पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७०८

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वसईद्वीप ७३३ एक छोटे किले पर अधिकार कर लिया। इस समय | एक छोटा मा बदर है, दक्षिण पूर्व माणिकपुर महल में परजी रक्षाफ लिये शालसेरीके शासनकर्ता | एक रेल्वे स्टेशन है उत्तरर्म गधनासी या अगासी महाल, लाडी-घटेरहो, पमह दुर्गको रक्षाके लिये कप्तान | सयवन में प्रसिद्ध दुर्ग फर्मतमय तु गारिमें प्रमिद तुगा पेरिरा पध धन्दोराके सनाधामको रक्षाके लिये | रेश्वर मदिर निर्मलमें प्रसिद्ध विमलेश्वरतीर्थ, सुपारम कप्तान पराज नियुक्त हुए। इधर भोसलेने गोमा पर प्राचीन तीण तथा प्रसिद्ध पदर है। बाजीपुरके निकट आक्रमण किया। महाराष्ट्र सेनापति चिमनाजी अप्पा | यती पापरणाममें बहुतसे चित्पायन, पराढ और देशस्य बहुनसे सैन्य सिपाहियोके साथ दुर्ग भेद कर पुतंगोतो ग्राह्मण पय पलसा मोनार प्रभृति दूसरे दुमरे निम्न के सम्मुत्र युद्धके लिये अप्रसर हुए। दूसरी ओर मराठी घेणोके रोगोंका वास है । धार्पिक राजस्व प्राय: १८०३०) सेनाने शालीको घेर लिया एच वरसोया तथा घरावी | रुपये हैं। द्वीप दखल कर वसइके पूर्वाशकी साडीशा रास्ता रोक १७८० इ० म प्रेज सेनापति गडाईने १२ दिन रखा। क्लेिके चारों ओरसे घिर जानेके कारण पुर्तगाजो घेरा द्वाल पर घमा पर अधिकार नमाया। इसके को बाहरी सहायताको मा आशा न रहो। १७३६०को । याद १७८२ ई०में सलवाईको मधिफे अतुमार इण १७वी परवरीस मराठी सनाने यस इडिया कम्पनीन मराठोंका यह स्थान छोड़ दिया। लिया। लगभग तीन महीने तक किलेफे घिरे रहनेके | अतम १८५८ इ०में पेय पदच्युत करके उनके वाद पुर्तगोज लोग आत्म समर्पण करनेको वाध्य हुए।। दूसरे दूसरे अधिकारके साथ माय वसई द्वीपको भी इस पराजयके साथ ही पुतंगोजाफे गौरव-सूर्यको अस्त बम्बइ प्रेसिडेमीके अन्त र दिया। दुआ। थोडे ही दिनाके अन्दर पुत्त गीजोंने अपने घनफे १८४० ६०में वसा पार्श्व यत्ती कल्याण खाडीमें साथ चिरकाल के लिये इस नगरीका परित्याग किया। । वाघ तैयार करनेके लिये कोट आप डाइरेपटरने हुपम घमा मराठोंके हस्तगत होने पर मी यहाकी गज । जारी किया। इस बाधक होनेसे अब समुद्रका पाना धानो सौन्दय नए नद्दों हमा। कुछ ही दिनोंके | ऊपर नहीं आता, इमसे बहुत-से जमीनका उद्धार हुआ अन्दर एक सरसूस' नियुक हुए पव पाणकोट नदीमे । । १८७२ में रेग्ये कम्पनीन लोहेका एक सुदृढ ले कर दमन पर्यत सारे देश उनके शासनाधीन हुए। पुल तैयार कर वसाको बम्बइफ साय सयोजित दर इम समय चसह नगरमें सम्मात हिन्दुओं का वास नहीं दिया है। महाराष्ट्र के अधिकारमें आने पर निस तरह था, यहाक अधिकार अधिवासी पुर्तगीजोंके अत्या यहाफे बहुनसे प्राचान हिदूतीयों का उद्धार पुमा, उमी चारके भयस सस्तान हो गये थे। पेशवा माधररावने | तरह पुर्तगोजोंको गोको वोतिया नष्ट हो गई, उनमें हे फिर दिदू समाजमें रानेके लिये कितने ही ग्रामण | १० प्राचीन गिजों को पुरिद्वार खम्ता पादरियों द्वारा नियुक्त किये। उन ब्राह्मणों के भरणपोषणये लिये हुआ । इन सब गिर्जीप फारकार्य तथा शिल्पनेपुण्य प्रजा पर एक कर लगाया। पेशवाकी इस सहृदयतासे देखने योग्य है। बहुतमे जातिच्युन हिदू प्रायश्चित्त कर फिर हिंदू डिपो टो कोरोने लिखा है, कि पुर्तगोजोंने यसई पर समाजमें आ गये। क्रम फमस महाराष्ट्र तथा गुर्जरसे अधिकार करके यहाफ मन्दिर पत्रोफएम )का विध्यम बहुतो सम्भ्रात लोग यहा था पर वस गपे। उनमें | क्यिा । उन लोगोंने मदिर मिहद्वार पर एक पत्थर प्रभुकायस्थ लोग हा प्रधान थे। इस समय भी वह लिपि मोदी देखी। वहास ला कर पुर्तगीज गवर्नरी शहरमें प्रभुकायस्थ लोग ही धन जनमें श्रेष्ठ हैं। हिंदू मुसलमान द्वारा उसे पढानेकी चेष्टा का। किन्तु वर्तमान घसा शहर बाजीरावके नामानुसार जय कोइ पट न सका नब उन्होंने उसे पुर्तगाल के राजाके याजापुरके नाममे विग्यात है। इस यस जिलेके अत पास भेज दिया। पुर्तगीजपति यो जोमायने उसे पढारी ति१६१ मौने हैं। इन सब प्रामों के मध्य सानिवडे ममें ! की बडी चेष्टा की, परन्तु चेष्टा घ्यथ हुई। अन्तम १७६५ Vol xx 184