पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७२

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रोप-साम्राज्य नेरियासको मृत्युके बाद ३७ ६०में काली । स्थापन पिया। लिगेट, प्रिफेट प्रोकि ओरेट मीर लोहे गुलाने साम्राज्याधिकार पाया। यद दुपत कोपन' हुप गुलाम ( Treedmen) उसके अधीमें रह कर सर म्यमान, गर्यित गौर हानथाप उ माद प्ररतिका गनुर' हारका कार्य करने लगे। इस तरह शक्ति रदिफे साथ था। उसके बाद ३१वीं में या नियाँध कटि ' साध मिसेप्मको मर्यादा बढ़ गइ। धीरे धीरे यथार्थ यम, ५४ में नरपिशाच निरो, ६८१०में गालवा, ६६ यह राज्यश्वर हो उठा। १०में ओधो और पशुपाति, निष्ठर अत्याचारफे अगर दोनदान प्रभावी तरह अपेक्षाकृत छोटे आमोद प्रिय मिटेलियासने रोममा राज पद अधिकार मानने रह कर मामान्य और सालभायसे पोरन पिता किया। इसके बाद उत वषके अत समया भेन्पेसि गया है। किंतु वादये शासकोंन एश्ययं मस मस पानने मसनद पर बैठ कर इटली नगरवामी और पश्चिम हो कर उस सरलताको पदमर्यादाको तोड दिया। घे सामान्य विभागके प्रदेशवामी रेटिन जातियोंसे समी रानाकी तरह चमक-दमके पक्षपाती हो गये। सभ्य मनोनीत करनेकी भाशा जारी की । इससे रोमकी नोरोके राजत्वालमें यह पूर्णरूपसे प्रकाश हो गया। सनेटको शनि पुउ अधिक बढ़ गई। इस वाद ७१ रोमन सम्राटके राज्यकाय्य नियाद करने योग्य मायश्य इम दास, ८१ १० कापुरुष डोमिटियान, १६' काय उपयोगा द्रष्य राजसरकारमें विराजमान थे। उसके १० नेर्मा, ९८ ३० द्विजान और १७७६०में हादिया हा यत्नसे ए अलग राजमहर घना। महलके रक्षक न कमसे रोमके राजपदको मर कृत दिया था। इसकी बडे पतने रक्षा करने थे। यह मन्त्रि मएल टन सोने मेपेसियानकी प्रवत्तिन प्रथाका अनुसार में घिर कर सम्राटको सरद गरके साथ विवरण परता गेमीय सेनका प्रयल प्रताप पर्व पर दिया था। रोमाने या मीर उसक भव्यभवनम रोमदा एक ग एक उत्सव स्वेच्छा और सहानम जिस सरकारका अनुमोदन । हुआ करता था। उसके मर जाने पर इस अयस्थाम पर एक हाथम राज्य भार सौ पापा उन्हींक भत्या ! बहुत परिवर्तन हुआ। क्योंकि उमके वादफे गल चारसे मीतर घृणा प्रकाश करन पर भी बाहर तोपा , प्रयोय पशाय मेपेसियान मादि सम्राट् ट्रमन, दियान, मोद करने पर वाध्य हुए थे। किन्तु ये नतानो लुप्त । माएटोनिनाम उस सुख समृद्धिको अतृमवासा न स्वाधीनता समृद्धिको बिलकुल भूल न मका , हव र अपेक्षारत सरल्सासे ज्ञापन विता गये हैं। ___ अगष्टस्फे पादसहालियान त राजामौंक अधिकार, कालगुला पा नारोको तरह घे अन्याय तोपामोर कालम रोमका याद्यमातम्यर बहुत बढ गया था। इस प्रिय न थे। उनके इस सरल और सदृष्ययहारके परि समयसे दी मिसेप्साको छोड रोमको मयान्य शचिया बत्तनस रोमर्म पर नपे युगका सूत्रात मा। साम दास होने लगी। अगष्टम, राइयेरियास और कोदिपान- रिक और राज्यशामन पूर्णरूपसे प्रतिष्ठित होकर उत्तरों इन तोनों सम्राराके पासनकालमें राजशक्ति और शासन सरगत दुमा । कालीगुला और नोरोफे शासन कालम मार उनके ऊपर हा छोड़ दिया गया था। शिव सेनायिमागी मोरसे 'रम्पारेटर कह कर सम्मानित मायाग्य सामारि शिथिल होने एगो तप रोमराज्य हुभा परत थे और पीछे सनरने उनको गति देशे। एक मामूल परियन भरश्यम्मावी हो उठा। मगटस् । एकाएक इस तरहफे उगफै माय परियरानमे रोमर्म को छापेरिपस फूट जोतिफ बरसे मौर निलिममापसे लिप मायान्तर नदियाइ मेन पर भी रोम पाहरी प्रनाम पर रापालिका प्रमाय देखता था, पश्गुिमा डिपम उसका यये मामास मिला था। रपेनमें शोजन द्वारा भौर गारोन उस तरह टिपे तौरराग दम अपाम् इस गारपार मम्मानस हा राममें मप युगा मयनारणा नातिका धुणा साध र मापपसे मासन । रा। उसी समयमदीपचाप निम्मामोंका निवारा जाप्य राममधिमागमें मामरिक पिमागर्म मार पर सम्मति हासनम न देन पर भी यास्तवम उनकी माता शिरासन सम्यग्ध मिसिस सयमयपश्य। सहारामा रामशति सम्पन दोन ये मोर राजगतिकी Sol,x. 18