पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६८०

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वलमोराजवंश ६६५ - - । ताम्रशासनले जाना जाता है, कि ये राजे “पच देवभट्ट धग्मेन श्य ध्रुवमेन २य । महाशब्द" व्यवहार करत थे। महाराज, महामामत्त, यारादित्य [गुप्त स. ३१०]] महाप्रतीहार, महादण्डनायक रथा महात्तिारूल्य ये शिलादित्य २य सरग्रह धर्मा धू धसनग्य . सब उपाधिया सम्मवत उनक पुरुषोंक राजकाप दित्य श्य [३७७ महाराजाधिराज गुप्त म.) पद निर्देर थों, अधस्तन व शधरने उम स्मृतिका घरसेन र्थ महारांनाधिरान शिलादित्य श्य लोप भरना पतव्य नहा समझा। म ध्रुवसेन अपने 1. (गुप्त स०३२) (गुप्त स. ३२६)। बौद्धधमालम्बी होने पर भा अन्याय धर्मविद्वपा नहीं पिलादित्य ४५ (गुम म ३७२) थे। बहुतसे तानशासम उनका वहन दुड्डा "परमो , शिलादित्य ५म ( गुप्त स ० ४०३) | पासिका" नामसे सम्मानित हुइ है। पलभीराज शिला • शिलादित्य ६४ (गुप्त स ० ४४१) । दित्य प्रथम धमादित्य सम्राट हर्षदरसे पराजित हुए । शिलादित्य ७२ ध्रुभट { गुप्त स ० ४४७) वालादित्य द्विनीय ध्रुवसनका ३१० सवत् चिहित सनापति भटाकै यद्यपि इस घ घोजपुस्य थे। (६२९ १० १० ) ताम्रशासन पाया गया है। इस धूय तथापि उनके पुत्र प्रथम मनने हा स्थमावत "पन ! सेनको नान परिग्राजक यूएनसियाने 'तु लू हो पाटे महाशद" युक्त गनोपाधि प्राण पी पध इस वशीय या ध्र यभटके नामले परिचित किया है।। राजाओंक जितने ताम्रशासन आवियन हुए हैं, उनमें ___उन्होंन परभीपतिको मारपति शिलादित्यका इस ध्र वसेनका तानशामन मी मप्राचीन है उसके मानना कान्यकुपन हपानक पुनका जामाता पठा २०० मक ट्राष्टगोचर होते हैं। इस अकको क्सिा क्षत्रिय नातीय कह कर उलम दिया है। ये धम्भीराज पदले हिदूधमावलम्बा होन पर भी इस समय वौद्ध किमी प्रातत्त्वविदुने चभीम पत" नामम निदेश दिया है। सुपसिद्ध मुमलमा पडित अठयेरुणी लिरत्नका उपासक हो कर धौद्धधर्म मपरवनवे माय सोय १०वीं शताब्दी २१ भागर्म रिन गये है कि, माश अत्यन्त दयालु विद्योत्साहा तथा धार्मिक हो गये पल्लमय श ध्वस हारे पर ०४१ अमान्दमें यह स पत् थे। प्रति वर्ग हो ये महाधर्मममा करते थे, नाताओं प्ररित हुआ। फितु हम लोग देखा है कि सेनापति को बहुतसे धनरत्न तथा उत्कृष्ट पाय पदार्ग दान देते मटार्षा द्वरादा वलमा यभ्युदय हुमा । इस थे आचायाका वन मैषज्याद तथा मूल्यमान् मणि हालतम उनक जमके शताधिक वर्ष पहले हो किम रत्नादि धाटन थे। दूरदेशाय श्राजायगा मभाम सद बनभोराजा ध्यसका बात स्वीकार की जा उपस्थित होते थे घे राजाय निस्ट विशेष मम्मानित सकती है। हम रोगों का विश्वास है कि, एक समय होते थे। उस ममय घग्भीराज्य आयतन ६००० ली पल्मो सुराष्टके शक राजामाक अधिकारमं था। २४१ घा हजार मोठ था और इसकी राजधानाका परिमाण शक वा ३१६ सन्दर्म तक राज्य स तथा गुप्त • लो था। इस देशका आवादी, जलवायु तथा भूमस्थान साम्राज्य स्थापित हुआ। २४१ शकान्दमें दो गुप्तसय माल्य राज्यक समान था । यह स्थान बहुन जनाकीर्ण था, सर आरम्भ हुआ। उसके बहुत घों क याद सेना राजधाना धगी लोगोंक उनत प्रासादसे समाधी पतियता अभ्युदय छोन पर मा चल्भीराजगण गुप्त एवं इम म्यानमे बदतमे राष्ट्रपतियोंका निमास था। सम्राटोंका सपत् प्राण परनको बाध्य हुप । ऐसा दशामें | गनेकों दूर-दूर देशी रत्नराति यहां सचित थी। यहाँ परमाराज्य घस हारसे ही बलमो सवत् आरम्म हाने शताधि सघाराम विद्यमान थे पर में प्राय ३००० का प्रगद प्रलतो कुछ असम्भव नहीं है। उत्त आचार्याका बास था। येसमा प्रायः मम्मताप शापा २०७ +२४१-४४८शक (या ५६१०)मम के हानयान थे। यदा सोहों मदिरे विद्यमान थे। ध्र पसनराय परत थे। उन तथा उनक वादफे राजाओं चीनपरिमाजाने इस तरहस पलमाका परिचय देकर