पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५६८

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पाटिका-पप्पदवी ५७६ १छिद्र, छेद । २ सयो, मैद। ३ पल्मारियांयो। । को मेला ! उसी रम्माने का रामक्षित रुपम यपाटिल (१० खा) अपारिश पर रोग। इम) पाम प्रण किया है। यह यपुरमा दी रम्मा नामको लिनको भाडादन करतेयान चमहा माय पर जाता। अप्सग है। दामो एल्से अपना ये मिद कर चले गए हैं, माप सप लिये दुखित न होये । काल पपात् ( स० वि०) धपा मस्त्यय मतुप मरय पर।) हा इस एकमान कारण है। भृत्यिक मापने जो प्रम मोरा तासा। अपमान पिया, उममे भापा पुण्यक्षय हुआ। इन्द्रफे पपायह ( ला० ) मदम्यान रूप कोष्ठान। पो मापा मय था, यह भी जता रहा, इसलिये आप (घरकम०७ म.) पपुएमाको पूषा तिरस्कार करे । भाप इमे पुनः यगिल (१.पु.) पपति पामिति पाइल) पिता प्रहण करे,कोई दोष न दागा। यिायसुफे मेसे पाप। राना जनमेजयन पपुरमा फिरस प्रहण दिया। धपु ( म०पू०) गपुम् देखो। (हरिय 7 १ER १६६ म०) यपुन (म. पु.) यप उनन् पा ययुन पृपोदरादित्वात् यपुस्मन् (म० मि०) यपुम प्रशस्तायें मतुप् । १ प्रस्त पम्पप । देवता। शरारी उत्तम रोरपागा (पु.)२नाद्वापानि । पपुनन्दन-पा प्रानीन पनि यपुष्य ( स . नि०) यपुम हिता यत ।रीरको भलाई पपुर (सं. नि०) घरनीति मन पपुसो घरः । । करनेवाला) घारी। पपुर (स.मो०) उप्यान देशान्तरमोगसाधन योनी पपुरा (RO स्त्री०) युगा। भूतानि कमाण्यने ति यप (मनि यपि पनाति । उया यपुरमा (म० रनो०) पचारिणो सता । (जटाधर)} २११८) इति उमि। पर यह । २मानानि, २सा (मु०५) ३कागोरापको कम्पा परा मनोहररुप । ३ , माग। (मो.) ४ स्वनामयात शिक पुत्र मनमेजयम नायिया दुमा था। दरि पक्षात पन्या । यह धर्मराजा परनी शा। यमेलियात शिपा जममेजपने मध्यमे या मात्र पायपु. ५०१२१) मनुपरमाय लिया। यपुरमा उम मरे घो? यप्राय (म.लि.नारारिक मोदय । पाम पैटा दुरघो। रान उस रामाको पुष्य (म0पु0) गपुर नगेरास् नया क्षरण पम्या मयासुन्दरा देवर मोहित हो गपे मार घोर फ। रम्धित रसधातु।। राम प्रपेत पर उम माय ममोग दिया। ननमे । यपुममात (म००) मा । नपने घोका यिन दाय रिपकोको इमाम कारण पपोदर (स • ति०) पोरोदर, तोद। पूछा। उन्होन इन्द्रकी दुरमिमपि बात बादा। पमय (R० मि. या-राध्य। पपनीय योन wri HETAमेजय बटुन विगः मोर इन्द्रको दिया। परनाम यो पपन नहीं करना चाहिये। कि, 'तुमन मारो दुर्मरिया है, इसलिये मात्र कार, पमा (दि. पु.) पन देना। Rt मरम्प-गम मुम्हारा मनाम दरेगा।' पौडेयप्त (म.पु.) पति घोसमिति यायमा , शयि समापपानाम पेमा घरमा घरी समझ पिता कपि। ३ापित मा। (गृ vare) पर उ से निकाल गाण| मप साद प य (नि) : यापक, या बनियाना। ५१५पोगन एमाणे पार, साममा विश्वास | पाला! गम्परा पाप गे मोर रानापन भो, 'रामपण (म.पु.) पिना। २पत्य गुरमी मपान सो माया र गुमस ३ मेवादलों पूर्यपुग वालो। में परम पदत्याग रम्ना मामा मामरा यारदेया (म.पा.) रामहि ।