पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६४४

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वर्द्धन-बदनीय ६५६ पर नारल तया दुध चढ़ा कर ब्राह्मणों को कुछ खाद्य | रास्ता चला गया है। इस रास्लेसे दो सौ गज दूर पर पदाचा दान करते हैं। सात तण पिसूचिका रोगमे | एक प्राचीन सरोवर है। मृत्यु होने पर वे लोग गरको गाडते हैं अयमा पदीक नरनित राज्यको पूर्वी मीमाको रक्षा करने के लिये जलम बहा देत है। पिगमें क्मिी मात्मीय धा स्वजन | १७६३ इम महाराष्ट्र केशरा शिवाजाने यह दुर्ग बनवाया को मृत्यु होन पर ये लोग कुशपुतरिका बना कर उसे । था। १८००१०म महादजी सिद्यिान २५०० मेना ले हो जाते हैं। पर प्रतिनिधिस यह दुर्ग छीन लिया। इस समय विहारक वदा लोग लाचरणाय हैं। ये राग उन मिदियाझी बहन सोवत घोडपडे को सोने कुछ अधिक महाराप, यन्दी गारहया तथा पापीर प्रभृति प्राम्य उपर न मचाया। १८०३ ६०र्म दुर्गाध्यक्ष बलरत राय देवताओंका पूना करते हैं। ग्याला पोहरी हनाम' कमाने यहा था पर जेसाइ तिर दीक साथ लडार इत्यादिकी तरह ये लोग मो समाजमें धरावर आमन छेड दो। १८०५०में फतेसि हमानने दुर्ग पर आम प्राप्त करत है।काठक कामके अलावे लोग खेता दारी मण किया सार साधर्म बहुत घोडे ले गये। उनके फेके भी करते हैं। हुप गोलका चिह मान भी दुर्गक फाटककी छत पर वर्द्धन ( स ० वि० ) पद्धं यतीति ध न यादित्वात् -यु,' दिखाई पड़ता है। पदा पद्ध ते तच्छोल इति युध पूर्ती ( भनुदात्त तश्चति। १८०६ ३०में यस तगढको रडाइके बाद वापू गोखर पा २२।१४६ ) इति युच । १ पद्धि णु, वढनेश ठा। पर दुग सौंपा गया। उौने १८११ १० ता उसको २ वृद्धि, उन्नति । (पु०१३घढाना । ४ छेदन काटना, देखरेख की, पीछे पेशवाने उसका भार अपा हाथ लिया। छालना तराशना। ५पूरण पूति। १८१८६०में विना पिसी झमटके हो यह दुभध दुग पनकोर (पद्धनकुटी)-वगुडा मिलान्तर्गत एक नमा । घरिश सरकारके मातहतमें चला गया। यारो। यह गक्षा० २५ ८२५ उ० तथा दे० ८६ थाज कल दुर्गको अवस्था वही हो पराश हो गह २८ पू०पे मध्य गोविन्दपुरके निकट करतोया नदीफे। है। इसके अधिकाश भवन ही वसहरों में परिणत हो किनारे मस्थित है। अभी यह राजयाटो मम विख्यात गये हैं। है। कोहपाहते हैं, कि यहा पर समय प्राचीन पौण्ड । पद्धन राज्यको राजधानी था। सम्त भविष्यप्रसपएड २ मातारा निलेमें महादेव शैलमालाये पूर्या शमें प मनाम रद्ध नकोट निवृत्ति दे अतर्गन । यहा उन्नत एक शात्रा । यह बटार मोलम मदनान्दन प्राचीन राजधानीका सहर दिग्बाद पता है। इस समय गृह पटान्त परीव १६ मील विस्तृत है। इस विस्तृत भी यद्धनकोटम एस यारे द्रायम्घ राजय श विद्यमान शैग्माताके अपर उत्तरमें पर्ट नगद रादके निकट हैं। पर समय सुबिस्तीण पर्व गेराज्य जिनक मदानगढ तथा सदाशिवगढमे १२ मोर दक्षिण अधिकारम था, निहलायस अधि ० रातस्य देना | म गढ प्रयस्थित है। पडता या भाज उनसरी अयम्या या दो मोनीय हो घई नपुरि ( स० पु०) प्रसिद अनाचार्य। गह है, वो सौ रुपये से अधिक गजन्य देना नहीं पता। । यनिका (स. स्त्रा०) यह पान वा यातन जिममें घनगड-१वम्बर प्रदेशके सातारा जिलातर्गत पर यज्ञादिका परिव जर रखा जाता है। गिरिदुग! पद कोटेगा और गाय उपयिमा सामाघद्धनी (स. खा०) । जलपासपिशव, जर मनेर ५ बीच महादय शैलमाला प शाखाफे अपर मातारा वरतन । २ सम्मानो माडू । ३ सनास पातयिशप, हरसमोर उत्तर पूममें प्रयस्थित है। पमाइलु। ___ मटाय या पूर्य हो पर एक कुस होता हुआ इस गढ पद नाय (म.नि.) पर मनीपर । पद्धनयोग्य, पर पढना होता है। इसफ ममाप हा कर मातारा पुरग्दर बढाद लायक ।