पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५०७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


बगला साहित्य प्रकाशादि मतानुसार चे अद्वैतप्रभुके बाल्यलीला-सूत्रके। सारसंग ६, पापण्डदलन, जवामजरी आदि छोटी छोटी रचयिता थे। पुस्तके भी इन्होंने लिखी हैं। चैतन्यसंगल-प्रणेता लोचनदासने राय रामानन्दकृत कृष्णरामदास-भजनमालिका नामक गन्यके रच- संस्कृत जगन्नाथ-बल्लभ नाटकके श्लोक तथा गीताशका | यिता। गन्थको रचना और माय अच्छा है। कृष्ण बंगला पद्यानुवाद किया है। लोचनदासका अनुवाद भक्तिका प्राधान्य स्थापन दी इस गन्यका विषय है। अत्यन्त मधुर तथा सरल है। लोगोंको धारणा है, कि गिरिधरदास-स्मरणमङ्गलसूत्र नथ के प्रणेना । इस आनन्दललिका तथा दुल भमार प्रथ इनके द्वारा ही ग'धर्म श्रीश्रीराधाकृष्णक अटकालीय लीला स्मरणका लिखे गये थे। विषय लिया है। हरिवोलदास-इन्होंने कृष्णलीलाको पौराणिक घटना गुरुदास वसु--प्रेमभक्तिसार । हम प्रन्यौ फा भावावलम्बन करके नौकात्रण्ड नामक एक प्रथकी | गौडीय वैष्णव सम्प्रदायका माध्यमाधनात्य लिया है। रचना की है। ___गोपाल भट्ट-गोलोफके प्रणेता। इसमें गोलोक. भजन-ग्रन्यशासा। वर्णन और श्रीगौरान-नित्यानन्द-जाहबीतत्व आदि गौडीय वैष्णवों के रचित वहुसंख्यक भजनन देखे लिसे हैं। जाते हैं। उनमेंसे कुछ गोस्वामियों का रचित शास्त्रसम्मत गोपीकृष्णदास-हरिनामम्वच । है और अधिकाश बाउल तथा सहजिया सम्प्रदायके गोपीनाथ दारा-मिद्वमार । भजनप्रणालीविषयक है । इन सब प्रयकारोंके तथा गोविन्ददास-निगम नामक प्रन्य। वैष्णवबन्दना उनके प्रयों के नामादि अकारादि वर्णमालाकमसे नीचे नामका एक दूसरा ग्रन्थ भी इन्होंने लिखा है। लिखे जाने हैं। गौरीदास-निगूढार्थप्रकाशावलीके प्रणेता। चैतन्यदास-इन्होंने रसभक्ति-चन्द्रिका नामक प्रन्य अकिञ्चनदाम-भक्तिरसात्मिका नामक एक छोटे भजनके रचयिता। फिर दोन कृष्णदासका रचित : लिखा है। ईश्वरतत्त्व और जोवतस्वका वर्णन ही इस इसी नामकी एक और हस्तलिपि देसी जाती है। यह प्रन्थका विषय है। प्रध ढाई सौ वर्ष रचा गया है। ___ जगन्नाथदास-रसोज्ज्वल ग्रन्थके प्रणेता । जयकृष्णदास-इन्होंने मदनमोहनवन्दना नामक ___ अच्युतदास-गोपीभक्तिरसगोत नामक नथ इन्हीं- प्रन्थ लिया । का बनाया है। श्रीजीव गोस्वामी-इन्होंने वहुतसे संस्कृत ग्रन्थ लिये आनन्ददाम-उन्होंने रमनुधाण व नामक गन्ध हैं । सहजिया-सम्प्रदायका उपासनासार, नित्य वर्तमान लिखा। इस प्रन्यमें बजरसका वणन है। रसके भजनके आदि ग्रन्थ भी इन्हीके रचित हैं। सम्पन्धमें वहुत-सी बातें इसमें लिग्बो हैं। ____जीवनाध-रसतत्त्वविलास नामक एक प्रन्धके रच- ___ कृष्णदास-इनके बनाये निम्नलिखित मजन गन्थ | यिता। मिलते है-स्वरूपवर्णन, वृन्दावनध्यान, म्वरूप-निर्णय, दुःनो कृष्णदास-इनका दूसरा नाम श्यामानन्द है। गुरुशिष्यसंवाद, गगमयी कणा, रूपमञ्जरी, प्रार्थना, शुद्ध, आप सहज-रसायण ग्रन्थ लिख गये हैं। रतिकारिका, आत्मनिरूपण, दण्डात्मिका, रसभक्तिलहरी, दीन भक्तदास-वैष्णवामृग ग्रन्थके लेखक । रागरत्नावला, मिद्धिनाम, आत्मजिज्ञासातत्व, ज्ञानरत्न | नरसिंह दास-इन्होंने दर्पणचन्द्रिका नामक ग्रन्थ माला, आश्रयनिर्णय, गुरुतत्त्व, ज्ञानमन्धान। इनके | की रचना की है। सिवा आश्रर्यानर्णय, गुरुतत्त्व, ज्ञानसन्धान, मनोवृत्ति । नरोत्तम दास-इनके बनाये प्रार्थना और प्रेमभक्ति- पटल, चमत्कार चन्द्रिका, प्रहादचरित्र, आत्मसाधन, चन्द्रिका प्रन्ध वैष्णव समाजमे चिरस्मरणीय और चिर-