पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६२१

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'६३२ वर्गकर्मन्-वर्गमूल कर निम्नोक्त प्रकारको अङ्कफल सिद्ध होता है। उक्त वर्गप्रशंसिन ( स० वि०) अपने अपने दलको प्रशंसा दोनों राशिका गुणनफल २०' है। उसका दूना ४० होता |फरनेवाला। - इ। उनमेसे प्रत्येक खण्डको वर्गफल समष्टि है- वर्गफल (सं० क्लो०) वह गुणनफल जो दो समान राशियों- ४४४=१६ , ५४५= २५ , १६+२५ - ४१; के घातमे प्राप्त हो, वह अंक जो किसी अकको उसो अतएव ४०५४१ = मिलनेसे ८१ होता है। वहीं वर्ग | अंकके साथ गुणा करनेसे आवे। जैसे-५का वर्गमूल मूलका वर्गफल है। इसी प्रकार १४ का खण्ड ६ और २५ होता है। ८ है। इसके गुणनफल ४८ को दोगुना करनेसे वर्गमूल (सं० क्लो) वर्गस्य समानाव्यस्य मूल "१६ हाता है। उनके प्रत्येक खण्डके वर्गफलंकी समष्टि आद्याका किसो वर्गाङ्कका वह अ क जिसे यदि उसीसे ३६+६४-१०० है। दोनों को मिलानेसे ६६ +१०० = गुणन करें, तो गुणन वही वर्गाङ्क हो । जैसे--२ वर्गमूल १६ होता है, अथवा १० ओर ४= १४ राशिका खण्ड |- ४ का है और ३ वर्गमूल का।:, .. मान कर उक्त प्रयासे हिसाच 'करनेसे यहो फल| अगरेजों में इसे Square root कहते हैं। किसी निकलेगा। सख्याका वर्गमूल इस /> चिह्नसे प्रकट किया जाता है। दूसरा उपाय-२६७ राशिम तोन घटा कर जो यह चिह्न उसके पहले रखा जाता है। ; . घटावफल होगा उस २६४४३०० द्वारा गुणा करनेसे - उस सख्याको जिसका वर्गमूल पूर्णाङ्क राशि वा ८८२०० गुणनफल होता है। पीछे उसमे पूर्वोत्यक्त ३ | भिन्न द्वारा ठीक प्रकट किया जा सके ।पूर्ण वर्ग कहते सरयाका वर्गफल : योग करनेसे ८८२०९ वर्गफल पाया है। इस बात पर ध्यान रखना चाहिये, कि जिस सख्या. जाता है। इसी नियमसे सभी राशिका वर्गफल । के अन्तमें २ वा ३ वा ७ वा ८ हों वह संख्या पूर्णाङ्क हो निकाला जा सकता है। वा दशमलव, वह पूर्णवर्ग नहीं होगी। (स्त्रा० ) ८ अप्सरा विशेष । 'यह अप्सरा मुनिके जव किसो पूर्णाङ्क राशिका, जो पूर्णवर्ग है वर्गमूल शापसे ग्राह हो गई थी। पाण्डुपुत्र अर्जुनसे इसका २०से अधिक न हो, तो उसको गुणनपाटी द्वारा जान बारा

.. .|--सकते हैं ; जैसे-पाटोसे हम जानते हैं, कि ८१ का वर्ग-

'विस्तृत विवरण महाभारतके १११२७ अध्यायमें देखा।। - मूल-६ है ; १६६ का १३ है , परन्तु एक नियम है जिसके वर्गमन् (स' क्लो० ) गणितोक्त वर्गफलनिर्णायक अड़ द्वारा किसी सख्याका जिसमें २से अधिक अङ्क हों वर्ग- प्रक्रिया समाधानकार्य। ' मूल निकाल सकते हैं। . . ! . - । । वर्गचर (सं० पु०) पाठोनमत्स्य, पढना या पहिना : अव कल्पना करो, कि हमको ३०३६ का वर्गमूल मछली। निकालना होता है। प्रथम इकाईके अङ्कस आरम्भ करके वर्गधन (स० क्ली० ) किसी वर्गराशिका' घनफल । प्रत्येक दूसरे अङ्कके ऊपर विन्दु रखते जाओ, इस प्रकार वर्ग धनधात ( स० पु० ) अर्द्धशास्त्रोक्त राशिका पांचवां | सख्याको दो दो अटोंके अंशोंमें वांट लो। वर्ग पात ( Fifth polier')| • ३१३६ (५६ - ----- वर्गणा (स. स्त्रो०) गुणन,'घात। (Sultiplication); वर्गपद (स० लो०) वह मक जिसके घातसे कोई वर्गा| - ..१०६) ६३६ . , . , . . . यना हो, वर्गमूल । (Square-root). -६३६.--- 1. । वर्गपाल ( स० पु०) दलरक्षक, यात्रियोंका नायक! ... फिर यह विदित होता है, कि सबसे बड़ी संख्या ५० है वर्गप्रकृति ( स० स्त्री० ) गणितके अनुसार अप्रक्रिया- 'जिसका वर्ग पहले अशमे सम्मिलित है, यह वर्गमूलका विशेष । ( an affected square in arithmatic) पहला अड्डू है, इस ५ के वर्ग २५ को पहले अ'शमेसे वर्गप्रथम १) कादि वर्गका प्रथा घटीमो और शेप६ - .:- म वणे।

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