाम धारणाम तरङ्गिणा है। घार मी वा पाने विप्र रूपराम, श्यामलाल दन, अयोध्याराप तथा शेवगा र दोंने भागत पद्यानुवादर्भ मी दक्षता दिया है। चार्यने गुरुदक्षिणा नामक प्रथरमा । पौराणिक मधोका अमा यह चित्र दुलभ है। भागवनाचार्य द दखो। अपरम्बन परक नितने दूसरे दूमरे यैष्णर प्रथ ग्चे ___गुणराज था तथा भागरताचाया आदश लेकर गपे हैं, उनमें रामचनका ब्रह्मवैवर्त पुरा : शिशुराम पीछे बहुनसे कनियान रखनी पफनी, उनम माधवाचाय, तथा इश्वरचन्द्र सरकाररत प्रभासपए, द्विज मुकुदका तोरणाविर, नदगमघोष आदित्यराम, अभिगम जगनायमगल मृणदाम, पाणीकएठ तथा महीधरदास दास, गोपादास, द्विज वाणीषण्ठ दामोदर का नारदपुरा या नारदसवाद, अनन्तराम दत्त तथा दाम, हिज लक्ष्मीनाथ कविश्वर, विवाहम, । रामेश्वरन दोका पद्मपुराणान्तर्गत क्रियायोगमार कृष्ण यशश्च यदुनादन भतराम प्रभृति परियोने गुणराज दास तथा द्विज भगोरथा तुलसीचरित्र दुर्गापरणदास का तरह मधिशश स्थानॉर्म मागवतके दशमस्का ) का विष्णुमगर श्रारामशर वाचस्पतिके पुत्र दुर्गा गलम्यन फरफ श्रीराणविजय श्रीहरणमगर गोवित्र । प्रमादका मुक्तालतावलि भगतामके पुन दिन राम मगल, गोपाल विजय पा गोकुलमगल नामसे अपने | प्रसादका श्रीकृष्णलीलामृत कृष्णप्रसाद घोषका विष्णु अपन प्रयोका प्रचार पिया। इन सभी कवियों के मध्य पर्वमार घेतकादासका पपिलामगल गदाधरदासका दिन माघरकाश्रामगल, कविरलमका गोपाल विजय राधाकृष्णलाला, रघुनाथदासम्म शुक्देरित, जय कविच द्रका गोवि मगर एच भक्तरामका गोकुलमगर नारायणका द्वारकाविलाश, श्यामदामका एकादशी तथा द्विन लक्ष्मानायका मगल, ये अति गृहत् प्रय व्रतक्या आदि प्र उल्लेखनीय है। ये सब प्रय हैं। भागवताचार्यको तरह मेदनीपुरवासी कवि मनातन अनुगदशावाक अतर्गत है. पितु अधिकाश श्रीचैतन्य चायतीन भी श्रीमद्भागवतका एक पद्यानुवाद किया है। महाप्रभुफे प्रमापसे ही लिखित कह पर प्रधान प्रधान इम प्रथमें मागवत्तके प्रत्येक श्लाकोका अनुनाद दिवाइ करियोंका परिचय धैष्णव साहित्यको व्याख्या या पडता है। आकारमें यह मागग्वावार्यका कृष्णप्रेम । अनुवाद शापाम दिया गया है। तरगिणोसे प्राय द्विगुण है। सुना जाता है कि, हिज जैन साहित्यको हम लोग प्रधानत तान शाग्यामि शीदासो भी सम्पूर्ण भागवतका अनुवाद किया था। विभक कर सकते हैं-१म पदशाम्रा, २५ चरित शाखा इस मगरे कड कवियोंन भागनतके एकादा ५२ ३५ अनुवाद या ध्यारया शापा। कीदोहाइदेर दण्डीपनकी रचना की है, उनमें राजा पदशाखा । राम दत्त तथा म के 'दएडीप' हो प्रधान हैं। प्रमिद्ध पदर्ता चन्डिदाम बगीय वैष्णय कवियों के भागरतको कृष्णलीलाका सभ्यन करके बहुनसे' आदि कवि तथा मद्वितीय गिने जाते हैं। पोरभम Vol xx 1.8