पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५७०

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वपनरायम पदार्थ। ३ आइति । ४ महार। मदन पोहा , यति घमममें नृणा, दिफा उमार, संशाराहित्य शिष्टा परसन । निमरण चक्ष योनि नुसहति, रतयति मोरवण्ठ पमनाना (स.पु०) यमाकराने पिये मदानि भनेकपा आदि उपटर होते हैं। प्रशारकी योग-योननयिपि। इनमेस धमना उत्तम समनयापन (म० ग्लो०) घमा अमिरिये पन माध्मा ६. (मुभुत० २०१०) , नादि विशार। यमरण (म. ) यमिशार यस्तु । ये पे सब-, यमना (स. स्त्रो०) धमनदीप। जलीका पोस्। मैनफर पटाको हाल देवताका तिनका मित विवरण जौका शम् में देता। फल, घोषा कर, श्येतोषा, मफेद सरनों विडङ्ग यमनीया (मो .) यमयतीति घमण्यवियनानामभि पोपट, परच नागेश्वर, रसा , प्रताचन नीम , घानाम् अत्तरि मनापरखियो राप । १ ममिका मफा। असगध, बेअपराजिता साफ, पच, प्यार | (सि० ) यमनयोग्य। कापीमादि।(मुधत . ३१ म.) यमि (म० वा. ) यमनमिति यम (मनुस्य इन। उप पमनविधि ( स० वि०) यमनमिया : यमनकियारा समय १९१३) इति इन् । पमा छन प्रादिका गेगर्भर प्याह है।गिरिमाको वाहिये कि ये रत् यमन पमिरोगाम रोग निदान शिविरमा भादित पौर पपाशारमहोरोगाशरेचन और चमन कराया विश्य पपरमें तरहसे-धिर करत बस्तुगर (भाषा) कामे, अतिपय स्निग्ध यस्तु पानेस अधिकापण नारोगा फासान, बरपान, दिवारोगादि द्वारा प्रयोग पानस, मममय पा सपरीित मोतम काम पादित पार पार, चैस रोगीका दायमन कराना उचित ! एप धग भय, उमेग मनोपातमा मि दोष यमन द। (भाषा ) पिपदोप रसन्यरोग भग्निमा पद, अयुद रोग पैदा होता है पय गर्मायया नया पृणित पम्नुमोक हद्रोग कुछ, विमप, महापाण, विधारिका, भपया काम, कारण पायु पित्त, पानि शिर हो र यमारोग ध्याम, पानस पृद्धि पस्मार, गरोग्माद, सातिसार, उत्पादन करता है। इस रोगमे मुगम पाशा दोनोरे कणनाय महिमगर गुण्डी अनिसाद पिचरम पसारा शरारदुसन रगता है। रोग, मेदारोग भीर धपिसप रोगों में चिश्मिर यमन रोग पा1 मारम होत है -~याज, पिसन, को यमन कराना माहिए। १५, मग्निगतज, मागानुश। इस रोग पूर्व पक्ष यमन निषेध पिय-कण रेप, निद्रा, ता यमि उपस्यिाये पहले पास मा पमनोग भाप दौगम्य विपनिल उपमग पसा भोर उदारावरोध मुगप्रमेव तथा मुय यणान मादम पाते प्रासादि दीर पमनारायति मा नहीं रहते।। हैन पाने वाली मानोस रविकिर जाता। यमन गुण~यमन रे घन दौतामयारण यामय सामग्य रसमनिमगेर पुषित हार उमस दोधार सी विकार मारहा। अत्यन्त गमगा मग पापमपं माप मुपपी मोर निम्नरिगित गरियो माभा यान 7 ला उमटसना 4 मुगा परिषण परके वार - साहिये। जैम-पमा उगवान, गुन्मदर जा पाता है अगर पामि रोग कहते हैं। मोर शिमोगमण, घमाम पर साल पात -पात गमन हु तथा un भनिार रातुर, पप गानोगो परोकमाता, माय पदमा मुमार मग मामा शरीरमाRT पमत गदि दोष्ट गलाम, पान दुगात देना ताबास में मात्रय प्रश्ना nिufT मिकप गौर गमगी मादिप पमन । पति एप साग प्रयर मार निराप में समा ग या एवम मामाल हो जात, पद मा Raniदि पाप स द पमम नातिनी। रयिनिष्ट गनु यमन ये मान दिया ।