पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५७६

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क्यन विधा ५८७ उम समय तरह तरहके र गोंसे रगे हुए ऊनी तथा सूती । चभवत् कर्मपा शुद्धिदमानां सथैव च । कपडे पहनोको चाल थी। मामारतके विभिन्न गारमूलमन्तानां च धा यवत् शुद्धिरिष्यते ॥ राजाओंके घेशभूषा तथा द्रोपदीक यरहरणके प्रप्त गमें कौपयाविक्याल्पः कृतपानामरिसके । यात्रोंकी विभिन्नताशा निदर्शन पाया जाता है। रामा आफ्नरशुपटा नौमाना गौरसर्पप ॥ यणके मादिकाएडके ७७ अध्याय में निखा है, कि सोमवत् शश गानां भस्पिदन्तमयस्य च । सयोध्याधिपति दशरथ जय अपने पुत्र तथा पुवयपूशे ले । शद्धिर्विजानिता काय्या गोमूत्र नोदकेन पा" पर जनक्के घासे अपने राज्यम लौट आये, तब उनके (मनुसहिता ५।११८१२१) साननवाने TIना प्रकारको रम्य वस्तुओंसे उनसे पूना उक्त प्राय दशम अध्यायके अन्दर ३५ तथा ५२वें की। उस समय फोगल्या सुमिता, फैयो एवं दुमरो श्लोकों निपादपण्डालादिमें मृतवस्त्र पहननेको रीति दूमरा रानपनिया नीम्यान धारण करके पुरमधूके साथ पाई जाती है किन्तु अय नातिक रोग मृत रख तो मगल मालाप परतो हा देवाय पूजा करने चलो। दूर रहे, धोयीको भूसे दिए हुए दूसरेक पपडे मानहाँ इन सबों पर आलोना करनेमे मारम होता है कि पहनत थे। मनुसहितामें इसका भी निषेध किया गया रामायणीय युगर्ग शुक्र कापायरञ्जिन वस्त्र पर शुभ है- कार्यमें शाग्यपत्र व्यवहारमलाये जाने थे। 'शारमनीपलके मधये नैनिज्यान्ने पक शने । भगवान मनुरचित स्मृतिप्रायफे ३५० १६ नया नच वासासि वामामिहिरन च वासयत् ॥11586) १९१८१ शेशम वस्त्रमा उल्लेख किया गया है। पे ____उम समय फूलोंक गौ रगे हुए शानक्षीजि परिधेय वस्त्र उस समय मा उम्पनिमें गिने जाने थे एव । नादि निमित घरा येना ग्रामों पक्षमलिकुर हा यतकी चोरी करनेवालेको प्राणदए दिया जाता था। मना था । ( मनु० १०१८) (८२२१ मोक)प्रथम अन्यान्य सम्पत्तिकी तरह घनविभागामी ध्यस्था देगी जाती है। तसयों पर आगेचना करनेमे अच्छी तरह जाना जब कोई अन, पटमन अपना पासादिका सूता। नागा है, कि वैदिक युगसे रे कर स्मृतियुग पन्त मार चुराता तय उमे उस सूने दूने मूल्य मादाय करने साय आयसमाजम चयनयत्र तथा ययनविद्याका यदुत पडते थे ( मनु० ८१३२६ ।। १५ कोई सूता युननेवाला। हो प्रचार था। पापनों पौराणिक युगमं उस बार किमी व्यक्तिका १० पर सूता चुरा लेना गा एव पफडे ) भी अधिक प्रचार हुआ । रामायण तथा महाभारतादि जाने पर जब यह उम ध्यचिको ११ पल सूता नहीं गया। पेतिहानिक प्राम, महाकाव्य पव पुराणादि शारत्रम धोंमें देता था तब यह राजदण्डानुसार १० पल मादाय भरने । नाना प्रकार के रगोस रंगे हुए पपड़े के व्यवहारका पूरा को बाध्य होता था। प्रमाण है। मनु ८३७ सूत द्वारा पता चरता है कि उस यदि जगन्क प्राचान वनणि पारिदशन देखना हो, समय जो गहनने के घन तैयार किये ज्ञात घे घे लम्बाइ | दि जगत्फ मर्यप्राचार तातोका राम्तित्य प्राप्त करनेका तथा चौडाहमें पत्तमान पारफ ममान ही होते थे। आवश्यश्ता हो तो एक बार प्राचीन मित्रराज्यकी ओर उस समय क्याम, रेशम तथा पशमी वस्त्र बहुत प्रच | दृष्टि पिकरें पाप ममी म देव मिट जायगे । यहाँ लित थे। जलप्रक्षालन द्वारा सूती कपड़े पर क्षारज । के मामि गहरके मध्य (Mummy pits of Egrpt) मृत्तिका द्वारा रेशमा तथा पशमा कपडे साफ करते , अनुमधान करनेमे आज भी शवाच्छादित घरों के कितने हो निदर्शन परिलक्षित होंगे। रोटाको प्रस्तरलिपिसे "अद्विस्तु प्रानण शौ । वहूना घान्यवाससाम् । ज्ञाना नाता है, कि यहाको राजसरकारसे पुरोहितोको प्रभासने नत्यल्पानामदि शौच निघायते ।। उनक चिरप्रिय कपास पत्र दिये नाते थे। पक्षक उच्च