पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५८४

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चयनविधा दुमका विषय है कि, अगरेज कम्पनीको अनुकम्पामे ऐसा र तसर घन चुने जाते हैं। वीरभूम, पाकुडा प्रभृति सुन्दर गिल्प भारतसे लुम मा हो गया। मैनेटरको स्थानों में भा कोसे सूता तैयार करके नाना प्रकार के यणिक-समितिके प्रयत्मसाध्य धोती तथा साडीके | कपडे धुने जाते हैं। वाणिज्यनी रक्षा करने में धोरे धीरे इम देशको तातो | ____ इस समर मैश्चेस्टरको क्लसे गाते हुए सूतेको आमदनी जानिक निरपोपिन पाणिज्यकी नईमें कुठाराघात क्यिो | मधिर होने के कारण भारतको रमणियोने वो चलाना गया है। इमममय ये तांती योग हो कर उम | धन्द कर दिया है । देतो सूतोंक भापसे चिलायतो सूतों तरहका उधम नहीं कर साते। प्राचीन शिणि इम | का भार सस्ता दम्ब कर यहाके मभ्यममाज अपनो कुल समारसे अपस्त हो चुके सुतरा उनके माथ ही साथ कामिनियोंको चर्खा चलाने का फश नही देते वस्तुतः मारतीय यनशिप भी एक प्रारमे जाता रहा। उमी विलामिताके प्रभारसे आज भारतम घिरदीनता इम ममय जो पुरुष अत्यात चेना करके उम प्राचीन मा उपस्थित हु है। माज भारतवासिने अपने शरीर शिपकोर्सिको जीधिन रखने में गत्नवान् हैं वे भी विदेशी ढक्नेक कपड़े के रिये मो दूसरो का मुह जोहा पहता पत्रको तुलनामें राममे हानिका अनही अधिक देव है। उच्च श्रेणीके शिधित नथा निसी भारनियो ने अपनी कर अपने अपने व्यवसायसे हताश हो रहे हैं। इस ममय, पुलामनियोंश वर्मा कातनेके कष्टपे उद्वार करके उनकी घनशिपमें पूरापेक्षा काही अधिक दीनता आ घुमी है। कमर दरनेके कपड़े ताफा भी आभार कर दिया है। फिर मा इम धीहीन वाणिज्य गौरवको मिया रखनेवाले तातियान म्यार्थ नि देश र जाताय ध्यरमाया जा अभी भा ओम पुगर विद्यमान हैं। जलि दे दो। वे भा अत्र ध्यर्थ परिश्रम करके सदेश पिरागी ___पाय सुविष्णत जरीके फोते मोने या बादोफे | रिदश भक्त भारतियोक अनुप्रहकी भाशा प्रत्याा नहीं त तु छारा प्रस्तुत गुरावदार माडी, जामदानी फामानो रखते यही कारण है कि, इस देश में इतने समय बाद तथा समारणे मनुटनीय किग्वाप घन मभो भी शिल्प, वस्त्र चयन शिल्पका इस तरह गध पता हुआ है। पहले चातुर्यको पराकाष्ठा दिखा रहे हैं। इन सब पटोंमें जिन शिलयो के लिये मारा भारत, इतना हा नहो सारे प्रधानता पाम वा रेशमी सूौके ऊपर नरोके फूट नया सभ्य जगत् लालायित होते थे मारे शिल्प मारतस घेरबूटे निचे रहते हैं। उनिपुर महिसूर अर्कट दिली, विलुप्त हो गये। उनके बदम एव उदा के गनुकरणसे तथा औरगाबाद प्रभृति स्थानों में इस समय भी तनुशिल्प अगरेज वणिक ममिति के अनुग्रह द्वारा आज भो सादा के यथेष्ट मादर तथा विस्तार देखे नाते हैं। मचादि तथा दोरादार डोरिया, मलमल अघवानि, सुइस, जद्वी लिखित उमी सुप्राचान युगमे आज पर्यन्त भारतवासी प्रभृति सुन्दर वारा कपडे बडारम प्रेरित होते हैं। सभी वणोंको रमणियों के मार्ग कातनेकी प्रथा देखी । दाचे उम सुविख्यात मसलिन पडे . पात याद जाता है। इस समय भी ऊपर पड़े हुए स्थानों में निया) परनले पय बगालका गीग्यकात्तिका इतिहास पढनेमे नरीम धागेक मता तैयार करती हैं। तो । जान पडना कि पक समर बट्नाटका तारा माति तारणले भारतधप, दण्ड आदि कई एक पाशात्य | ख-याशिप सबसे ऊची सीढी ता पहुच गई तथा प्राध्य देणाजात द्रोंकी आमदनी होनेसे देती यो । १६ सदा मामागों परेशयानो द्वारा मतेने प्रस्तुत तथा प्रबारमै अत्यन्त अवनतिर है। रफ पिच् सुवर्णग्रामम मा पर यहाके कपास घरन किंतु 74 भी निन जिन स्थामि रेगमी यख नेयार होते ) गणिज्यकी भूरि भूरि प्रशमा कर गय है। उस समयको हैं उन सर स्थानों में चर्मेका पूरा प्रगर है। । घग राजधानी ढाका शहर में जो पासफे वारो कपडे बहाल फ अन्तगत मुर्शिदाबाद निलेक चरमपुर शदर | तैयार क्येि नाते थे, वेडाका मति के नामसे में देशा तांतामे रेमो गरद वन पथ मानभूम जिलेक पुरे जाते थे। ये पर मुगरि नगर ममलिन रघुनाथपुरमें इस समय भी कोयेम चम्ना द्वारा सूता कात। पहोंसे भा हो अन्त्र होत थे। मभी भा यूरोपक