पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५१९

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बगला साहित्य ___ २ हिंदुओं की पौत्तलिक धर्म-प्रणाली-सुविख्यात जीवन में अनेक विपयों में ही राजा राममोहनका चरित्र राजा राममोहन रायने सोलह वर्ष की अवस्थामै इस प्रतिविम्बित हुआ था। कहते हैं, कि राजा राममोहनने गन्थको लिखा। प्रतिमा उपासना-प्रपालीके प्रतिकृल हो वसु महाशयको फारसी और बङ्गला गध लिखने यह नन्थ लिखा गया है। राममोहन राव गन्द देखो। सिसाया था। ___कथोपकथन-सुविख्यात पादरी रेभरेण्ड डवल्यु | ईशोपकी गलप-१८०३ ई० में डार गिलवाईने उर्दू, करीने १८०१ ई०में यह गन्थ प्रणयन किया। जनसाधा | अरवी, ब्रजभाषा नया बट्सलाम ईशोपको गल्प छापनका रणकी प्रचालित वंगलाभापा अगरेजो को सिखानके वन्दोवस्त किया। इस समय तारिणीचरण मित्र नामक लिये यह पुस्तक रची गई है। इसमें उस समयके प्रचालित एक व्यक्तिने बद्भापामे ईशोप-गल्पका सनुवाद कर दिया बंगला और उसका अंगरेजी अनुवाद है। था। वे सब अनुवाद रोमक अक्षरम छापे गये थे । १वीं सदीके आरम्भमें वगलाभापाकी प्रकृति कैमी इलियड काव्य-१८०५ ई० में फोर्ट विलियम पालेज थी इस गन्धमें उसका विशुद्ध नमूना है । रेभरेण्ड बेरी. के छात्र जे सजेएटने मारजिलके इलियड कायके प्रधान ने इस गन्थमें वंगला तत्सामयिक सभी समाजों की सर्गका बगानुवाद किया। प्रचलित कथावार्ता और वाफ्यपद्धतिका नम्ना दिन __टेम्पेष्ट-१८०५ १०को फोर्ट विलियम कालेनमे । लाया है। मस्ट नामक एक यूरोपोय अध्यापकने सेक्स- ___ इतिहासमाला-१८१२ ई०को श्रीरामपुरमिशन पियरके टेम्पेष्ट नामक नाटकका अनुवाद क्यिा। बङ्ग- प्रेसमे यह गन्य छापा गया। मापामें इसीको पहला नाटक कहना होगा। हितोपदेश-१८०१ ई०मे गोलकचन्द्र शर्माने पञ्च वेदान्त-सूत्र-माण्यानुवाद-१८१५६०को राजा राम- तन्त्रोक्त हितोपदेश नामक ग्रन्थका बगानुवाद किया। मोहन रायने वेदान्तसूत्र मायका गद्यमे बनानुवाद तोताका इतिहास--चएडीसारण मुन्शीने १८०१ ई० किया। इसके बाद १८१६ ई० में उन्होंने सामवेदके अन्त- मे इस ग्रन्थको लिग। पारसी प्रथसे इसका अनुवाद ) र्गत तवलकार उपनिपका शङ्करभाष्य बद्भापामें अनु. हुया है। चाद किया। १८१७ ई०में उन्होंने और भी दो उपनिपद् बत्तीससिंहासन-१८३४ ई०को लण्डनमे इसका 'कटोपनिपन्' और 'मुण्डकोपनियत्', १८१८ ई० में 'गायत्री संस्करण प्रकाशित हुआ। उसके पढनेसे पता चलता का अर्थ' तथा १८२६ ई० मे 'ब्रह्मनिष्ठ गृहस्थका लक्षण' है, कि मृत्युञ्जय तर्कालङ्कार इसके अनुवादक है। नामक ग्रन्थ लिखे। पुरुपपरीक्षा - यह ग्रंथ संस्कृतका अनुवाद है, १८०८ ____ राजा राममोहनने १८२१ ई०मे मिशनरियोंके प्रचारित ई०में प्रकाशित हुआ है। इसकी संस्कृत पुरुषपरोक्षा नथ ईसा-धर्मका प्रतिवाद करके 'ब्राह्मणसेवधि' नामक एक का अनुवाद होने पर भी भापा प्राञ्जल है। पुस्तककी रचना की । १८२३ ई० मे 'पथ्यप्रदान' नामक प्रबोधचन्द्रिका-पण्डित मृत्युञ्जय तर्कालवारने एक दूसरी प्रतिवाद-पुस्तिका प्रकाशित हुई । १८२४ ई० में १८१३ ई० में फोर्ट विलियम कालेजके लिये यह प्रय 'प्रार्थनापत्र' १८२७ ई०में 'गायनमा परमोपासनाविधा- प्रकाश किया। नम्', १८२८ ई० में 'ब्रह्मोपासना' तथा १८२६ ई० में 'अनु- लिपिमाला--प्रतापादित्यचरित्र नामक सुविख्यात प्ठान' नामक ग्रन्थ निकाले गये। ऐतिहासिक थके प्रणेता रामराम बसुने १८०१ ई०में - इसके बाद राजा राममोहन रायको अतुल कोर्ति ब्रह्म- प्रतापादित्यचरित्र ग्रंथ प्रणयन किया । केरी साहबने । संगीत है। आज भी उनके रचित सङ्गीत इस देशके लिस्बा है, कि वसु महाशयको तरह प्रगाढ अध्ययनपटु । शिक्षित समाजमें गाये जाते हैं। फिर उनके रचित मनुष्य उन्होंने कभी भी नही देखा है। बुकानन साहबने । 'गौड़ीय व्याकरण', 'अदालत' तिमिरनाशक आदि और भी उनके पाण्डित्यमी प्रशंसा की है। वसु महाशयके . मी कई वड्ला प्रन्ध मिलते हैं।