पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५७८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


श्यनविद्या परना कठिन है। रितु हाँ, इस पगला तांतमें उतनी । नियां वो चला पर कुछ न कुछ रोजगार कर लेती शीघ्रतासे काम नही हो सकता । ए सुदक्ष ताती | था। चूदोंके मुखसे अभी भी की प्रभावशापक इस ताँतम एक मिाटमें ३१३२ वार दरकी चला साता | इस तरहको एक विम्वदन्ती सुनी नाती है-- है। इसमें सबसे बड़ा दोष यह है, कि इममें हरकीके । "चरखा मेरा प्यारा बेटा, घरखा मेरा नाती । ठहरनेका स्थान नहीं होता। इसलिये जरा मा चूर चरखेकी दौलतसे मरे, द्वारे झूमे हाथी' जानेसे हो दरको नीचे गिर जाती है। लोगोंसे पता घरता है कि उस समय चलेंसे सूता पलका तान ( Fly shuttle loom)-१८ तैय्यार करके भारीगरको दनेम यह छ। आने मजुरी शताम्दाके शेष भाग ज्ञान नामक साहबने इम रेकर जो कपडा युन देता था यह पसाल तक ठहरता का पहले पार थाविष्कार दिया था। यह बिल्कुल था। इसका कारण यह था, कि उस समयफे चखेंस विगी नही हैं व गला तातको ही कुछ नये ढगमे काता हुआ सूता पूर्व पका होता था, उसमे कपड़े भी सुधार पर यह तैयार क्यिा गण है। असलमें यामानोसे धुने जाते थे। इसमे गृहयो को पदे में उमके मा इमको पूरी समानता है। उत्तम गयान बहुत कम खच पहता था। चोक चन्द दोजानेसे नशा गालके पाठसे ही पे दोनो प्रकारफे तात तैयार । हमारे देशर्म बहुत क्षति हुइ है। कक्षा सूता बहुत दिये जाते हैं। उकडी व मजन पर सूम्बो होनी कमजोर होता है। सुतरा उसे पयनोपयोगी बनाने में चाहिये, नही तो थोडे दा दिनो में उसके येकार हो । बहुत मजूरी देने पड़ता है। सूनेको सख्त चिश्ने नाने मम्मापना रहती है। इसके पितो होमग एय पर नहीं करनेसे कपडा नहीं बुना ना प्रत्यग होते हैं किसा एक मशफ विगड नानेसे ही साता। कपडे की लम्बाई सूनेको तानी (Warn) काम थगित होजाता है। पय चौडाइक सूतेको भरनो (Welt thrend) कहते हैं। ___षयन प्रक्रिया। __तानीका सूता (Warp) तैयार करनेके समय विशेष घरगुननेकी प्रथम सीढी सता तैयार करना है। मनोयोगको मानश्यकता है। तानीका सूता अच्छी तरह सबसे पहले सूनाशे ययनोपयोगी यना रेना पड़ता है। मौर (मज्ञ) रेना चाहिये, भरनाका सूना (welt thread) प्राय कारीगर घरको त्रिया हो सूना तैयार करती हैं। कुछ मनोर रहन पर भी उतनी क्षति नहीं होती, किन्तु एव उमे सोंट कर युननेक योग्य बनाती हैं। इसके बाद तानोफे मोगा खूब सप्त पर रिछि न होना अश्रत कारीगर उसे नौत पर ढापपडा युनना शुरू करता है। यावश्यक है। जब तर कारीगर उन तैयारा तानीको घुन लेता है | सूता खोलना ( Untastening)-सूता परीदनेके तप तक उसको स्त्रिया दुसरी ताना तैयार कर देती है। समय सूने में अधिक खएड हैं या नहीं, इसको परीक्षा पहले इस देशमें उथ श्रेणाके हि दुमो घरकी पर लेनी चाहिये। प्रति पोरे में ४०० सी लच्छ होते अर्थान् ब्राह्मण कायस्य परियारको स्त्रियांचा चराया है। सूने दो बच्चे परफे पोलेसे अलग करना चाहिये। करती थी। ब्राह्मण कुमारियो के हाथ काता हुआ| ठेहुनेके ऊपर पोला गा फर च्छा निकालनेम सुविधा सूना माज मो विवाहादि शुभ कार्यमें ध्यवहार क्यिा होती है। इसे धास्ता खोलना कहते हैं। जाता है। क्यचादि धारण करनेमें भी कुगारीके हाथ। सूताविज्ञान (Wetting)-एक बाल्टोके अन्दर का काता हुआ सूता न होनेसे काम नहीं चलता। ये स्वच्छ जलम मतो भीगोक लिये रख देना चाहिये। चर्या वातनेके स्पेि वारोक एव मोटे सूतक हिसावले तानेा सता इस तरहसे तीन दिन तक भोगनस चय मेहनताना पाती थी। उस समय एक पोले सूतका नोपयोगी होता है। उसका पानी प्रत्येक दिन बदल देना मनूगेछ आने तक्थे। उस समय चखा होनेसे हम चाहिपे। भरनीके सूतेको एक दिनसे ज्यादा भिगोनको देशमें मन घनका दु ख नहीं था। समी दोन दु बिना | मावश्यक्ता नहीं होती। सूता भिंगासे मजबूत होता Vol XI 148