पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५१८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


बङ्गला साहित्य साहित्यक प्रश्न प्रवर्तक स्वनामधन्य महात्मा राममोहन। इघर भ गरेज राजकर्मचारियों को इस देशको भाषा राय महोदपको आविर्भूच किया। मि० हालहेडने १७५८ सिखानेके लिये १८००१०में मासि आय घेलस्ली। सालमें अपना व्याकरण छपाया। १७७४ सालसे, पलमत्तेमें फोपिरियम कालेजकी स्थापना का। इस लगायत १७८२ साल के भीतर पिसी समय राममोहनका विद्यालय द्वारा बनलागयसाहित्यको यही उनति हुई है। उन्म हुआ। राममोहन राय देखा। ____ यद्यपि राना राममोहन राय 'महाशयके पहुत पहले पहते हैं, कि राजा राममोहन रायने १६ अपको उमर कुछ पण्डितोंने भाषा परिच्छेद स्मतिमात्र तथा उप में दो 'हिन्दुओंकी पौत्तलिक धर्मप्रणालो' नामसे प्रतिमा | निपद बौर सायदशन आदिका बङ्गानुमान किया था, पूनाक विरुद्ध पक प्रचलिखा था। शायद यही प्रश्य | वितु वे सब प्रग्य मुद्रित नहीं हुए जिससे घगीय पगला मापाका मुदिन गद्यप्रय है । विन्तु यूरोपीय | साहित्य जगदका आज तक कोई उपकार नहीं हुआ। गणके मतसे १८०१ में फोरेंविलियम कालेजके पण्डित राममोहन राय मदापका फोह कोई प्राय प्रचलित हिदू रामराम वसुने ओ राजा प्रतापादित्यका प्रथ लिना यह मतक विरुद्ध होनेके कारण पण्डिोम खलबली मच बट्लभाषाका मथम गद्य तय है। गइ । इसी कारण व गके अवातविक्षम्य पण्डित समाज पितु हारहेड और राममोहन रायके पहले नो मब सागरमें आन्दोलनको प्रवल तरग हठात् उठ सही हुई। गद्य प्रथ थे उनका परिचय पहले दिया जा चुका है। इस आन्दोलनके समय घट्नालामापाकी रचनामें अनभ्यात गहरेज गधिकारके प्रारम्म, १७६५ ६०को इमाइ मशनरी कुछ पण्डिताभिमानाने भो य गभापामें दो एक छन्न लिग्न येएटोने 'मश्नोत्तरमाला' नामक इसा धर्म-सम्यधर्म एक कर प्रकार होनका दावा कर लिया। इस कारण इस बङ्गला गद्य पुस्तक प्रकाश का । यह पुस्तक लएडननगर । समय दो एक सामयिक पत्रोंको सृष्टि मा हुइ। तु मे छापी गई थी। १७८० इ० फलतम जो मुदायत यथाथम राजा राममोहन रायको यगठा गध के उन्नति स्थापित हुला उसमें बगला अक्षर न था। इस यन्त्रमें | साधनके प्रधानतम पथदर्शक पद सकते हैं। भारश्यक्तानुमार लकडोग सुदाइ करक बदला अक्षर ___अगरेजी शासन के परयत्तींशलसे व गला गध छापे गपे थे। इस दश यप पीछ ( १७६० इ० ) फेरि साहित्यको नो प्रमोनति हुइ उसे हम रोग दोष शो में मार्समन आदि सुप्रमित मिशनरिया श्रीरामपुरम धगला| विभाग कर सकते है। पहला इट इण्डिया कम्पनीका मुद्रापत सोल पर घगमापा पुस्तकादि सापालगी। मार अर्थान् । इण्डिया कम्पनीके व गराया भार उ होंने एकडीमें चुदाइ करके जो,पर प्रस्थ धंगला अक्षर ग्रहणस ले कर महारानी विकोरियाक सिहासमाधि तैयार रिया उमसे पहले चंगरा मापा वाइपिल पुस्तक रोहण काल तक मार दूमरो उस समयस ले कर विद्या छापा गइ थी। सागरीय युगका पत्तमान पगलामापाफ पूर्णविषाश १७६३१०में लाद शर्नवालिसी जो सर आईन , ता। इतन दिनोंक भातर जिन सप प्रग्यकारो ने व गला संप्रद किप, फारएर साहयने उनका पलमापार्म अनु मापामें प्रचलिपे है, नीचे तदाकी एक तारिश और पाद दिया था। इसके कुछ समय बाद अर्थात १०० गत्यकारोका सक्षिप्त परिचय दिया गया है- को क्लब में उन्होंने अगरेजी अभिधान मुद्रित किया। ट इपिया कम्पनाका अमन्न । परत इस समय मासमन, पाय, पेरी आदिईमा धर्म साधारण साहित्य । प्रचारकों द्वारा पालासाहित्यका पडो उन्नति हुई थी। १ प्रश्नोत्तर माला-एटा साहब इस पुस्तक धोरे घारे पहला गद्य रचना अनुगोरन भी चरने | प्रणेता है । इसा धर्मसयन्ध तत्त्वादि मदनोत्तरप बहाने एगा था । यहा तक किरहोंने बङ्गला स्कूल और पङ्गलाइस गयौ रिये गये है। १७६१ १०कोहएनम यह सयादपत्र प्रकाश पर प गभाषा शिक्षाको वडो महायता गम्प छापा गया था। य गर्म अगरेजा प्रभाय प्रारम्भ की थी। । म यही सबसे पहला पगला गवगाय समझा जाता है। __Vol XX 132