पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५१६

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वहाना साहित्य ५२३ पूर षड्नालमें शारोगानका अमो भी यथेष्ट समादर | देनेके लिये परवर्तिकालम रिमिग्न मतावलम्पो वैष्णयो है। निरक्षर कवियों की रचना होने पर भी उनमें नाप ने पद्यको तोड पर एक प्रकार के गद्यम का एक पुस्तक विकासका पूर्ण उपादान विद्यमान देवा नाता है, कि तु रिखा। उस प्राचीन गधी भाषा चैसी सरल तथा भागकी वैसा परिपार नहीं है फिर तो ये मव कवि वर्तमान बदला गद्य साहित्यकी तरह सुललित वा भाषाम अपटु थे, ऐसा मा नहीं कह सकते । जारोगान ओजस्वितापूर्ण न होो पर भी भापातके हिसाबसे वे बहुत कुछ कविगान समान ही होना है। दोनों दलम प्रशति अमूल्य समझे जायगे। प्रश्नोत्तर रूपर्म गारा होना है। शयपुराण, चैयरूपानामि प्रभृति कइ एक प्राचीन एक ओर जिस तरह भूगोल, इतिहास, काय तथा | गयके निदशन स्वरूप गद्यपद्यमिश्रित प्रयो के अलावे, नाटकादि एय भट्ट ज्योतिपादि विज्ञान पुस्तकें पधारादि ) हम लोग अपेभारत परबत्ती ममय अर्थात् बङ्गालमें छन्दोंमें रची गइ थी दूसरा मोर उसी तरह चैद्यक | गहरेजी शासनके सौ वर्गसे कुछ पहले रचे हुए तिने पुम्न भो भाषा पद्य अथवा गद्यमें रची जा कर जन | हो गद्य प्र यो का परिचय पाते हैं। इन सब म यो को साधारणके मध्य भयुर्वेदका प्रमाय फैला रहा था। भापा, गगरेजी अधिकारके परपती राममोहन राय, पसलामापार्म पंधर पुस्तके साधारणत 'कविरामी रामराम व प्रभृति रखे हुए प्रधो की भापाले स्मिी पतरा' के नामसे प्रमिद्ध हैं। आशम भो खराव नहीं है। उनम पापयासम्बर तथा गल्प। समामका अधिकता नहीं है उनकी भाषा सरत है। माध्यात्मिक गतिको आशासे पा मानसिक वृत्ति | उनमें यदान्तादिवशनका अनुपार व्यवस्थातत्व गुम्दा नियमकी उत्क्पता सम्राननके निमित्त दगीय करियों । बालारा भापरिसदका अनुगद पन घारे प्राह्मण ने एक ओर जिस तरह धमतरय, मानत योगतत्व, पुर प्रथ उल्लेखनीय हैं। तथा गीतिनविग्या अधोंको भाषाम रचन' करके इसके बाद बहुत समय ना घट्नाला भाषामे जिा घनगमियां मनम चैराग्यको सूचना पर दी है दूमरी सव गद्य तथा पद्यमय पुस्तकाकी रचना हुइ, घे सब ओर उसी तरह उन्होंने अपूर्व अपूर्व आपयानोंकी पुस्तके / प्रायः सहजिया द्वारा हा रचा गह। इनमें कोई कोह श्री रच कर उनके हृदय में ससारोद्यानके प्रेमप्रसरणी | रूपगोस्वामी द्वारा रचित एघा कोइ कोइ छणदास धि हामृतमयी धारा बहा दा है। इन सब उपाख्यानोंकी राज प्रभृति रामधारी पविपाक द्वारा रचित पद पर अधिकाश पुस्तकें किसी न किसी राजनशको उहश) प्रसिद्ध हैं। परक रचो गई है। पयोंकि, ऐमा होनेसे हा तो उन अनापी भात्र। पर जनसाधारणको विश्वास होगा पर ये सघ उन भङ्गानाके मानेसे पहले ही इस देशम गद्य साहित्य पुस्तकोसे मोति संग्रह करके मसारक्षेत्रर्म न्यायपथ का सूत्रपात हुआ था, यह पहले ही रिखा जा चुका पर गुढ रहे गे । इम श्रेणीके कितन हो मापान इतिहास है। अदरेजी शासनके प्रारम्भस इस देशकै लोगेाके मूल हैं और कितने ही मिचिराय गरमान ह। हदयर्म नाना विषयाम कमनिष्ठा भावका सञ्चार हुआ। प्राचीन गय साहित्यका इतिहास । यही जागरण गद्य माहित्यका उद्धोधन है---उप विषया (मनरनी प्रमावसे पहलेका साहित्य) घट्नालोके साथ साथ बदरेज राजपुस्पोने भी सहायता घालमें अगरेजी शासनाधिकार होने के पहले बलीप को घो। फेवल साहित्य हो नहीं मनरेजी मारे दे। पियोंने बालासाहित्यत्री परिषष्टिक लिये पच | म विविध विषयों के परिवर्तनका तरको अगर साहित्य अगये का एक गध प्रयोका रचना को | देनफी कोशिश का। मुद्राय के इतिहामने हमें उसका यो। पे सव पुस्तके माधारणतः देशीय प्रचलित भाषा पूर्ण चिन देवीम भाता है। हो रिषी गह। दशा अक्षरोगो को धर्मतत्त्व शिक्षा १७६५ १०८ अगरेजी म दा माधिपत्य लाम