पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५२६

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वनिपुरम्-वचगोति ५३३ यदिपुरम्-माद्वारपदे णा जिलान्तर्गत एक नगर ।। गायका दूध या दधि मनुपानमें सेवन करना होता है। यह यापटपसे १६ मौल उत्तर पनिमर्ग भपस्थित है। इसके सेवासे घोस प्रकारके प्रमेह, मतरच्छ पाण्ड, यहाँक बन्लमराय मदिरफे गर-स्तम्भमें तथा अगम्पे । धानुस्ध ज्वर, हरामा घात गृहण, आमदोप, मदाग्नि, घर म्वामीके मदिरम दो शिराफ्ला देखे जाने है।' भनि, बहुभव, मूत्रमेह और मूरातिमार आदि रोग पहा १४८१ म बियनगरराज सदाशिवराय प्रगमित होते हैं। इससे कात्ति, बल, पण मोज और शासनकालम उटकोण हुमा है। इसी साल मुसलमानों की पृधि होती है। (रसेन्द्रसारसं० प्रमेहरोगाधि०) पिनयनगरको तहस नहम कर वाला था।मरा फरक , पर(सं० पु० ) यताति घच् अच् । १ शुभ पक्षी, तोता। १५९८ में उत्त राजाक समय सुदा गया है। उसमें । २ सूर्य । ३ कारण ! ४ पचन, पापय । मूर्त राजदेव चोड महाराजा दानवृत्तात लिघा पच म (स० पु.) यस प्रमः पापा प्रम, पाक हुआ है। । प्रणागे। पहिरि (म० पु० ) पुराणानुमार पा राजाका गाम। पचपनु ( स० पु० ) यकीति यच् (सयुपचिभ्योऽन्युजीगत (मागात १२२१६३०) । पनुच । उण १२१) इति अपनुच् । १ ग्रामण | २ गृह यहीय ( स० वि०) घन-( गहादिभ्यश्च । पा ४१२।१३८)। दारण्यक उपनिषणित पक व्यकि । (नि०) ३ पायक, इति छ। यहदेगोन पदेशका । पचा। घाग (स०पी०) एक रागिणो । रागिणी देखो। यगोति-नपून नातिम एक रिभ्यन्ती है, कि दिल्ली यहन्द (म.पु०) पप असुरक्षा मामदोसपा वध, भ्वर पृथ्वीराज जव शाहबुद्दीन गोरा द्वारा परास्त हुप दिया था। तब उनक माता घाहरदवके घशधर फमराय तथा परि बट्लयर (म० पु०) यह नामदेम्य इयर अधिपतिः।। पार मिहफे अधीन कितने हा वीदान लोग ममा गह वगारका राजा। परित्याग कर १२४८ २०में मुरतानपुर जिले के सम्वादा पट्लेयररम (म. पु०) मापयशेष । यह मौषध घट्ने ध्यरामक स्थानमें वम गपे । या उन लोगी मुमलमागाय गौर हद भ्वरभेदम दो प्रकारका है। प्रस्तुत प्रणाली भपसे अपन चौहान नामफे बदले 'यत्स्यगोसा" नाम पारामम्म शोला ग घर नाभा प्रत्येक २२ शोला । प्रहण पिया। आगे चल पर यत्स्यगोला'स गपनतम भायन या माध घोर मुगवर परफे भूपरयतम । 'यचगोति' हो गया है। पार पर। इस औषधक मात्रा करता है। इसे धोका द्वितीय उपाएमासे जाना जाता है, कि उपरोत्त सायनाट कर माधा तोला पुन या रस घासाय और चाहरदेषक प्रपौत्र राणा नगतदेव लोस रग थे। गोपून या दरिद्वारे रसो मा पान रे तो गुमोदर उनम सर्पकनिष्ठ दो पितासम्पत्ति अधिकारा प एय रोग जाता रहता है। । दूसरे दूसरे ही धपो अपन अष्टमी परीक्षा लिप (रस यारो. उदरीरागाधिo): विभिन्न देशोशी याला को। उनर्मम यरियार सिंह तथा दूसरा सरीता-रमसिन्दुर और रागा समान भाग पसरापन मेनपुरो ना पर मला उदीनप अधीन सैनिक ले र मन परे । पाछे गे माता मधुफे माय इसस, गृत्ति मालान का। डारोगों। यहासे गर मानिये सयन करीम प्रमेहराएदाता। निपत युद्ध करनफरिपेधयोध्या में माराम मिया पुरन्ध्य र--प्रातुन म रागा पारा, गधा, परियार सिाफे सम्मानम पम जानके बाद प्रतापगढ़ माया गपूर भारत प्रपेर २ तोला, मोगा, मुला प्ररपे के निरटयर्मा कोरपिल्यार नाम स्थान मामन दो मामार बार रमर्म माया सरदारतातीराज था पिपरिया दाक्षितों मरदार समय गौरा पनाय । प्रमेरोगाधिकारमें यह 7 उप अधीन नीरा की। धीरे धार ये उन मामनरामय भीषय है। सोपफे दलाल तुमार बागेश दुध, । प्रिपपास बन गप १५ उहाँ सामन्नरागको म्या Fol 1 134