पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६९९

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वल्लभाचार्य ७४ यहां नारायणमट्टके अधीन कामलप्रकृति वालक | शास्त्रोम सुपण्डित हो गये। प्रयाद है, कि इन्होंने चार वल्लभकी अध्यापना चलने लगो अपनी सुकृति और मासके मध्य सस्कृत साहित्य और दर्शनशास्त्र, सम्यक अध्यवसायके वल बालक थोड़े ही दिनोके मध्य नाना | व्युत्पत्ति लाभ को थी। mihanimukari2-. ना . - .. Titannicialin ..........s-et- . .. ... । ..... mmmmmforner F mewan -- ..


. .. dot श्रीवल्लभाचार्य महाप्रभु। ग्यारह वर्णकी अवस्थामे आपके पिता स्वर्गधामको गये। यह सव देव सुन कर वे धर्मपथाश्रयको हो चित्त- मिधारे। इसी समयसे सांसारिक विश्टड्वलाने उनके भारापनादनका एकमात्र अबलम्बन जान धर्मशास्त्रा- पाट्य जीवनका तमनाच्छन्न कर डाला। इससे उनके लोबनामे प्रवृत्त हुए। क्रमशः साम्प्रदायिक और सामा- शान्तिमय चित्तमें घोर सासारिक विरह आ कर उपस्थित जिक आचारादि संस्कार द्वारा एक अभिनव धर्ममत हुआ। उस विडलाके साथ साथ साम्प्रदायिक आचारा; स्थापनकी आशा उनके हत्यमें जग उठी। नुष्ठानका वैसा दृश्य देख कर वे और भी हतज्ञान हो इस उद्दीपनाके वशवती हो वल्लभ वाल गोपालने