पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६५७

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बद्ध मान- वर्द्ध मान-स्वनामन्यात बहुत से प्रत्यकर्ता। । फानन्त्र महा। इसके वनानेका नरोका-दही मशफार उसमे वितरके रचयिता ।२क्रियागुप्तक, मिनरावर्णन और यया प्रमाण गुड मिर्च, नोट, पीपर, जोरा इन साझा गणरत्नमहोदधिम्के प्रणेता | इन्होंने १९४०६० में शेपरोक्त चूर्ण मिटाये। उसके बाद अच्छी तरह हायसे घोट। प्रत्यकी एक टीका लिखी थी। सुप्रमिद पण्डित गोविन्द पीछे पके अनारका रस उममे मिला कर उसे कपडे में सूरि इनके गुरु थे । ३ नानाजात्रा निर्णयके रचयिता। छान ले । इस नरह जो महा नैयार किया जाना है, उमीको ४ श्रादप्रदीप के प्रणेता। ५ एक प्राचीन पवि। ६एक वर्द्धमानमक कहने है। यह सहक गुरु, अग्निदीति विरघात ज्योतिपी। वराहमिहिरने उनका नामोल्लेख कर, बलकारी, तृप्तिकारक, कफ, वात, पित्त, श्रम, ग्लानि किया है। __और तृणानायक होता है। (वैद्यकनिक द्रव्यगु० बर्द्धमान उपाध्याय-१५० ग्रन्थकार। इन्होंने पिणावली वर्द्धमानसरि-एक नमूनिका नाम | ये मामयदेवक प्रमाण, ग्लएडननगडपायाग, तत्त्वचिन्तामणिप्रसाग, जिग्य तथा १०३२ ई० में विद्यमान थे। उन्होंने पधा- न्याकुसुमाञ्जलिप्रकाश, न्यायनिवन्धप्रकाश, न्याय मिष्ट. कोप या शरणरत्नावली तथा उपमितिमय प्रपञ्चगम- प्रसाश, न्यागलीयाचना प्रकाश तथा प्रमेयनशेध यादि समुच्चय १९८८ संवत लिया था। प्रन्योकी रचना को। ये गश यो गद्गश्वरके पुत्र थे। बईमान ग्वामी-पक जैन तीर्धादरका नाम । महावीर देवा। २एक बिरयान पण्डित। ये कविश्रेष्ठ और महाधर्म- बईमानंग (10 पु० ) वर्धामानम्य ग वामान- घिराज भवेशके पुत्र थे। उन्होंने अपने पितासे पढा था। पुरके गजा । २ शिवलिङ्ग और मन्दिग्मेट । ये गलाकत्यविवेक, दण्डविवेक, धर्मप्रदीप, परिभाषा चयित (सं० वि० ) वर्धा-गिन् नृच । बदर्शन TIT, विवेक, स्मृतितत्त्वविवेक, स्मृतिनत्वामृत, स्मृनिनच्या वढ़ानेवाला। मृत, मारोद्धार बार स्मृति परिभाषा आदि ग्रन्य बना वा-मध्यप्रदेश चीफ कमिश्नरये दाधीनस्थ पर जिला गये। रघुनन्दन, कमलाकर और केशवने इनका मत उदधृत यह अक्षा० २०१८' से ले पर २१ २२ उ० नया देशा० किया है। ७८.३ मे ले कर ७६१४ पू० तक विस्तृत है। या जिल्ला वह मानक ( नं० त्रि० ) वई मान म्याथै संसायां वा फन ।। त्रिकोणारुति है। इसके पादमू मे चान्दा जिन्ला, पामे १ वृद्धिविशिष्ट, बढानेवाला। (पु०) २ शराब । ३ एरण्ड- नागपुर तथा पश्चिम बनिदी पहनके कारण वेगर पृक्ष, रेडोका बन्न । ४ आरलिक, भारती। यह अलग है। इसका भूपरिमाण २४२८ वर्गमील और वर्द्ध मानगणि-कुमार प्रशस्तिकाव्यके रचयिता । ये । जनसंख्या ३८५१०३ है। इस जिलेमें १०६ शहर और हेमचन्द्र के निष्य थे। गांव लगते है। जिले के अन्दर ४ मिडिल इगलिश स्कूल, वईमानदार ( स० क्ली० ) १ वर्द्धमानका प्रवेशद्वार । २८ वर्नाक्यूलर मिडिल स्कूल और ८८ प्रायमरी स्कूल है। हस्तिनापुर राज्यका प्रवेगद्वार। इनके अलावे १० अस्पताल और १ मवेशी अस्पताल है। बर्द्धमानपुर (सं० क्ली०) प्रारिशेप, गुजरातका एक इम जिलेकी अधिकाश भूमि पर्वतीने भरी है। सत- प्रधान नगर। पुरा पतिमालाफी एक मात्रा उत्तरसे लेकर इस जिलेकी चर्द्ध मानपुरीय (मं० वि०) बर्द्धमान नगर-सम्बन्धीय । दक्षिण पूर्णकी भूमि तक फैली हुई है। इसकी क्रमोच्च बद्ध मानपति ( स० पु०) वईमानस्य पतिः। वर्द्धमान निम्न तथा पथरीली भूमिमे विशेष कोई वृक्ष लता तथा पुरके अधिपति। शस्यादि उत्पन्न नहीं होता । ग्रीष्मऋतुमे पर्वतके ढाल्लू व मानमति ( स० पु० ) बोधिसत्वभेद् । अंशमे थोडे बहुत झाड-भखाड पैदा होते है। वर्या- चर्द्धमान मिश्र-एक पुस्तक प्रणेता। इन्होंने वर्द्धमान- ऋतुके बाद ये सब ग्यान पूर्णरूपसे तृणान्छन हो जाने प्रक्रिया नामक एक व्याकरण लिया। है। उस समय गो, महिप आदि पशु दल बाँध कर यहां वई मानसट्टक ( स० लो०) सट्टकभेद, जोरा मिला हुआ तृण इत्यादि चरने आते हैं। अटी तथा खन्दाली