पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६५२

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बद्धमान फा थी, थत महाराज प्रतापच को अपस्था पुरो प्राप्त | दयीका पाणिग्रहण किया। महाराणोके गभसे मनानादि होने पर उन्होंने रहें युवराजके पद पर ममिपित किया। न होनके कारण १८६९ ६०को वीं मानाको महाराजने महारान प्रतापच अत्यात बुद्धिमान तथा कामपट्ट अपने साला लाला वशगोपालचन्द्र बाबूब' ज्येष्ठ पुत्रको थे। राज्यमार पड़ने पर उन्होंने विशेष यत्नसे ट्यौं । दसपुत प्राण करके उनका नाम कुमार आफतायचन्द्र आइन प्रणयन करके अपने राज्यको रक्षा करने लगे। महतार बहादुर रखा। सन १२२८ मालके पौष मासमें २६ वर्गको अपम्या | १८३६ 10 में महारानने पुन गार जेनरल वहादुर महारान मनापच टने परलोक का थाना की। इसी प्रताप | स खिलमत प्राप्त की। चको ले कर ही जारी प्रतापचन्द्रको सृष्टि डा। महा १८५९१०में स यारोंके विद्रोहके ममय पर १८५७ रान तेनचन्द्र बहादुर पुवक परलोक गमन करनेके उप में सिपाहा विद्रोहके ममय महागजने गारमेष्टको त पुन: राजकार्य सम्भालने लगे। इहोंने श्योलक घडो सहायता की । इमलिये गयरमेएटने इनकी भरि पगणच दापूरके पुत्र सुनीलाल दावूकी दताव | भूरि प्रशमा को थी। प्रण करके उनका नाम महतारचन्द्र रमा। तेजचद्रको १८६४ ० महतावचन्दने भारतको व्यवस्थापक अनेकी कोत्तियोंसे बर्द्धमान राजवश समुज्ज्यल हो ममा सदस्य पद प्राप्त किया। इस देश वासियो रहा है। सन् १२३६ सालके भाद्रमासम महाराज त मध्यरहोंने हा सबसे पहले इस पदको माप्ति की थी। च परक्यासी हुए। उन पदक भारश्यकीय व्ययके रिये गामेएटमेहे १८२०६०की १७वीं नवम्याको महाराज महतायचद्र १० सहस्र रुपये प्रति वर्ष मिलनेका नियम ठोक हुआ। वहादुरका जम हुआ था। १८२७ १०को ११यो फरवरी महाराजने तीन वर्ष तर उक्त पर पर समासीन रह कर को तेजचद्र बहादुरफे परलोकशामा होने पर डाका पवार ३० महन्न रुपये प्राप्त दिये। उन सब रुपयोंको पत्नी महाराणी कमलकुमारी ( पराणचन्द्र कापुरको रोने अलोपुरम पशुशाला निर्माण करनेके लिपे दान कर भगिनी) ने पुना राजोपाधि प्राप्तिके लिये भारतब दिया। म तदानीन्तन गपर्नर जेनरल लाई विलियय चेटिक १८६६ १०में भीषण दुमिया ममय महाराजका ससा बहादुरके पास एक पत्र लिखा। थोडे हो समयके अदर धारण दानशीलता देख कर भारतयामि तदानान्तन ३ हो। ( १८३२ इ० ३० अगस्त) गवरनर जेनरल वहा । गार जेनरल सर जान लारेसने अपने हायमे एक पत्र दुरस महाराजाधिराजका खिताब तथा हिठयत प्राप्त रिय र अत्यन्त धन्यवाद दिया। १८६८१०में मदाराप का। उनकी नापालिगायस्याम उनकी माता महाराणी फो घशानुकमसे महामाया सम्राशीके राजचिट्ठ कमाकुमारी तथा पराणचन्द्र कापुर उनके अभिभावक ( Armour and supportere) धारण करनेकी क्षमता बरुव राज्याय को दखमाल करते थे। १८२६०को प्राप्त हुन यी फरवराको महतावच ने पहली शादी का। उनकी १८६६ इ०में पद मान प्रदेशमें भयर मरेरिया मदा पहली स्त्रीक गर्भमेशकुमारी श्रीमती धादेपी दयोकी मारीक प्रादुर्भार होने पर उसके प्रतिकारक रिप बङ्गाल पैदाइश हुई। दुवका विषय है, कि कुमारीक जम गयामेएटको ५० सहन रुपये देकर पद्धमान महाराज सात दिन बाद ही महाराणी परलोश्वामिना हुआ। गय मेएटके घयवाद मानन हुए। शैशवकालम हा मातृहाना राजकुमारो विवाहक कुछ १८७००म महामाया सम्रासाफ पुव इयूक आय हो दिन दाद विधया हो गइ। मन्. १५९२ इल्में सालक एडिनरावद्ध मान राजभवन पदार्पण कर पा दूमर आपातको राजकुमारान गला अवनीनाथ मेहरा | मानाधिपतिको सम्मानित पिया का। या। दत्तकपुत्र प्रहण किया । १८४४ ६०ी २४या १८७४ ६०म मापण दुर्भिक्षक समय महाराजो अपने जूमको महतायवद्र बहादुर धामतो नारायणकुमागे । वस चु चडा, पालना तया वईमानक बुभिक्षपीडित