पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५६३

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५३४ वनाहिर-बनाद वनाहिर (सं० पु०) वनस्य आहिरः । शूकर, सूअर। वनीवन (सं० त्रि०) वननविशिष्ट, इच्छा करनेवाला । वनि ( स० पु० ) यन (खनिकपिधजियसिवसिसनिध्वनि ग्रन्थि बनावादन (म.की.) इतस्ततः सञ्चालन या ग्धान वनिभ्यश्च । उण १११३६ ) इति । अग्नि, आग। परिवत्तंन, पर स्थानमे दूसरे स्थान पर लाना । पनिका (सं० स्त्री०) कुसवन । वनु (सं० पु०) हिमा। बनिकायाम (म० पु०) १ उपचन मध्यस्थ कुञ्ज । वनुप (म त्रि०) १ हिंसक मारनेवाला १२ समक्ता। २ प्राचीन नामविशेष । बने-किंशुक ( स० पु०) बने किंशुक इव । अयाचित चनित (स० त्रि०) वन-क्त। १ याचित, मांगा हुआ। प्राम, वह वस्तु जा मे ही बिना मांगे मिले जैसे वनम २ मेवित, सेवा क्यिा हुया । किंशुक बिना मागे या प्रयास किये मिलता है। वनिता (१० स्त्री० ) वन-क्त-टाप् । १ प्रिया, अनुरका स्त्री, | चने-शद्र (सं० स्त्रो०) बना दा आलुक समासः । कर। प्रियतमा । २ स्त्री, औरत । ३ छः वर्णों की एक वृत्ति । इन्ने (रत्नमाला) 'तिलका' और 'डिल्ला' भी पहने हैं। इसमें दो सगण बने चर ( मं० वि० ) बने चग्नीनि चर शनि ट, तत्पुरुष होते हैं। कृतीत्य लुक । अरण्यचार', वनमे फिरनेवाला मनुष्य, जंगली आदमी। वनिताद्विप् (सं० पु० ) स्त्री पी, वह जो स्त्रीसे इर्ष्या करता हो। बनेजा (सं० पु०) बने इज्यः । १ वदरसाल, आम । निताभोजिन् ( स० पु०) १ सपंवत् करा स्त्री। २ पटक, पापड़ा। २नागकन्या। बनेवल्पक (स० पु०) वह वस्तु जो वैसे ही दिना माने वनितामुख ( सं० पु०) १ पुराणानुसार मनुष्योंकी एक मिलता है। जाति । (मार्क०पु० ५८३० ) (को०) २ स्त्री मुखमण्डल। बनेयु (सं० पु०) गैद्राश्च के एक पुत्रका नाम । वनिताविलास ( स० पु०) १ स्त्रियों की भोग करनेकी (भागवत ६।२०१५) इच्छा । २स्त्री-सम्भोग करनेकी इच्छा। वनेराज (स० स्त्री०) वने राजते राज छिप, यलुक समामः। वनितास ( स० क्ली० ) प्राचीन वांगभेद । दावानलकी तरह जगलमें विराजमान । "तेजिष्टा यस्या. वनित ( मतियाचा मांगनेवाला अधिकारी रतिर्वनराट" (ऋक् ६।१२।३ ) वनेगट दायरूपेणारण्ये राजमाणा' (सायण) बनिन् (सं० पु० ) वन आश्रयत्वेनास्त्यस्येति वन-इनि । वानप्रस्थ वनेरुहा (सं० स्त्री०) विपणों कन्द, तिलकन्द । नेन ( स की वनजात पलाश आदि। ( लिवनेशय (सं० त्रि०) वनवासी। २ वारिदानकारी, जल देनेवाला। ३ वनवासी, जङ्गल में बनेसम ( स० पु०) बने मर्ज इव । अमन वृक्ष । रहनेवाला । ४ वनोद्भव, वनका। ५ इच्छाशील, इच्छा वनैकदेश (सं० पु०) वनका पक भाग। करनेवाला । ६ पूजा या स्तुति करनेवाला । वनोत्सर्ग (स.पु.) १ देवमन्दिर, वापी, कृप, उपवन घनिष्ट (म०नि०) दातृतम, वडा भारी दाता । आदिका उत्सर्ग जो शाखविधिसे किया जाता है मन्दिर, वनिष्ठु ( स० पु०) यज्ञ पशुकी आंत, स्थावरान्त्र । कूओं आदि वनवा कर सर्वसाधारणके लिये दान करना। वनिष्णु (२० पु० ) अपान, गुदा। २ ऐसे दान या उत्मर्गको विधि । चनी (सं० स्त्रो० ) वनस्थली, छोटा वन । वनोत्सव (सं० पु०) आम्रवृक्ष, आमका पेड । वनाक (सं०वि०) यावक मांगनेवाला। वनोत्साह (स० पु०) गण्डार, गैडा। वायक ( स० त्रि०) वनिं याचनमिच्छतीति क्यच ततो वनोद-१ वम्बई प्रेसिडेन्सीके झालावार प्रान्तस्थ एक पबुल । याचक, मांगनेवाला। छोटा सामन्तराज्य । भू परिमाण ५८ वर्गमील है। यहांक चनीयस् (सं०नि०) वन-ईयसुन् । अतिशय याचक, बहुत । अधिवासी लोग अगरेज राजको सालाना १.५०) रु० कर मांगनेवाला। देते हैं । २ उक्त राज्यके अन्तर्गत एक गण्डग्राम ।