पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६५३

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वद्ध मान लोगोंगे मन पत्र प्रदान कर समय दोनोंकी जीवन , समय तक लिये कोर्ट माय वार्ड के अधीन न घरक, रक्षा की थी। ग्रहालय तत्कालीन लेफ्टिनेण्ट गवग्नर जिस तरह गयकायां चलता था, उसी तरह चलाने की मर जार्ज काम्बेल बहादुरने स्वयं इन सब अन्नवस्त्रोको आठा प्रदान की। दान करने देख कर वदमान-नरेशकी दानपरायणनाको | ___ महाराज आफनावचन्दने भी राजकाम म्वय भूरि भूरि प्रगमा भरते हुए अपने हाथमे एक पत्र लिखा हरनक्षेप न फरक राजमन्ती बनविद्दारी कापूर मायके था। १८७७ ई०में मद्राज प्रदेशके दुर्भािक्षके लिये बई. ऊपर ही मारे गाउयकार्यकर मार मौर ना था । .८८१ मान नरेशने १० महम्र रुपये प्रदान किये थे। दमै आफनाद यहादुरको महासमारोह के माथ गवर १८७७ ई०मे दिल्ली दरवारले बर्द्धमानपतिने H1s मेएटने चिलमन महिन राज-मनद प्रान । उन्होंने __Highness की उपाधि पर्व आजीवन सम्मान म्यरूप १३ यति बप कार तक राज्य किया था, किन्तु इमी याप तो प्राप्त की। १८७८ ई०में बर्द्धमानके महागने मम में ही उन्होंने कई एक महान् कीर्तियां मयापन कर भारत-सम्राज्ञीको एक प्रम्तग्मयी प्रतिमूर्ति कलकत्ते के स देनकी यडी मलाई की थी। १८८१ मे दार्जिलिल म्यूजियममे स्थापन को। मे यूरोपीय बातम्य चिरिमालय स्थापित होने पर उसकी बमान नथा कालनाके अवैतनिक विद्यालय, दानथ्य । नदायनासे लिये उन्होंने पद मुष्ट १० हजार रुपये नया चिकित्सालय, बालिका विद्यालय प्रभृति बहुत सी देश चई मान नगग्में जठकी कल तयार करने के लिये बड़े हितैपिगी कीतियां स्थापन कर महनावचन्द्र बहादुर इस या स्थापन कर महनायचन्द्र बहादुर इस मान म्युनिसिपलिटोगो एक मुष्ट १ लाप रुपये प्रदान देशवासियोंकि चिरस्मरणीय हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त किये थे। वे अपनी ननन क्रीन विशाल जमींदारी उडियाम कुजग। __ महाराज महनावचन्द्र बहादुरने जो विद्यालय ग्यापन दुर्ग, मेदनीपुर जिलानर्गन मुजामुटा परगनेमें दो अवैन किया था, उसमें मिर्फ पन्द्रम नपढाई मोतीगी। आफ निक विद्यालय तथा दो दातथ्य चिकित्सालय स्थापन तारचन्दने इस स्कूलको दो श्रेणीय कालेज उन्मोत कर गये है। करके बिना वेतन दिये ही पल० ० की परीक्षा पान मन १९६५ मालमें उन्होंने महर्षि वाल्मीविकृत मूल , ल। पाठ करने की सुविधा कर दी थी। इस कार्यांमे उनके नथा सग्ल टाका महिन गमायण श्व महर्षि वेदव्यास ; ८० हजार रुपये पन हुआ थे। कृत मृल नया व्याया महिन महामारत छा कर जन । साधारणमे बांटना शुरू किया। किन्तु दुःखका विषय है : चे वद्ध मानमें जनमाधारण के लिये पुस्तकालय कि भारत कार्या सम्पूर्ण होने के पहले ही च पालक म्यापन कर गये ६ । म पुस्तकालयकी म्वापना बासी हो गये । सन् १८७६ की ध्वी अफ्तवरको ५६ । ...। करनेमे उनके ६ हजार रुपये व्यय हुप ये । इन मद दीर. चाकी अयम्बा मागलपुर नगरमे उनकी मृत्यु हुई। । दिनैपी कार्णको कर गवर्गमटरे उन्हें न हो उन्नीम वाको अवस्थाम महाराजाधिराज आफतार धन्यवाद दिया। महनार बहादुर बईमानके राजमिहासन पर बैठे। उम' संस्कृत शिन्नाकी उन्नदि लिये उन्होंने गवर्चमेंट न्मय उनकी अयम्या छोटी होने के कारण वईमान । छो एक मुष्ट ५ हजार रुपये दान दिये थे। मदतावनन्द गज्य कोर्ट आव बाई के अधीन होनेका प्रस्ताव हुआ, वहादुरके स्मरणार्थ वर्तमान गवर्नमेटने दातव्य किन्तु महाराज मद्दतावन्द बहादुरके गजकार्या ऐसे वित्मिालय तथा चनापीडाप्रस्य रोगियों के वासो. सुप्रदन्यके साथ सम्पन्न होते थे पर्व उनके भ्रानुपुत्र : पयोगी एक गृह निर्माण क्यिा था । महनावचन्द बहादुर नन्कालीन दीवान ई राज वनविहारी कापूर माहेव प्रेमी ने अपने पिताकी पुण्यतम कीर्ति रामायण तथा महा- योग्यता के साथ गज्यक यी परिचालना करने थे, कि भारत सम्पूर्ण मुद्रित र जनसाधरण में बाँट दिया । चगेश्वर मर अस्ला एहेन बहादर, वर्तमान राज्य कुन्छ । सन् १९६१ मालके १ञ्चे चैनको २४ वर्ग की