पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६५६

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वर्तमान ६७१ १८६६ में वर्धमानमें दुमिष पड़ा। इस समय। २३ १४ तथा देशा०८७ ५१ पू०फे मध्य वाका दोके यहा मोटे चावल का भाव १०) २० मनसे ले कर ५०) किनारे अवस्थित है। जनसख्या २५०२५ है, जिनमें हिन्द २० तक हो गया था। को ही सण्या ज्यादा है। यहा तेरका दो ले हैं। वाणिज्य । १८८४६०में यहा पाना कल बनाई गई है। इसक बनाने यहा देगी लोगो उद्योगसे धोती साडी तैयार हो। में दो लाख रुपये खच हुए थे जिसर्म पर लाग महाराज कर कह स्थानगमे भेजी पाती है। सोना, चादी पीतल की ओरमे मिला था। यहा पक कैदयाना है जिसमें सथा कामाके यरसन यथेष्ट तैयार होते हैं । यहाशा जमीन २५६ कैदी रखे जाते हैं । यहाका प्रधान वाणिज्य सुरकी, सूब उपजाऊ है. इसरिपे "म जिलेम परती जमीन दृष्टि, नेल और नेगार है। यहा एक नमानराज कालेज है गोचर नहीं होती। यहा पसल भी अछी उपजतीहै। जिसम नि शुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके अला यहासे चाल, तमा पाट, चीनी व्यण देगा धोती। यहा पर टेकनिकल स्कूठ भी है जिसका पर्च द्विमिटपट का प्रभृति पदार्थ दूसरे दुसरे स्थानों में मेने जाते हैं पव बोडसे चलता है। यहा विलायती पड, विलायती चीजे, लोहे लयण | १८६३ १०से इस शहर में एक अनर्थकर ज्वरका प्रादुभाव गरम ममाला, नारियल तथा असोका तेल दूसरे दूसरे हुआ है। इस मम म्युनिमपलिटो प्रबन्ध हो जानेक स्थानोंसे भारे हैं। कारण धद्धमान शहरका बहुत कुछ उति हुई है। पहले इम जिरे में इष्ट इण्डिया रेटये मेमारी, शक्तिगढ , यहा बर्द्धमान विभागके कमिशार माहव रहा थे। यहां पर्द्धमान कानूजक्सन, पानागढ, दुर्गापुर अ डाल रानी के वर्द्धमान नरेशका सुगृहत् प्रासाद उनक वाये हुए गज मियारसोट, निमत्रा, आसनसोल सोतारामपुर, १०८ शिव मन्दिरे तथा पीरवरहम मसजिदु दपनेयाग्य पराकर, गुमारा तथा मेदिया प्रभृति स्टेशनोंसे ही मधि हैं। १६२४ इ०में शाहजादा खुरम (शाहजदा ) न पर्द्ध काल यस्तुए माती तथा भ जो जाती हैं। रानीगजम मात पर अधिकार जमाया। १६६५ १०में जोमानि हो कम्पनीका एक बडा कारम्बाना है। इसमें पाइप इरा तथा ) घद्धमानाधिपतिको मार पर दुधमान पर अधिकार कर नाना प्रकारको सुदर मुटर चीजे तैयार होती हैं। लिया था। अन्तम वर्धमाका राफुमारावं हायस इस जिलेम घार जे खाने तथा १७ धाने हैं। उनमेंसे। उनकी आयु शेर हुइ, पदुर्धमान जिले क इतिहासमागमें ८ याने सदरके अधाम है, जैसे-बर्द्धमान सादेवगव, | यह वात पहले हा लिखी जा चुकी है। यहा इट इण्डिया ग्वघोष गयना, गागुनसरीमावाद बुयुद्नया मोस, रेल्वेका बड़ा स्टेशन है। यहाका साताभोग तथा मोती ग्राम । ३ थाने रानीगञ्जके अधान हैं जैसे-रानोगम, | चूर प्रमिध है। मासनमाल तथा ककमा। तीन धाने काटोयाके अधीन | वईमान ( मनमान)-उसर भारतमी कामार उप फेनप्राम काटोया तथा मालकोट पच तीन थान कालना त्पका पूर्वा एक सुदोघा उपत्यका। ये दोनों उपत्यमाये अधान जैसकालना पूर्णस्थली और म बेश्वर । पेमय | पक ऊचे पति द्वारा परस्पर यग हैं। यह उत्तर दक्षिण फिर ७१ परगनेम विभत हैं। इनके अलावा १० अस्प प्राय ४० मील रम्या पय चौडाइ प्राय आधा मोल। ताठ है। इमफे चारों सीमामों पर पान श्रेणिया तुपारावृत शिखर ३ उत्त मिलेका मदर महकमा । यह अपा० २२ ५, म स्थित हैं। चारो ओर ऊचे ऊचे पर्वतांक रहने के सले पर २३ ३७३० तथा देशा० ८७ २६ से ले कर कारण इसकी निम्नभूमि तक सूर्य का पिरणे नहीं पहुच ८८ १४ पू. तक विस्तृत है। भूपरिमाण १२६८ यगे | सकतो । यस मान नदी इस पर्वतमालाको पार करता मीन है। यहाकी जनसख्या ६७६४१२ है। महकुमे में एक हुइचद्रमागासे जा मिली है। यहाँ का एक प्राममि बहुत शहर बर्द्धमान और १६८८ गांव लगत हैं। कम लोगोंका वास है। ये लोग पहाँको घोर सदी चदास्त उक्त जिरेका प्रधान नगर मोर सदर। यह भक्षा नहीं कर सकत ।