पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५७

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रोम-साम्राज्य ५४ जुगार्थाने वारंवार पराजित हो कर भी अपने श्वसुर | सार्मिलियस किपिओ विराट सैन्य ले कर इस सम्प्रदायके योथासकी मददसे एक बहुत बडी फौज इकट्ठी कर ली। सामने आ डटे । असभ्य सम्प्रदायने इन रोमक-सैनिको. यह देख कर वोथासको सल्ला नाना प्रलोभन और को भीम पराक्रमसे कदली वृक्ष की तरह काटना आरम्भ कौशलसे हाथमें कर लेनेका उपाय करने लगा। अन्तमें किया। हानिवल के बाद ऐसी मार काटकी लडाई नही रोमकोंके कूट-प्रलोभनमें फस कर वोधासने अपने हुई थी। दामादको जंजीरसे वांध कर रोमकोंके हाथमें सौंप दिया। रोमकोंने ईसाके १०३ वर्ष पूर्व इस विपदके समय सल्ला उसको ले कर बडो खुशीके साथ मेरायासके | मेरायासको तीसरो वार कन्सल नियुक्त किया । खेमेमें पहुंचा । यह १०६ ईसा पूर्वकी घटना है। किन्तु यायावर इटलीकी ओर आगे न बढ़ स्पेनमें घुस मेरायास इस कामसे संतुष्ट होने पर भी सल्लाके इस कर लूटने और आग लगाने लगे। इधर मेरायास एक कामसे ईर्यान्वित हुआ । सल्ला यूनानी साहित्यके नई सेना एकत्र कर उसको सिग्वाने पढाने लगा। इसने सुपण्डित और विलासी थे। किन्तु युद्ध विधामें उस- उस समय सैन्य विभाग, बहुतेरे सुधार भी किये । पीछे को अद्वितीय पण्डित देख रोमक चमक उठे। ईसाके, (१०२ ईसाके पूर्वा) मेरायास चीयो वार कन्सल नियुक्त १०४ वर्ष पूर्वा मेरायास जुगार्थाको जजोरसे वाध कर हुआ। उस समय सिम्त्री फिर गल प्रदेशमें दुका । मेरा- रोमे बडे समारोहसे लौट आया। मेरायासके शव ओंने यास फौजोंके साथ वहा पहुचा और उस स्थानको सल्लाको ही जुगार्थाका पकडनेवाला कह कर उसीके सुरक्षित करने के लिये इसने भूमध्यसागरसे यहा तक गले में जयमाला पहनाई । मेरायास दूसरी बार भी कन्सल एक खाई या नहर खोदवाई । यायावर दो दलोंमें विभक्त नियुक्त हुए। हो कर इटलीकी यात्रा की ट्यूटन मेरायासकी ओर दौडे सिम्त्री और ट्यूटनों के साथ युद्ध ( ११३-१०१ ई० पू०) एकुई सेकसेटियाई नामक स्थानमें मीपण युद्ध हुआ। इस समय वाल्टिक और राइनेप्रदेशके दो परा- मेरायासकी सुशिक्षित फौजे पहले गुप्तभावसे छिपी हुई क्रान्त असभ्य सम्प्रदाय अल्पस पर्वतके उत्तर भागमें थी। जब ट्य टन उस पथसे जा रहे थे, तब उन पर पडपालकी तरह मिल कर इटली पर आक्रमण करनेफा रोमक सेना एकाएक दूट पडी और बुरी तरहसे ट्य टन उद्योग करने लगे । ये सिम्त्री और ट्यूटन जर्मनवेशके मारे और काटे गये। सूर्यको प्रखर किरणसे व्याकुल हो हैं। किन्तु पीछे केल्टिक जाति भी इस सम्प्रदायके ट्यू टन भागे। पीछेसे रोमक सैन्य मारने लगे। वीभत्स साथ मिल गई थी। यह भ्रमणशील असभ्य सम्प्रदाय काण्ड हुआ। प्रायः सभी मार डाले गये और जो वाकी अपने सी-पुत्रों के साथ देश-देशान्तरमें भ्रमण कर रहा बचे उन्होंने भी आत्महत्या कर अपने प्राण गनां दिये। था। इस दल में ३००००० लड़ाकू सैनिक थे । कन्सलोंने गोशकर्टमें रहनेवाली उनकी स्त्रियां पति-पुत्रको इस तरह इस सम्प्रदायकी अचानक चढ़ाईसे डर कर शीघ्र उसके | पराजित होते देख शिशु सन्तानोंको मार कर स्वय विरुद्ध सैन्ग भेजा; किंतु रणदुर्मद इस सम्प्रदायके साथ | आत्महत्या करने लगीं। रक्तधारा सुदूर भूमध्यसागरमें रोमन फोने वारंवार पराजित तथा ध्वंस होने लगी। जो मिली। मेरायास युद्ध में जय कर खेमे में लौट आयो । ईसाके १०६ वर्ष पूर्ण इन्सल जुलियस सिलेनास | ऐसे समय उसको एक घुसवारने खवर दी कि आप सिस्त्रियोंके साथ वारंवार पराजित हुआ । इसके बाद पांचवीं वार कन्सल नियुक्त हुए । केसियस नामक लङ्गीनास भीषण युद्ध में पराजित और इधर सिम्बो गङ्गाकी वाढकी तरह ओल्पस पर्वतसे मारा गया और दूसरे एक लडाईमें अरेलियसस्करास इटलीकी ओर दौडे। ट्युटनोंके मिलनेकी आशासे इस सम्प्रदायसे पराजित हुआ और कैद कर लिया मिलान के बीच मासेली नामक स्थानमे अपने खेमे खडे गया। बहुतेरी सेना मारी गई। इसके दाद ईसाके किये । (१०१ ईसाके पूर्व ) ३०वी जुलाईको लोक भय- , ६०५ वर्ष पूर्व दोनों कन्सल मेलियस माक्लियस और दूर युद्ध आरम्भ हुआ। मेरायोसके कूट कौशलसे सिस्त्री