पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६४५

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वई पान "ज्ञातया वर्द्ध नीयात्तैर्य इच्छत्वात्मनः शुभम् ।" क्रमांच्च निग्न पार्वत्य ढालू भूमिसे तथा जंगलाने पूर्ण (उद्योगप०) है। इस वनभागमे नेकडे, चोने तथा अन्यान्य हिंम्र बद्ध मान (सं० पु०) वईते इति वृध वृद्धी शानच ।। जन्तुओं का वाम है। दूसरे दूसरे स्थान श्यामल शाम्य- एरण्डवृक्ष, रेडीका पेड। २ पशुभेद। शराय । ४ विणु। क्षेत्रों में परिपूर्ण हैं। बीच बीच ताल, आम्र, फदली ५ जिनविशेष, पर्याय-चोर, वरमतीर्थकृत, महा । तथा बांसवन समाच्छन्न बह बडे प्राम, प्रकृतिको बीर, देवार्या ज्ञातनन्दन | महावीर देखो । ६ धनी मनुष्यों निर्जननाको बिग्नि कर जनकोलाहलले अपने अपने के घर । वृहन्म हितामे लिखा है, कि इस घरका दर । समीपवत्तों स्थानोंको परिपूर्ण करते हैं। किमी वाजा दक्षिणकी ओर नहीं बनाना चाहिये। ७ भद्राश्व- किमी स्थानसे हो कर धलकिशोर वा दारिकेश्वर, वर्गके अन्तर्गत कुलपर्व नविशेष । भद्राश्यवर्ग के मात दामोदर, अजय, यारी, याँका प्रभृति नदियाँ मन्द मन्द कुलपर्वत है, 'जिनमेसे वर्द्धमान' मानयाँ कुलपर्वत है। चलती, स्तराती, इठलाती बचउमलिया भागोरधीमे ८ मिट्टीका प्याला, सकोरा । पक वर्णवृत्त । इमरे आ मिली हैं। इनके अतिरिक्त बराकर नदी इस जिले के चारों चरणों में वर्गों की संख्या भिन्न होती है अर्थात् २४, उत्तरपश्चिमांश दामोदग्नदले ना मिली है, पहेन बाई १३, १८ और १५ । (त्रि०) १० घुद्धिविशिष्ट, वर्द्धन- दामोदर तथा बाकाको मिलाती है। दक्षिणमें 'काना' शीव, बटनेवाला । ११ वढना हुआ, जो वढता जा नदी प्रवाहित है। जा रहा हो। इम नग्हमे नदीमालाममाच्छन होने पवं विस्तीर्ण वईमान-बंगाल के छ'टा लाटके माननाधीन पक विभाग, शामल प्रान्तर के बीच वीचमे ताल पक्षरिमोनिन यह पक कमिश्नर के अधीन परिचालित होता है। यह । दिग्वियोंके रहने के कारण यहा येती करने में बड़ी सुविधा अक्ष'० २१३६ मे ले कर २४३५ उ० नया देशा० ८६ होता है। इन मय नदियों के द्वारा जालना, काटोबा, ३३ ले ले का ८८.३० पू० ना विस्तृत है। वर्द्धमान, टॉइदाट, भावसिंह, मिन्लापुर, उपणपुर प्रभृति गंगातीर. हुगली, वडा, मेदिन'पुर, दाडा और बीरभूम जिले को ले वत्तों प्रसिद्ध नगगेम व्यापार होता है। इन सब बन्दर जर यह विभाग गटिन हुआ है। इनको उत्तरी सीमा पर गाहों द्वारा लवण, वस्त्र तथा पाटके व्यवसाय हा अधिक संथाल परगना और मुशिदाबाट पूर्व में नदीया और २४ : तर होते है । रानागज उपविभागमे छोयला, लोहा, परगना जिला या गंगानदी, दक्षिणमे बलोपनागर और पत्थरफा चूना प्रभृति यथेट पाया जाता है। वालेश्वर जिला तथा पश्चिममें मयूरभज राय एव सिंह- रानीगज और कोयला दे। भूम और मानभूम जिले है। इस विभाग २७ शहर पौरायिका और २४८३६ गांव लगते है। स्वाष्टीय १६ वी शताब्दीमे लिने गये ब्रह्मनड नामक वई मन-चगालके अन्तर्गन पक जिला। यइ लाट- । संस्कृत भौगोलिक ग्रन्थमें लिखा है- ही देख रेख में है। यह मा० २२.१६ से ले कर २३ वर्द्धमान मडलका विस्तार २० योजन है। यहां ५: उ० तथा देशा० ८६४८ ले ले कर ८८२५ पृ० चा वर्गों के लोग खेती करते हैं। कलि युगके ४४०० मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण २६८६ वर्गमील है। इस वर्ग बीत जाने पर दामादरके निकट हेमसिंह नामक एक जिलेके उत्तरमे वीरभूम, सन्थाल परगना और मुर्शिदा प्रबल पगान्त राजा होंगे, उनके मात राजमहल होंगे। बाट पूर्वामे मागीरथी तीरवत्तों नदीया जिला, दक्षिणमे | इनके पुत्रका नाम वीरसिह होगा। ये अपने वाहुवलसे हुगलो, मेदिनीपुर और बांकुडा जिला एव पश्चिममे मान ताम्रलिप्त, कर्णदुर्ग, वरदाभूमि, मुह्मदेश तथा वीरदेश भृम है। जनसख्या १५३२४७५ है। निजायत्त करेंगे। इस वीरसिंहके चार पुत्र और विद्या ___ इस जिलेको भूमि प्रायः सर्वत्र ही समतल है, केवल नामक एक इन्या होंगी। कन्या प्रतिज्ञा करेगी कि,जो संथाल परगनाके समीपवती उत्तर पश्चिम कोणान पुरुष उसे शास्त्रार्थमें परास्त करेगा, उसीके साथ वह