पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७०६

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वसईद्वीप ७५ म पर अधिशर करनेमें पूरी सुविधा होगी। रोमकों। १२६४ इ०म दिलीयर अराउद्दोनके निकट रामदेव नेइजिप्ट पर अधिकार कर लेनेके बाद भारतीय वाणिज्य के पराजित होने पर थोडे ही दिनों मध्य ममस्त पर अपना पफमान अधिकार पमा लिया था । इम | दाक्षिणात्य मुसलमानोंक अधिकारमें चला गया था समय अरव समुद्रम मा करनेश अधिकार विदेशियों सही, कितु उस समय मा सरदीपपत्ति अपना का बिल्कुल हो नहीं रहा। ग्रीक ऐतिहासिकने लिया है। म्वाधीनताको रक्षा कर रहे थे। जिसके प्रसिद्ध कि उस समय मारगनम' (Saraganos) सारग नामक पर्याटक मार्को पोलो १२६५ इमें श्रीस्थान थापे। यहा एक राजा कल्याण वमा तथा दम्यइ प्रभृति स्थानोंक ) को समृद्धि देख कर चमत्कन हो उठे थे। उन्होंने लिखा अधिपति थे। प्रोकोंके साथ उनको मित्रता थी, कि तु] है, कि यह स्थाा प्रतीच्यके एक सुविस्तृत पमपदकी 'सन्दनेस् (Sandanes) या चादनेशने उनके राज्य पर | राजधानी था। यहाफे राजा स्वाधीन थे। यहाके अधिकार नमा पर विदेशियों के प्रति वाणिज्य निषेधाज्ञा अधिवासी पौत्तलिक कहलाते थे। वे लोग देशीभाषा की घोषणा की, यहा तक कि कितने ही विदेशियोंको म बाते करते थे। उनके समय में यहा उत्तए धर्म पैदर कई पहरेके साथ भरोच भेज दिया। इस प्रकार तथा कपासके सान, मसलिन एच सोना चाँदीका प्रोकोंके निर्गमित होने पर भी रोमाने माररासे | व्यापार होता था। श्रीस्थानमें नदीसे जलदस्युगण बाहर वाणिज्य समग त्याग नहीं किया। जटिनियसके राजत्य | हो र यधेट अत्याचार करते थे। कालम भी कल्याणका वाणिज्यप्रभाव ससार मरमें! १३११ १० में मुमलमान वितृगणको तोवष्टि इस प्रसिद्ध था। मिनका प्रसिद्ध वणिक क्समस (Kosmos अञ्चल पर पही। उनके उपद्रव तथा अत्याचारसे यहुत Indikopleustes) माय ५४७९० कन्याण आये। वे यहा दिनों तक यहाक अघियासीगण विपत्ति सागरमें गोता के बहुसय्यक एनानों को देख कर बहुत विस्मित हुए।) लगाते रहे। उस समय फेवल वहाके पाशिदे ही नहीं ये सब गुप्तान लोग पारसके नेप्टोरियन विपके धर्म परन् कितने ही विदेशी धर्मप्रचारकगण भी अपने शासनाधीन थे। इसके बाद राष्टीय वीं शताब्दी में जीवनसे हाथ धो बैठे। १३३० ४०म प्रिउली निवासी चीन परिव्राजय यूपनचुवग या कर यहाकी वाणिज्य | सन्यासी ओदेरिप ( Frhar Oderic of Prun ) पणन ममृद्धि योजस्वनी भाषामें वर्णन कर गये हैं। कर गये हैं कि १३२० इ०में फ्रामिम्कान खष्टीय सम्म ____ इस डापके अनगत श्रीस्थान या ठाना बहुत पहलेसे दायभुक ननस (Jordanus) नामक ए सन्यासान हो राजधानी में गिा जाता था। पष्टीय स्वीं शताग्दीके अपने साथी चार यतियोंको ममाधिस्थ करनेके वाद शेषमागर्म यहा शिलाहार-राजयशका अभ्युदय दुमा ।। मुसलमानोंके हाथसे जीवन विसर्जन किया था। उनके समय में धीरधान लक्ष्मो मरस्वतीका प्रियस्थान ओदेरिक अपनी स्वदशयात्रा समय उस सव सुप्तान था। यहा हो अशेर शास्त्रविद जीमूतवाहन राज्य माधुओंका हड़ियां जहानमें भर कर अपने माय ले गपे। करत थे। कुछ दिनों बाद फिर भारतमें आपे। वे बहुत से सह- खटाय १३वों नतान्दा पप्य त यरलाट शिलाहारयश चरोंके साथ वसाद्वापर्म हो फालयापन करने लगे। के अधिकारमें था उसके बाद यह यादवराजयशफे मधि | उस समय मुसलमान काजीगण विदेशियों के ऊपर पिस कारमं चला गया। वसईस ११६४ तथा १२१२६० में । तरह अत्याचार करत थ, 'मोरिक उसे रिपिवद्ध कर उत्कीर्ण यादराजव शासनपत्र पाया गया है। यादवों गपे हैं। यिशाप जेरोनिमो ओजेरियो (Jeronimo Ourio) के मुसलमान की अधीनता स्याकार करने पर कोरणका ने लिखा है कि उन सब मानसिम्मान सामने रख यह शबण्डमण्डमें विभक्त होकर महिमके भीमराज | द्वीपमें एक सुपृहत् अष्टमन्दिरकी स्थापना की थी। देवगिरिक रामदेय पर नायक घगोलि तथा भडारो रेयनार्दो पायस ( Leonardo Paes) नामक सप्तान उपाधिधारी मामन्तोक शामनाधीन हो गया था। वर वर्णम जाना जाता है कि वरञ्जदीपानीले