पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६००

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वराह को श्रोहा परत लगे। इस मारसे पृथिवीश चिला। इस प्रकार के कौशलसे राहदेवके मारे जाने पर उस हिम्मा धंस गया। अनन्त च कूम को आक्रमण करके के गरीरसे सभी उत्पक्ष हुए । शरभने वराहदेहको पृथियो मध्यस्यायो यराइटेवकी बहनध्यघासे मानमस्तक | फाड दिया और ब्रह्मा, विष्णु तथा प्रमोंके साथ महा पौर धानति होगा। इस पर पुवसे परिवृत याद, देर जलमे इम देदको पराका चले गये। विष्णुने न्य मारमे पृवी पर तरह तराका उत्पात होने लगा, सुदर्शनचक द्वारा उस देवको खण्ड ग्वएड पर साला। सुमेहक सभी सद टूट फूट गये, मानसादि सरोवर इमो वराहदेयके दोनों 5 और नाका सभाग उछल पड़ा और कल्पप नष्ट हो गण। ज्योतिष्टोम नामक यक्षरूपमे परिणा हुआ। पोलदेश ___ अनन्तरवगण लोकहिन लिपे देवेन्द्र और टेष । के उच्च स्थानसे कर्णमूरफे मध्य स्थत नधिभाग यहि योनिके माय मन्त्रणा करके भगवान् विष्णुका स्तर टोमयह मक्ष और दोनों का मधिमाग पौनभय करने गे । भगवान् देताओंके स्लासे सतुष्ट हो। स्तोम या, जिहामूरोप मधिमाग द्धस्तोम तथा पोले, तुम लोग जिम मयसे भयभीत हो मेरे निकट आये | युइतस्तोम जिहादेशके अधोमागसे मतिरात तथा वैराज दो मुभम किस प्रकार उम भयकी गाम्ति होगी, यह यह हुआ। अश्वमेध महामेव तथा नरमेध आदि प्राणि मुझमे जल हो। देयतामोंन कहा, 'घराही कीडाप हिमार जो सव यक्ष है, दिसाप्रवर्तक ये सब यक्ष चरण कारण पृथिरी दिन पर दिन शीण हो रही है। मनुष्य सचिस, राजसूप, वाजपेय और सभी गृहयज्ञ पृष्ठ उस उगसे शातिगाम करने नदी पात । सूखे कह । सन्धिसे , प्रतिष्ठा उत्सर्ग दान, श्रद्धा और सावितो पर बाघात करनेमे यह जिस प्रकार टूट जाता है घराद । आनि यह हदयसधिसे, उपनयनादि सर यक्ष देपुरक आधानसे पृथियो मी उमी प्रकार विदीर्ण हो। रहा है। भाप सृष्टिरिथनिफ लिपे सपना यह भयर कप तपासायश्चित्तविधायक यज्ञ मेढमधिम, रामयश, छोड दो सर्पयह आदि सभी प्रकारका अभिचार पक्ष गोमेध पय शाह 11 देतामों की यह बात सुन कर ब्रह्मा और वृक्षजाप आदि यज्ञ सुरसे माधि परमेष्टि, गोपति, महादे प्रसे कदा 'जगन्के दुधारणस्वरूप इस घराह भोगज और बग्निशम यह लागृलसधिसे , तीधप्रयाग, देवका मैं त्याग करूगा, किन्तु सुखासक इस देवा मैं मास, सण, आक और आधण नामक या नाडी स्पेछापूर्वक त्याग नहीं कर सत्ता। इसलिपे हे ब्रह्मन् ।। सधिमे, चोक, क्षेवयक्ष पञ्चमार्ग लिङ्गमस्थान तुम महादेवको मपने नजम पुष्ट करो, देवगण महादेवको। गौर हेरम्ब पर जानुदे से उत्पन्न हुआ ! इस प्रकार भा अध्यायत करे नस्य सहम तथा ब्राह्मणादि । वराहको देहस आउ बनारस ऊपर या उत्पन्न हुए। पारण पापपूर्णप्राणको मैं सुशोसे छोट दगा। इसके बाद वराहक धोलसे र नासिरामे नुप्रोगस प्राक भगवान् विष्णु देवताओंके थादेशसे परादयसे अपना तन यम (होमगृहका प्यभागम्य गृह), क्णरधमे इष्टा खींचने लगे। नजके खीच जानस वराहदेव सरवहीनही पूत,६ तस यूप, रोमम कुश दक्षिण और घाम पादसे गह। पाछे महादेव देवताओं के माथ तेजरहित घरादेवको मध्वयु और होता, मस्तिष्क्षये पुरोडाश, मध्यदेशसे समीप गपे । ब्रह्मादि देवगण महादेवका तेज बढानेक रिप पश्येदी, मेढसे यशएड, पृष्ठ दशसे यशगृह और हन्गामे उनके पाछे पाछे चले। उासोप तज देनेस महादेव । यक्षका उत्पत्ति हुन पराइका था मा यमपुरुष हुए । उस सत्यात लगन हो उठे। वन तर महादेवने अध्धत की रक्षासे मुखाकी उत्पत्ति हुई। इस प्रकार घराहको मोदेशर्म यएचरणसमचित मयानक शरमरूप धारण देसे भाएड पिः मादि यमाय समाप्रारक दृष्य उत्पन्न दिया। वराह और शरममें तुमुल युद्ध होने लगा। हुए थे। यधरूपमे सयभगत्को भाप्यायित करने ठिय पीछे शरमरूपा महादेयसे बराहदेव मारा गया। पाछे यराइदेयकी दह यक्षरूप में परिणत हु। ठसक महारठ पुव पौत्रादि भो भरमके दारण माघात ___ ब्रह्मा, विष्णु और मर इस प्रकार यक्षका सृष्टि से विनर हुए। परके यराइदेयके मुवृत्त, कनक और घोर नामफ मृत