पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६४६

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वद्ध पान विवाह करेगा। इस मावादके काचीपुर पहुचो पर काचापुरमें गुणसिधु नामक एक राजा राज करते यहाके राना गुणमि धुके पुन सुदर यद्धमान आयेंगे। थे। उनके पुर का नाम था सुदर। सुदर एक समय वेदामोदरके तीर एफ मालोज घर आश्रय लेगे। कुटनो यद्धमान मापे। वर्तमानके राजा वीरसिहका विधा मानिनको सहायताले नपोबलम एक सुरंग खोद कर । नामक एक परमा सुन्दरी दुहिता यो । विद्याने उपनिषद ये विद्याको हरण करेंगे। कवर कालीीबीके प्रसादमे । शास्त्रको छोड और सभी शास्त्रों में अच्छा ख्याति प्रस सुर यहासे सुरपित हो घर लौटेंगे। गोडादिक लोग की थी। मुदरने रात्रिके समय सुरग द्वारा ना पर उसो रियायुगके चरिवा न करेंगे। मब्रह्मखहमें | धि के साथ विवाह किया। विद्या शास्त्र विचारम रिखी हानीसे ऐमा जान पड़ता है किसष्टीय १६, सुदरसे परास्त हुए। इसके बाद सुदने उसके माथ घी तादीने पहले दो विधामु दरक गान प्रारित थे। मम्मोग किया। हे नृपवर इमरिया सुदरका उत्तांत उस समय भी शेमान राजय का अभ्युदय नहीं। 'चौरपर्चाशत्' प्रत्यमें बहुत बढा चढा पर वर्णन किया हुमा था। गया है। ब्रह्मखडको तरह प्राचीन सम्रन प्रथ दिग्धजय राजा अघोरफे पुत्रका नाम श्रीमान् चागद था। प्रमें भी हम लोग विद्यासुदर तथा पद्धमानका ये भी राजा थे। गणेशपुराणमें इनका विस्तृत वर्णन वितरण इस तरह पात है। लिपिवद्ध है। ___ अनयनदक दक्षिण पिलायनीक उत्तरको ओर श्रीमान कातिचद सूचार शी राजा थे। ये कुशके गगामे पश्मिम पर दारिकता पूर्व एF अत्यात सुदर चशमें उत्पन्न हुए थे। कातिचन्द्र एक समय यर्द्धमान साधारणमोग्य भूमाग है । हे राजन् । इम भूभागा नाम का मन करते थे। वर्द्धमान है । इम वर्म मान देशसे होकर कितना हो कुश द्वारा सुकन्याके गर्भसे अतिपि नामक एक पुन नदरिया प्रवाहित होती हैं। इसको लम्बाइ ११ योजन पर चीनाइ ८ योनन है। इस दतके मध्य हो कर पैदा हुमा। गतिथि द्वारा गुराके गर्भमे महायलो पुराका म हुआ । अमोघवीर्य पुउरीक द्वारा दामोदर नदी प्रवाहित होती है। इसके पूर्व की ओर उल पाके गर्भ मे क्षेमधर्मा नामक एक पुत्र उत्पन्न हुआ। नितनी मदिया है उनमें मुडे या यकुला तथा मरम्बता शेमधर्मा योगी पुरुष थे। इहोंने ए' मुनिस पर प्रान ये तीन प्रधान । इनके अति ग्न इसके क्षिण पिया था। इस वरप्रभारसे उनकी पत्नी रतियाके की ओर अनेकों नदियां बहती है। तृणधा यादि भेदसे घेर्श नाम पर पुत हुआ। धम द्वार येदानाक १७ प्रकारके धान इम नेगमें उप न होते हैं । रन श्वेत काम हुआ। इन मयोंको नमभूमि बद्धमान है। तथा पाटलरण कपास यहा वहत वैग होती है। इसके देवानीक द्वारा कुल्लाके गम पारिनान नाम अगरे एक प्रकारके इनको खेती यहा हर पर अतुम एर पुत्र 'उत्पन हुमा । ये राज कार्य में चतुर १ होती है। कहने अभिप्राय यह है, जिसमा वस्तुओं युद्धविद्यामें निपुण धे। इनका नाम घट्टशैरस्थक को यदा वृद्धि मयाम् उत्पत्ति होता है, इसीलिये चकी नदीके तटवत्ती स्थानमें हुआ था। पारिजातले मानाम मान पडा है। दामोदरका र विष्णुरे घद कर प्रतापी राना उम समय चहा और कोई न था। पादपाये सम्भून है। सुतरा दामोदर नदाके दोनों पाश्यव्यापी पद्ध'मानके अधिगमियॉश विभिन्न देश इम पारिजात द्वारा पजना गर्मस नाग नाATRE वासा बहुत प्रासा करत है। पुन पैदा हुआ। निभोंकचित्त न तुग हितालकाननम यघोर नामक पक क्षत्रिय राजा पद्ध मानवाम्गे है। नातु ग द्वारा मारिपार गम से मपुत्र . प्रजामों पर धर्मानुमार शाम करते थे। रापन् । मोलावे गर्भसे रिस्पति उत्पme परिक चार हजार वर्ष बीत जाने पर इमाशीय राना। । सयोगमे दो बडे पारसिहके घरों पर पिचिन घटना घग। के बाद पत्रनाम, रयारि, Vol 160