पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६०९

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वराहवत्-रिया वराहवत् ( स ० अव्य० )'बराहमा , वराहके ममान । वरिया-यप्रदेश के गुजरात प्रान्तके रेवाकान्या विभाग वराहवपुप ( स० क्ली० ) १ वराहकी देह । (नि.)२ के यन्तगत पक मित्रराज्य । यह अक्षा० २२२१ मे २२ वराहदेहधारी, जिसका शरीर वगह के समान हो। ५८ उ० नया देशा० ७३°४१ मे ७४ १८पू के मध्य वराहव्यूह (स पु०) प्राचीनकालका एक प्रकारका व्यूह। विस्तृत है। उमगे, पूर्ण और पश्चिममे अदजाधिकृत __ या सेनाकी रचना । इसमें अत्रभाग पतला और बीचका पञ्चमहल विभाग, उत्तरमें सजेलो और सून नामक भाग चौडा रखा जाता था। सामन्तराज्य तथा दक्षिणमैं छोटा उदयपुर है। इसकी वराहशर्मन्-ज्यातिरत्नके प्रणेता। लम्बाई उत्तर-दक्षिणमें ३० मीट तथा चौड़ाई ८१३ वर्ग- सराहनिम्बी (सं० स्त्री० ) परभोज्य शिस्यो। मील। इस सामरतराज्यका दक्षिण और पूर्वभाग वराहगिला (स. स्त्री०) एक विचित्र पवित्र शिला जो पर्वतमय है तथा रन्धिवापुर, दुधिया, उमारिया, इधेली, हिमालय के शिखर पर है। कायदप्तिला, शागतला और राजगढ़ नामक ७ उप- बराहक ( स० पु०) शिव । विभामि यह विभक्त है । ये मम उपविभाग तथा पूर्व- वराहशेल (सं० पु० ) एक पर्वतका नाम । कथित पर्जनका अधिकाश स्थान जङ्गलावृत है। यहाँका वराहसंहिता (म० स्त्री०) १ वराहमिहिर-विरचित ज्योनि जलवायु अच्छा नद्दा है, इस कारण लोगोंको अक्सर ग्रन्थभेद, वृहत्संहिता। २ श्रीकृष्णकी वृन्दावनलीला रोग हुआ करता है। वनभागमें शालवृक्ष है। यहाँको शापक एक पुस्तक प्रधान उपज उडद और तेलहन अनाज है। वराहस्वामिन् ( स० पु० ) पौराणिक राजभेद । ___यहाके सरदार बीहानवंशीय राजपूत है। ११४४ वराहाङ्गी (स० स्त्री०) क्षु द्रदन्ती । ई में मुसलमान सेनाले भगाये जाने पर उन्होंने चम्पा- वराहादि (सं० पु० ) वराहपर्वत । नेर दुर्गको पटना किया। यहां इन्होंने करीय ढाई-सी वराहावतार (सं० पु०) विष्णुका एक अवतार । वर्ग तक राज्य किया। पीछे १४८४ १०में गुर्जरपति मह. मराह देखो। म्मद बैगाडासे राज्यच्युन होने पर वे वनविभागमें चले चराहाश्व ( स० पु०) एक दैत्यका नाम । गये। आसिर एक बसने छोटे उदयपुरमें और दूसरेने वराहिका ( स० स्त्री० ) कपिकच्छु, केवाच । बरिया राजपाट स्थापन किया। १८०३ ईमे सिन्देराज- वराही (सं० स्त्री० ) वराहो मक्षकत्वेनाम्त्यस्येति वराह के विरुद्ध सहायता करनेसे यहांके सामन्त अगरेजोंके अच गौरादित्वात् डोप् । १ भद्रमुस्ता, नागरमोथा। विशेष अनुग्रह भाजन हुए। इस प्रत्युपकारमे अंगरेज २ शूकरकन्द, वाराहीकन्द । ३ अश्वगन्धा। ४ एफ गवर्मेएटने वरियामील सेनादलको रक्षाके लिये सरदार प्रकारका पक्षी जो गोरैया बरावर और काले रंगका दो मासिक १८८०) २० देने की व्यवस्था कर दी। यहाके होता है । ५ शून, सभरी। ६ वराही देखा। सामन्तराज देवगढ वरिया महारावल कहलाते है। वराहु ( म० वि० ) १ प्रधान शन का घानक। २ उत्तम वर्तमान सामन्तराज अङ्करेज गवर्मेण्टको वार्षिक वृष्ट्य दव हन्ता 1 ३ हविर्भक्षयिता। ६३३० २० कर देते है। बडे लड़के ही पितृसम्पत्ति के वरिक-एक प्राचीन जाति। एकमात्र अधिकारी है , किन्तु गोद लेनेका राजाको अशि वरितृ (सं०नि०) १ भाच्छादनकारी, ढकनेवाला | कार नही हे । राजाकी सैन्यसंख्या २६३ है। उन्हें सर- २ पसंद करनेवाला। कारकी ओरस १०८ सलामी तोपें मिलती है। राजा वरिन् (म० पु. ली०) विश्वेदेवादिके अन्तर्गत एक देवता । अपराधीको प्राणदण्ड भी दे सकते हैं, इसमें उन्हे (भारत पालिटिकल एजेण्टसे सलाह नही लेनी पड़ती। राजाके वग्मिन् ( स० वि०) १ विम्तृन, ल वा चौडा १२ वरतम, | खर्चासे १५ विद्यालय और १ चिकित्सालय परिचालित Jष्ट, उत्कृष्ट, महत्वयुक्त, वरिष्ट । होने हैं। गुजरातसे मालव तक जो सडक गई है, उसका