पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५६७

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५७६ वन्धुरस्थ-वपा वेष्टितं सारथैः स्थानम् यहा नारध्याश्रयस्थानम् । । पकड़ी। ४ गुखा। ५ मिया, सोफा ६ भद्रमुस्ता, मद्र- पवर्ग में देयो। मोथा 10 गन्धपत्रा। ८ अश्वगन्धा, समगन्ध । जल- वन्धुरस्थ ( सं० वि० ) रथामने उपविष्ट । रथारूढ रथ प्लावन, जलसहति । १० पिण्डग्रज र । १५ वनहरिद्रा, पर बैठा हुआ। जगली हल्दी । १२ मेथिका, मेयो। वन्धुरायु (सं०नि०) वन्धुरयुक्त। वन्याशन (स० वि० ) बन्यफलागी, जङ्गली फल पाने. पन्धुरेटा (सं० त्रि०) रथोपविष्ट, पथ पर बैठा हुआ। वाला। ( इन्द्र)। (ऋक् ३ ४३१) वन्याश्रम (सं० पु० ) वनाम | वन्न-वम्बई-प्रदेशके झालावर प्रान्तस्थ एक छोटा सामन्त- वन्येतर ( स० त्रि०) गृहपालित, पालतू । शिलिन । राज्य । यह तोन ग्राम ले कर वना है । भूपरिमाण २४ वर्ग: ३ सभ्य। मील है। यहांये अधिवामी अभी छः अशोम विभक्त हो । वन्योपोदकी (सं० स्त्री०) बन्या बनोदमवा उपोदकी । गये हैं। कुल गजस्व २२३१०१) २० हैं जिनमें अगरेजराज लताविरोष । पर्याय-चनजा, बनमाया । गुण-तिक्त, को वापिक 38१५) २० और ज नागढके नवावको २७७) | कटु, उण, रोचन। रुकग्में देने पडने है। वन (सं० पु० ) चनति भागमति बननमती (मन्द्रा. वन्य ( म०वि० ) बने भव, वन यत् । १ बनोदभूत, वनमें | प्रवति । उण २।२८ ) इति रन् प्रत्ययः । यजी, हिस्से- उत्पन्न होनेवाला । २ आरण्य, बङ्गाली । (को०) ३ त्वच्.. दार। दारचीनी । ४ कुटन्नर, नागरमोथा । ५ वनशरण, जङ्गलो यप (40 पु०) चप ५। १ केशमुण्डन, वाल मुडना । जिमीन्ट । ६ वाराहोवन्द । ७ देवनल ! ८ क्षीरविदारी। २ वीजवपन, घीया योना। गड़। १० लताशाल । चपन (सं० को०) वप मावे ल्युट । १ केशमुण्डन, मिर वन्यना (सं० स्त्री० ) चनोपोदकी, जगली फलम्यो साग । मुडना। २ वीजाधान, वोज बोना। वन्यनारक ( स० क्ली० ) वनज कटु जीरक, वनजीरा। चीजवपन ज्योतिपोक्त दिन देख कर करना चाहिये। धन्यदमन ( म क्लो०) वनज दमनपुर जङ्गली दोनेका | फुदिनमें करनेसे कोई फल नहीं होता। पूर्वफल्गुनी, फुल । इसे महाराष्ट्र, राणदवणा और कलिङ्गमें काटावण पूर्णपाढा, पूर्वाभाद्रपद, कृत्तिका, भरणी, अश्लेषा और कहते हैं। इसका गुण वीर्यस्तम्भक, बलप्रद पोर आमदोप आद्रा भित्र नक्षत्रों में ; चतुथीं, नवमी, चतुर्दशी, भष्टमी नाशकमाना गया है। और अमावस्या तिथिमें ; शुभप्रहके केन्द्रस्य होनेसे । पन्यद्वीप ( स० पु० ) वन्यइस्ती, जङ्गली हाथो।। स्थिरलग्न वा जन्मलग्न और मिथुन, तुला, पन्या, कुम्भ, वन्यधान्य (म० क्ली०) नोवार, पसही वा तिनीके चावल । और धनुग्नके पूर्वाभागमें वीजवपन करनेसे शुभ होना वन्यपक्षी (सं० पु०) वनजात पक्षी, वह चिड़िया जो है। म्वच्छन्दपूर्वक वनमें विहार करती है। वपनी (सं० स्त्री०) उपते मस्तकादिकस्यामिति बप्. वन्यवृक्ष ( स० पु.) १ अश्वत्थ वृक्ष, पीपलका पेड। अधिकरणे ल्युट डीप । १ नापितशाला, वह स्थान जहां १ जङ्गली पेड़। हजाम बैठ कर हजामत बनाते है। २ तन्तुवायशाला, चन्यवृत्ति ( स ० स्त्री० ) बन्योपजीविका । अरण्यवासीका वह स्थान जहां जुलाद्दे कपडा बुनते हैं। ३ ढरकी। जीवनोपाय। चपनीर (सनि०) वप अनीयर् । १ वपनयोग्य, वोने- धन्यसहचारी ( स स्त्री०) पीतमिण्टो। लायक । २ निपेकयोग्य, वीर्यपात । आयुष्कामी व्यक्तिको वन्या (स. स्त्री० ) बनानामरण्यानां जलानां वा संहतिः | चाहिये, कि वे कभी भी परस्त्री में वीजयपन न करें। वन् (पाशादिम्यो यः ।पा ४।२।४६ ) इति य-टाप् । १ वन | उपरु ( स० पु०) केगराज । समूह, वनसहति । २ मुद्गपणी 1 5 गोपालकर्कटी, ग्वाल- वपा (सं० स्त्रो० ) उप्यतेऽत्र ति वप् भिदायड, टाप।