पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६५०

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वर्तमान शिजित मम्पत्ति तथा फतहपुर पागनका अधिार मिल उनकी दो पत्नियां थी, जितु दोनों ही वाया था। कीर्तिवर अत्यात युद्धकुमार थे। उदोन ! ई०में चित्रसेनकी मृत्यु हुई। फालनामें उनका निर्माण यगा उके नगाव यदादुरके मानानुमार विष्णुपुरक राजा पिया हुआ देवालय यर्सगान है। इनके TrEARालक के साथ मिल कर काटोपास दुद्दान्त मरहट्ठोंको निशार कितने ही धनुप अमो तक राजमहलम यर्शमान है। उन पाहर क्यिा था । बोसिचद्र वादशाह द्वारा रानाका' सबों पर पारसी भापान उनका नाम सोदा माहै। आधिन प्राप्त करने पर भी देश में महारान नामसे हा राजा चित्रसेनको मृत्यु के बाद उनक चचा मित्रसन विधान थे। प्राधर्ममगल कायम कवियर घनरामने म पुन तिलकचन्द्र वर्दमामक राजा हुए। सन १९५० उन्हे महाराज कह कर ही उल्लेख किया है। साल १२ मनदणको महाराज तिलोकरदका जम हुमा ___यगा नयार बहादुर यहा कात्तिवद्रको यो यार होने १७४४१०२४ जुलुस जमादिपल मन्थल जन थी। एक बार उनकी माताका श्राभेनयात्राके ममय ताराखका दिलावर अबुल फतेह नसबदोन महम्मदशाह वगेभ्यरा उनिया प्रदेशमा पीजदारी नया कोतवालोको वादगाहस पद्धमान प्रभृति जमींदारीकी राजोपाधिफे उनका देय रेन अच्छी तरह गनेको यात्रा दी थी। साथ प्रथम सनद प्राप्त को। पीछे अनुठ सर मुना यम् मानके पास पाचननगर मामा जो महा उद्दीना भइमदा बादशाह गाजाने ७ जुलुस ७ रजव ममगिाला जनपनका धमविशेष समान है कार्राि ताराको पुरा एक दानपत्र प्राप्त किया। दिल्लीश्वर मान् कारिप ने उसका स्थान दिया था। १७४० । आजमगार पादशाहम ७ जुलुम २, महरम नाराक्ष १०म कोरिन्द्रने परलोक्शी याला का। उनक हाथा, को एक हागा उपहार मिला। अनुपम तयार अभी ना राजकोषमें यत्नपूक रस्त्री। है। उदे लोग कार्शिचन्द्रका तेगा' कहते हैं। कीर्सि दिल्लाश्यर शाह मालम पादशादन फिदयो घड़का मनको कारािया अमी तक यर्द्धमान रानवश । वास नामसे पर पत्र पर उनके प्रधान सेनापतिने (४ मुखो उन्मल बना रही हैं। हजार जात तथा २ हजार सवार) चार मार जात तथा सिग्द्रप परलो घाम वरने पर डाफे पुर्व राजा यहादुरके प्रितायफ साथ प शामनपन दिया सिन रायन पर्वमानको जमींदारा प्राप्त की। उ होन, था। पिदयो सामफे यधर्म बादशाहक ख स कम्मचारी, यादगाहस परगना मम्घाट, मारसा ब्राह्मणभूमि इस तरहका सम्मान राज्य प्रधान कमावारोक मिया प्रति कर एक अमी दारी प्राप्त की। दिलावर अयुल और रिसाको प्राप्त नहीं होता था पप गरेके दूसरे फतेह नसबहान् महम्मदाबादशाहद्वारा १५ सवाल किमी राजान भी उन उपाधि प्राप्त को धोएपिडया १२ जुलुस तारीको उह राजाकी उपाधि तथा 'प'चे मनाक तदानी तन गयगर जेनरल बहादुर 'फिरनी विरमन' प्राप्त हुइ पय एक जाडा मुवामा मिली। इस खास' शम व्यवहार करत थेसक मापसापति समय बोसिचद् जोषित थे। चदशोगपत तथा झालरदार पोलीमा मित्री पो। उक्त यादगाइफ २५ये या राजालम २० रम। फिर दिल्लीश्रम ( १७६८०) ६ जुलम प रमजान जान तारोको ,१७४०१०) चिवसेनको रानाको उपाधि को ५ हजार जान, ३ हमार सपार(पचमार जात प साप साय थाले पद्धं मानानमो दारोकी मनद महाराजाधिराम पिताधतोपानवारा तया पतासाप्राप्ति प्राप्त । १७४२ में पुन: दिलीभ्यरफ यहाँस छव, ग्यासमा नकारा, महानाको घिरमोंक साथ एक सनद । का पन माप्त हुमाग भी मिली। इम ममय भी कीर्शिद्र जारित थे। १७९५ में एरिया फरानीक तवानीन्तन rस नाम राजा चित्रमनको सब मिल कर १२ माम । गर्गर मि० हेनरी रिसधेट ने विलो सम्राटक मार्दा १२ तथा मनद प्राप्त हुई थी। पेयापित २२७०४७२) नुमार महाराम निरूपचन्द्रशे पर मिल मत मा पर रानस्य दिया करते थे। हामी प्रदान किया। पररासीक मद्धक समय तिरक ro 1 167