पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५८७

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| उम्र। पयनविद्या-बयस्य एठी. बेगुनी, मौजलपुर, चांदतारा, पांचपान, सूती- चटाई वुनी जाती है। घे चटाई दो प्रकारको होती हैं। फुलाल, नरुणसई, मिलमिली, लहेरिया, फुलाल, नामा- काटी तथा वलन्दा । चट्टनाम, नोआखाली प्रभृति स्थानों- बलो, पटोला, पीताम्बर इत्यादि । में वेतको छाल चांछ कर अति सूक्ष्म तथा शिल्पयुक्त सोने या रूपेके तारो ( नन्तु ) से तैयार किये हुए शीतलपाटी तैयार होती है। कपडे --जरीका फीता, गोटा, रिनारा, अंचला, काला- वयनाडू-मन्द्राज-प्रदेशके मलवार जिलान्तर्गत एक पहाड़ उपविभाग। वैनाड देखो। बतन, सूर्ख वा सुनद्दलो, रूपहलो, धानक, लत्रका, पाटली वयलपाड - १ मन्द्राज-प्रदेशके कडापा जिलान्तर्गत एक बारडी, पाटा पोखरी, गंगायमुना, किरण, पाइमक, सरमा, कारचिकन, कारचोव, धोतो वा साडीके पाड, उपविभाग। भूपरिमाण ८३१ वर्गमील है। होमिया, नास, लप्पो, फीट, पल्लव, किखाप, लुगी, बेल- २ उक्त जिलेका एक नगर। यह वयलप्राड तालुक- दार, वटदार, सीकारगाह, जगला, मीना, जालदार, का विचार सदर है और मदनपल्लीसे ४ कोस उत्तर- संड, चांदतारा, चमसफूल, मोहरवटो, टेरछा, जालदार, पूर्व में अवस्थित है। पन्नाहजाग, डोरिया, गेंदा, सावर्गा, चिकनदाजी, कशीदा चयस (सं० पु०) १ पनी, चिड़िया । २ जीवनकाल, अवस्था, झापान, मुंगा-चाम्ग्वाना-कगीदा, काटारोमी कणीदा, | नोलचारखाना कशीदा, ममुदलहर इत्यादि । इन शेपोक्त | वयसिन् (सं० नि० ) वयसे स्थित । प्राप्तवयस्क, जवान, पडो के पाड रेशम जरी तथा कपाससूत्रके योगसे बूने | सयाना। जाने है। वयस्क (सं० त्रि०) १ वयस्क, अवरथावाला । इस अर्थ में इस शब्द का प्रयोग समस्त पदके अन्तमें होता है। सुई को सहायतासे तसर वा गरदके कपडोंके पाड़में, पूरी अवस्थाको पहुंचा हुआ, जो अब बालक न हो । नमान में, स्त्रियों के निमास्नोन एवं वालकोंके पहरनेके कपडोंमें चिकनके काम किये जाते हैं। रेशम तथा व्यस्कृत् (सं० त्रि०) आयुष्यप्रद, जीवन देनेवाला। कपास मेलसे सुजनी तैयार होती है, लियां ही प्रधा- वयस्थ (सं० त्रि०) वयसि यौवने तिष्ठतीति व्यस्-रथा-क। नतः इमके ऊपर सुईसे काम करतो हैं। काश्मीर, अमृत १ प्राप्तवयस्क, सयाना । २ युवा, युवक । ३ समवयस्क । मर लुधियाना, नूरपुर, शियालकोट तथा गुरुदासपुरके (पु०) ४ समवयस्क पुरुष। शाल नथा शालके पाढ चुने जाने हैं। काश्योरी तांतोंसे वयस्था (सं० स्त्री० ) वयो यौवनं तिष्ठत्यनयेति वयसस्था बुने हुप शाल-निलिबिनौट, निलिकार, कणिकार और बर्थे कः, निपातने विकल्पे विसर्ग लोपः । १ आमलकी, बिनौट एच सुई मे बुने हुए अमलीकारके नामसे प्रसिद्ध सावला । २ हरीतकी, हड़। ३ सोमवल्लरी । है। फलकारी ओढनी कपास वनोंके ऊपर रेशमके पास ४ गुड़ ची । ५ सूक्ष्मैला, छोटी इलायची । ६ काकाली । दिये जाते है । मोटे मनेके कार्पेट गलीचा, दुलीचा, सत , ७ जालमलि, सेमल । ८क्षीरकाकोली । ६ अति अम्ल- जी प्रभृति नाम से विख्यात है। पशमके भी गलीचा, |पणीं । १० मत्स्याक्षी। ११ युवती। ( Curpct ) कम्बल प्रकृति बने जाते हैं। वयस्थान ( सं० पु० ) यौवन । चटाई, शीतलपाटी, तयावसनसके परदे एवं पाटसन वयस्फेोहा (सं० पु०) मुन्नव्रणविशेष, चेहरे परका वह के चट, थेली प्रभृतिकी उत्पत्ति बयन द्वारा होने पर भी वे फुसियां जो जवानी में निकलतो है, मु हासा । वयनियर अन्नभुक्त नहीं किये जाते। क्योंकि उन- वयस्थायन (सं० दि०) यौवनरक्षा । में सूक्ष्मता नया शिल्पचातुर्यका वैसा परिचय नहीं वयस्य (सं० पु० ) वयसा तुल्यः वयस (नौवयोधर्मेति ! पाया जाना! इस समय त्रिपुरा, चट्टप्राम, मेदनीपुर, पा ४४४ ६१) इनि यन्। १ समान वयस्क, एक उमर- भन्दाज, बेलोर, निन्नेवली प्रभूति भारतके कई स्थानोंमें ! वाले, हमजोली । पर्याय-स्निग्ध, सवयस् । २ मित्र ।