पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७२६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


वसव तर है तब तक मुझे सि वातका चिता है। यह कह । स्वतम र देंगे। इनक अलाये और पया दसत पर उहो ने राजाको धनागार दिखा विस्मित कर दिया है, फिलानों लिट्रायत शैव उनकी राजधानी घेरे हुए है प दिन राजममा पसाने भस्म लगानेश और मम्ला उहे धन बाट रही है। यह दखन ही उनको माहात्म्य कहा राजा जैन धर्मावलम्मी थे। भस्म लगाने क्रोधाग्नि धधक उठा। दूसरे दिन दोंने चमयको यूव या लिदकी उपामना पर उनकी तनिक भी प्रदान था। डॉट पट को। वसा यह डाट अपर कब सुरानेवाले थे। यसवर्षे मुखसे भरमका माहात्म्य सुन राजा हंस पडे। उन्होंने कान पर हाथ रखा पराधीनता उहे असा जान सौर पक नीच जातिका स्रोश दिखा कर उनसे पूछा। पड़ी। उसी समय उन्होंने राजाका जो कुछ था उसे 'यह देखो मस्मात हवामे पैमी पवित्र सुरा ने कर ना मर्पण कर कल्याण राजधाना छोड चले । रहो। यमाने उसा ममय उत्तर दिया-ऐसे पवित्र यर । प्रखर रौद्रतापमें अनाहार चलते चलते जब परह सनमें सुरा कदापि नहीं रह सकती । यद कह कर राजा । कोस आये तव एक पुरोहितसे उनकी मुलाकात दुई। का डोमें सुराफे पदो दूध दिखा दिया | मथ कोइ पुरोहित बडे यत्नसे उहे अपने घर लिया गये । यक्ष समतत हो गये । कुछ दिन बाद एक दातिक । भगवान्ने उहे स्वप्न दिया, 'वत्स ! चिता मत करना। कल्याणी रानममा जो उपस्थित हुए। उसके साथ अमुक स्थानके गत्त में तुम एक हार पावागे, उसासे बहुत से शिष्य और दा हाथी पर लदी हुइ पाथिया गीं। तुम्हारो सारी तकलीफे दूर होगी।' सयेरा होने पर वे समामे नितने सभ्य धैठे थे, मीन तो घेदातिकका उम गर्तक पास गये । गर्त में हाथ देने हा एक विषधर मम्मान किया पर यसरी अपनी ओर आँस्य भी टेढो न | माप निश्ल पढो। भगवान्को लोला अपार है, पैदान्तिकने यह देख लिया । उहोंने उनको ओर पनाइते ही वह साप मूल्यवान हार हो गया। यह हार येव पर राजासे पूछा ये मम्मोभूत मूनि कौन हैं " राजान कर वसपने प्रभून धन पाया पर उत्तोसे महासमोरहक यसपकी घडाइ करते हुए अपना मना बताया । अन तर साथ फिर जङ्गमका सेवा करने लगे। विजलराजन घेदातिक उनसे शास्त्रालाप करन गे। यमय ए ए | उनकी अपूर्व क्षमता पर विमुग्ध हो फिर हे मत्रित परके उनके सकों को कारने गये। मतमें चैातिक प्रदान क्यिा । उसका क्षमता और भी बढ़ गह, हजारों शिवको निन्दा करने सगे । तव बमरने पहा,-शिक मनुष्य आ कर उनके भर हो गये। निन्दा करते जाने में ग्रह्माका दमिर गया था। इस प्रकार छन्नवमपुराणमें लिया है कि उसके चरित शिवनिन्दकी भी सिर लेना उचित है, ऐम व्यक्तिके वल, धानप्रमाव और अलगैतिक गतिक फलसे शैव साथ शास्त्रार्थ परनेमें गोमा नहीं होतो । खहका पुतला] सम्भदाय प्रतिष्ठित हुआ। इस समय यसको ज्येष्ठा ऐसे मर्माचीनकै साध शाखा कर मरता है । वैदाति मगिनो भागलाम्बिकाके गर्भ स्यय भगवान् शिव मय • ने छहका एक पुतला बना कर यसको दिखाया। पया नीर्ण हुए। नागलाम्बिया चिरकुमारा अपच पयस्या आश्चार घसयने उसो म्रहमें जीवनदान दर उमौसा घो। उनका गर्भ देख नाना मादमी नाना तरदको यातें चैदातिकला दर्प चूण किया। पाछे वैवातिपने हार खा वोलने लगे। यहा तक, कि राजाके पास मा इसको कर अपने शिष्योंके सहित यमयका शिष्यत्व ग्रहण शिकायत हुइना विचार कराके लिये नागलाम्बिया किया। को युलचा रस गमरे होने कारण पूछा। साध्वी ____एक दिन बहुत लोगोंफे कोलाहलमे पिज्जारानकी कुमारीने अपिठतमावसे राजाको कहा, स्वय भगवान् नींद हट गह। पेस गमीर रातिमें प्रासादकी छत पर मेरे गर्भ थापे हैं। यह उनकी देवपरिचयाका पल चद पर क्या देखन है, कि चारों ओर लोकारपय है, है।' राजान इतने में हो सकी चातका विश्वास न किया। आलोषमालासे ममस्न पप ऐमा हो गया है मानों दिवा वितु या माश्चर्य नागलबिमाके गासे स्वयं भग भर दिनके यवले माप रत होम अपना सारा ज्योति । यान्ने हुशार किया। सभा अचम्मेम पह गये। यथा