पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५४८

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वत्सनता वदति वत्सलता (स० रो०) वत्सरस्य माव तल टा। हितार्थे छ । वत्सोंगा हितकारी, पछडोंको मलाइ करने वात्सल्य, यत्मलका भाव य धर्म। पाला। पत्सा (म स्त्रो०) वत्सर-गप्पा यस लाति राक | पल्पेश्वर (स.पु.) १ रानमेद। २धैयाकरणभेद । राप। वत्सामा गो। ३चिकित्सासागरके प्रपोता। यस्मरत् ( स० वि०) वत्स अम्त्यर्थे मतुप मस्य घ । वत्स्य (स.नि.) यससम्बधीय! वत्सयुक्त जिसे बचा हो। घयमर (स.पु०) चैयाकरण पौरसादिके मतमे वत्मवतो (म० पी०) घरसयुका गामी, यह गाय जिसे । यत्मर भादका रूपान्तर । (पामिनि SIXIY पात्तिक) बछडा हो। यद (म० की. ) कथन उत्ति, बोपदेयके मतसे सदेश वत्सराचाय--प्रपण्ण्पारिजातके प्रणेता। वचन और कथन दाप्ति सान्त्वन, शान, उत्साह विवाद यत्मचिन्द (म० पु०) पक्ष ऋषिका नाम । (प्रपराध्याय)। और प्रार्थना अर्थ समझे जानेसे पद धातुका मामने वस्मय ( पु०) एक राजाका नाम । (भाग० ६।।६), पद होता है। वत्सय्यूह (स० पु०) यत्सका पुर। (विष्णुपुराण) ____ अनु+पद अनुवाद सदाकथन | अप+पद- यहमर (म०नि०) गोगाम उत्पन्न । अपवाद, अकीर्ति। अमि+यद - अभिवादन, प्रणाम । पत्माग(म० स्त्री०) गोगाला गुहाल । प्रत्यभि+पद-प्रत्यभिवादन प्रतिनमस्कार परि+यद यसस्मृति-प्राचीन स्मृति विशेष। माघराचार्यने - परिपाट, निन्दा । प्र+घद प्रवाद, जनश्रुति । प्रति+ कालमापीय प्रथमें इसका उल्लेख किया है। पद-प्रतिवाद ।मम्+घद-सवाद। विसम् + यद- यत्मा (म यो०) रस टाप । वत्सा, बरहा। विसघाद । वि+वद-वियाद कर। यत्साशा (म. प्रो०) वामस्याशाय गाननिह यल्या । यद (म.ति०) पदति यतीति घद पचा पर । पत्ता, पर समामन्त स्त्रिया डोए । तरचून, कलिन्दा। पोरनेवाला। यत्माजाव (म.त्रि०) १ गोग्त्स पालन द्वारा जीविका यदर (म. त्रि०) पाषयकथनगील बोलनेवाला। निसावारा बछड़े को पाल कर अपना गुजारा चलाने । यदतोयाघात (स.पु.) क्धनका एक दोष । इसमें कोई या।।२पिन ऋषि। एक दात ६ कर फिर उसक निरुद्ध बात कही जाती है। घरमादन (म0पु0) अतीनि सदरपु परसाना मदन बदन (म ) पदत्यनेति यद करणे-न्युर। १ मुख, भाषा । पर मेडिया। मुह । २ अन भाग अगला हिम्मा। बदमाघे ल्युट। पत्सादा। (मत्रा०) बरग्यते प्रियत्यादिति, अद | ३धन, वात कहा। ल्युर टोप । गुणनी, गिलोय। बदनदन्तुर (स.पु०) जातिविशेष । परसार(स.पु.) कास्यप एक पुवा नाम । (मार्कपडेयपु० ५८१२) यत्मापुर (म.पु. ) ममुग्मेद । यह मधुगपति कमका पदनरोग (म0पु0) यदनम्य रोग । मुनरोग। मनुरा । पृन्दायनमें धाया जब गाय घराते थे | पदाश्यामिका ( स ० खो०) यदनस्य श्यामिका, ६ तत्। तब यह असुर उनका मनिष्ट करने उसे घसरूपमें | यदनकारिमा, घश्या। घर उधर घूमता ! पोहे धोरणने इसका वध किया। यदनामय (म दु.) यदनस्य आमय: 1 घदनरोग। (मावत म स्वन्ध) घदनारता (म० सी०) यदनस्य अम्लता। पित्तज रोगमे । यत्सिन (म.नि.) १ यत्सयुक्त, बछडोंके साथ इन रोगमे मुहमेशा बहा मादम होता है। २ पुत्रसग्विन पुलोंके माथा (पु.) ३ मोरया । बदनासप (म.पु.) वदनस्य मास! भघरमधु। त्मिमन (म.लि. ) पान्यावस्था, लापन। यन्ति (म. स्त्री०) पद ( वेदश्च । उण ३५०) प्रत्यु यत्मीय। म.वि.) यत्स (सत्म रित पा ) इति । उम्पलतोषत्या मच वृदिशादिति या हो। Vol 140