पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६८७

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७०२ वल्द-वल्मीक वल्द (१० पु० ) औरस बेटा, पुत्र । किसी मनुष्यके मिद्ध 'फरके काढा तैयार करना चाहिये। उस काढेको कुलके परिचयके लिये उसके नामके भागे इस शन्दका खेतमें छिडक देनेसे दीमक तो मर जाते है, किन्तु इससे व्यवहार करके उसके पिताका नाम रखा जाता है। जैसे- कुछ पौधे नष्ट हो जाते हैं एवं यह पौधेके खाद्यपदार्थको 'गोकुल बल्द बलदेव' अर्थात् "गोकुल, बेटा बलदेवका"।। शनि क्षीण करता है। मैदा या सत्तू के साथ से कोविष दरतावेजों और सरकारी कागजों आदिमें जिनकी भाषा मिला कर गुड मिलायें, इसके बाद उस मिश्रित पदार्थका उर्दू होती है, इस शब्ददा प्रयोग होता है। पिण्ड यना कर दीमकके टोल के पास रन देवे। उस पल्दियत (अ० स्त्री० ) पिताके नामका परिचय, वापके | पिएडके खानेसे दीमक निमल हो जाते है । यक्षधूप- नामका पता। जैसे-अपनी चल्दियत और सकूनत | निर्यास ( Dammer oil ) १२ अंश तथा गामीके वृक्ष- लिखाओ। निर्यास (Uncatla gambar), दोनों को मिला कर फाष्टमें वलसन ( स० क्ली०) चल्भ भक्षणे भावे ल्युट । भक्षण, लगा देनेसे दीमक नहीं लग सकत । संस्त्रियाचूर्णको साथ तृतिया मिला कर घाट पर मल देनेले दीमक मर, जाते खाना। वल्मिक (सं० पु० क्ला० ) बल्मीक । है अथवा सम्विया, मुसव्यर, साबुन तथा सजी, इन सव- कोलके माथ अग्निमें उबाल कर उस जलसे काष्ठको वल्मीक (स० पु० क्ली०) चलने इति धल सवरणे ( अशी | धो देनेरी भी दोमकों का नाश हो जाता है। कायदयश्च । उण ४१२५) मुमागमः कीकनान्तो निपातः । १ उयिकाकृत मृत्तिकाम्तूप, दीमकोका लगाया हुआ मिट्टो __ ये पुत्तिका कीट ( Inte Ant) मैदान, ग्वेन तथा प्रामके का ढेर, विभोट । इसका पर्याय-वामलूर, नाकु, चलिमक, रारतेके किनारे एक एक मिट्टोका स्तृप बना कर उनमें वाल्मीक, वाल्मीकि, वा लेमकि, पुगलक, शफमूर्दा, कपि, वास करते हैं। शैलक। (शब्दरत्ना०) मारतवर्पमे, विशेषतः निन्न बनके प्रान्तर प्रदेशमै एवं हम लोग घरकी दीवार तथा काष्ठके वने स्तम्भ सिंहल द्वीप, उत्तमासा • न्तरीप तथा सेन्टहेलना द्वीपमै प्रभृतिमें पक प्रकारका पुत्तिकाकीट ( Terinites ) देखते बहुतसे दीमक देखे जाते हैं। उनके मन्टंग तगा कोना- हैं। वे दीवार वा काष्ठके ऊपर मिट्टोका ढेर लगा कर फार मृदस्तृगणोंको आकृति देख कर स्वतः ही मनमें विस्मय उसके अन्दर आवागमन करने है, फिर कभी कभी फाष्ठ- पैदा होता है। कही कहीं उनके मृत्तिकास्तूप २ से १६. खएडके अन्दर सुरङ्ग बना कर काष्ठकी बडी क्षति करने १७ फीट तक ऊंचे देखे गये हैं। हैं। किसी काष्ठके अन्दर एक बार दीमक लग जानेसे फिर उसका उद्धार नहीं। अलकतरा, सावुन तथा चूना ग्वुलना अथवा ग्वालन्द जानेवाली रेलवे लाइनके वरावर घरावर भागसे जल के साथ अग्निमें उबाल कर किनारे किनारे एवं उसके पास पासके खेतोंमें ४।५ फोट काष्ठ पर मल देनेसे दीमक नही लगते । कभी कभी मोम ऊँचे अनेक वल्मीकस्तम्भ देखे जाने हैं। ये वल्मीक तथा तारपिन लगा कर दीमक नाश किये जाते हैं। साल कीडे जिस परिमाणमें मृर्तिका स्तूप ऊचा करते हैं, साल वर्षासे पहले काठमण्डौ ब्रह्मदेशजान मिट्टीका तेल उसी परिमाणमें वे पृथ्वीफे सन्दर गडढा खोद कर वहाकी लगानेले दीमक नहीं पकडते। मिट्टो ऊपर उठा देते हैं एवं उसी मिट्टोके द्वारा वे अति ईश्वकै खेतमे भी बहुत दीमक पैदा होते हैं। वे ईखकी सुचाररूपमै एवं विशेष शिल्पचातुर्यके साथ उसके अन्दर जड काट कर फसल नष्ट कर डालते हैं। इसलिये ईखके अपनी आवश्यकतानुसार गृहादि नोद लेते हैं , अर्थात् खेतसे इसे दूर करनेके लिये कितने हो उपाय अवलम्बन । यदि वल्मोकका एक भूपृष्ठोपरिस्थ कोनाकार स्तुग ७ किये जाते हैं। हींग ८ छटाक, सरसों ८ सेर, सडी फीट ऊंचा है, तो समझना चाहिये, कि मिट्टीके नीचे मछली । सेर, अतिविपामूल चूर्ण २ सेर काफी जलमें उतना ही फीट गहरा गड्ढा खोद कर उन कीड़ोंने अपूर्व