पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६०६

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वराहकल्सवरादापत्त यराहकल्प ( सपु.) पका नाम । इस काम 1 एक कागा पत्र लिखा है, कि ओल दाजगण पहा घराह भगवान्ने वराहमूर्ति धारण को था। को इस्पा किया परने ये, साकारण इस स्थानका पाहायच-धारणीय मनापषिशष । सदपुराणम ) वराहनगर नाम पड़ा है। म्यानाय प्रियदाता है कि इसका उल्लेख है। विष्णुको वराहत्तिस यह स्थान देव नाम पर कार्शित पराहाता (स. स्त्रो०) घराहस्य कामा प्रिया । घाराहा हुआ है। फिर वहुतोका कहना है कि यह एक दरयु पृक्ष। मरदार रहता था। उसने वराह अवतारक उद श्यस इस पराहकारिन (म. पु०) सूयामाण पुस । पयाय-सूर्या । नगरको माया| जो हो, पराइनगरका स्थान और नाम वत्ता। | नितान्न आधुनिक नहीं है। महाप्रभु चैत्यदेवरे आ कर घराहकालो ( स . स्त्रा.) आदित्यमता, दुरतुरा यहा भागवताचाये पर दया को थी। आज भी घराद यराहनाता (स. खा०)पराहेण का ता। अतिप्रियत्वात्। नगरमें भागताचार्य का आसन है। भागरतावान देखा। १० परिशेर लजालू। पयाय-लजालु, ममदा लज । यहाक मोलदाज कोर्सिनिदर्शन स्वरूप आज मा कारिका, वराहनामा, चदरा, शकरो, तित गघिका, नम ! अनेक चित्रित साहेष सूटे फूटे टुई नजर मात हैं। मारा, गण्डकाली, नादिर, लज्जालुका, मालिकारिका, १७६० इ० गोलन्दान गवर्मेएटन यद स्थान बगरेजोंक हनाअलि, गएडारा, ममाच्छा। वाराही। हाथ मौंप दिया । ओन्दाजोंके मानने पहले यदा एक पराप्राम-यम्बा प्रेसिडेसोक बेल्गार निगमगत एक पुर्तगाज उपनिवेश स्थापित हुआ था। अगरेजा शासन गएडप्राम। में यहा म्युनिस्पलिटो स्थापित हुई है जो नाथसुवर्धन पराहती--एक तीयका नाम (मपु०) म्युनिम्पलिटरी आय कलत्ता' नामस प्रसिद्ध है। यहा पराहना स.पु.) आरोगविशेष यराहत । गङ्गा किनारे अनेक धनी और वणिक वागान हैं। पराहदत् (स. स्त्री०) घराहदत । कर एक दयालय भी गहा तटका शोमा यदा रहे है। परात्त-णिकभेद । (थासरित्सा. ३७१००) मालमवाजारकी २दा तेलको 7 आर उमका माणिज्य वराहदात (स. त्रि.) १ हद विशिष्ट जिसके | तथा दोनि यो कम्पनीश चटाल या प्रसिद्ध धागिन्य दात पराहक दातक समान हो। (पु.) २ वराहका दात । पेद्र है। मालमवाजारक उत्तर सुप्रसिद्ध दक्षिणेश्वरका घराध स्वामा--गृह्यसूत्रथापाक रचयिता। काली-भवन है। पूज्यपाद परम६ स रामदेव यदा यरावादशी (R० स्ना०) यह कृत्य जो माघ मासको | रहते थे। शुका वादाम घरादरूपी विष्णुक लिये किया जाय। यराहनामन् (स.पु.) वराहस्य नामेव नाम यस्य वराहद्वाप (सला० )एक द्वापका नाम । परार दावा । यारादीपत। यरादनगर-बङ्गार के २४-परगन अन्तर्गत एक प्राचीन वराहनिह (स.पु. ) बराहमासम्म, पराइफ मामका पौर प्रसिद्ध नगर। यह गङ्गानदीक वा किनारे अर| शारदा । स्थित है। यह स्थान पहले वाणिज्य प्रधान या गड़ा वराह पण्डित-भयोगस मयिक नाम वापरणक भरि-तरहणा मादि प्राचान प्रथोमें इसका उल्लेख रचयिता। भाषा है। यह पहले करपेको घोत का जारों वाणिज्य | यराहपता ( स. खा० ) अश्वगन्धा, समगध । पक्षापा, ममी उतना नहीं है। पहले मोलन्दाज यणि घराहपित्त (सक्ला०) शारपित्त । इस शोधनका को यहां पर काटी या चहा मानक समय मोल्न्दाज, तराका-शकपित्तको सुनारेने पर पाछे नामक रसमे सौदागरी पदाज यहीं पर लगा साल पर रहना था। भाषना दास प दिनर्म हा विशुद्ध हो जाता है। मग इस नगरका जो घराहनगर माम पहा है, इस विषय | भादिका मी पिचरमा प्रकार गोधा शा ! __ में बहुस-सौ कि वदन्तिपा मुना ज्ञाता है। उस समयक मत्स्यक्ति दसा। You 136