पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५०९

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चङ्गला साहित्य बनाया यम और प्रजापतिसंवाद नामक चणच गय! सर्वतोमावमै योगमालन्दर वा उपरोक्त झानप्रदीपके मिलता है। ये सब गथ अंगरेजी-प्रभावके पहले लिये गये थे। २तन-तेलाउन वा तनुसाधन-स गध योग- मुसनमान-प्रभार। शास्त्रीय गभोरतत्त्व बदला और मुसलमानी शब्दमें लिया है। "समे हिन्द्रयोगका मूलाधार मणिपुर आदि पहले लिखा जा चुका है, कि गौडके मुसलमान संज्ञाय मुसलमानी नामकरण देना जाता है। बीच बीच- अधिपत्तियों के उत्माहमे अनेक पण्डित शास्त्रानुवादमे में मुसलमानी योग भी यथेष्ट निदर्शन है। अगसर हुए थे । महाप्रभु श्रीगौराङ्गदेवके आविर्भावफे पादसे चैणवाव जिस प्रकार अनेक गथ लिख कर ३ नउफा-एक धर्मग्रंथ । तउफाआ अर्थ संहिनादि वगलामापाको अलंकृत कर गये हैं, उसी प्रकार उनके है। मुसलमानके रोडा, नमाज आदि आवश्यकीय विषयों की इस प्रथमे आलोचना है। इसके सिवा इसमे अनुकरण पर बहुतसे मुसलमान-कवियोंने भी नाना गध लिप कर बङ्गलासाहित्यकी अङ्गपुष्टि की है। ये मुसलमान-मामाजिक धर्मनानिक अनेक कर्तव्य विषय सब गन्य पढनेने मालूम होगा, कि सुपण्डित मुसलमान भी लिपिबद्ध है । मूट मरवी तउफाके पारसी अनुवादसे लोग भी हिन्दृशान्त्रको कमी भक्ति दृष्टिसे देयने धे, एक कवि बाल बालने रोसङ्ग के राजा श्रीचन्द्र सुधर्मफे मन्त्री समय हिन्दू-मुसलमानोंके मध्य कैसा सद्भाव था । उस श्रीमान् मुलेमानके कहने पर यह ग्रंथ बगलामे समय मुसलमान समाजमें मी देवचरित्रको अभाव न लिखा है। था। इन सब नन्गों के मध्य इस्लामधर्मको प्यास्यादि, ____४ मुशिदका वारमासा-मुसलमानी धर्मतत्त्य सम्बन्धी धर्मतत्त्व नीतितत्य, इतिहास, संगीत, गल्प और विरह- एक छोटा नय। महम्मद अली इनके रचयिता माने गाथा ही अधिक है । इन मत्र गयकारोंमसे बहुतेरे | जाते है। स्वभाववर्णना और कवित्वमें रुतित्वसम्पन्न थे। ____५छानसागर-धर्मविषयक (फकीरी) प्रथ। इसमें ___ करम अली एक वैष्णव कवि थे। चट्टगामके पटीया योग-शास्त्रीय बहुत सी बात है। अली राजा उर्फ कानू थानाले अन्तर्गत करुन्डालामे उनका घर था। अपने फकोर इनके रचयिता है । प्रथकाका पद पढ़नेस गथमे गथकारने ऋतुके बारहों महीनेका वर्णन किया है। मालूम होता है, कि उन्हें हिन्द योगशास्त्रमें भी अच्छा ___गधाका द्वादशमासिक विरहवर्णन वैष्णव कवियों में। ज्ञान था। प्रेमचित्र वर्णनमे आदर्श स्थानीय था। उस वारमासाके सिराज कुलुप-एक मुसलमानी धर्मतत्त्व वा अनुकरण पर किसी किसी मुसलमान कविने भी वार. धर्मविज्ञान । इसमें स्वर्ग कितने हे, पृथिवी किस पर मामा गाया है। उन पैसे छकिनाका बारमासा और मेहेर अवस्थित है, ईश्वर किस दिन किसको सृष्टि करते है, नेगारका दारमासा मिलता है। प्रलयकालमे और पीछे क्या होगा। ये सव पौराणिक ___ बगला माहित्यके अनुकरण और अनुवादके अति- आरयान मनिवेशित है । नथकर्ताको नाम फकीर रिक्त मुसलमान-कविगण इस्लामजगत्के अनेक मौलिक अली राजा है। तत्त्व बङ्गलामे शनूदित कर बङ्गलाभापाके कलेवरको पुष्ट ____७ मुछार-छायाल-हजरत मूसा (Moses) पैगम्बरके कर गये है। साथ भगवानका तोर पहाड पर जो कथोपकथन हुआ, तत्त्वशाखा। उसीका अवलम्बन कर कवि नसम्ल्लाने इसकी १ छानप्रदाप~मैयद मुलतान नामक एक मुसल- रचना की। मान साधुका रचिन , उक्त कविका बनाया एक योग ८ साहादल्ला पीर पुस्तक-मुसलमानी दरवेशी शानाय गन्ध भी मिलता है। इसका प्रतिपाद्य विपय नथ। माहादल्ला पोर नामक कोई सिद्ध पुरुष वक्ता